rashifal-2026

यदि आपके परिजन का पंचक काल में निधन हुआ है तो क्या करें, जानिए

अनिरुद्ध जोशी
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चन्द्र ग्रह का धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण और शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद तथा रेवती नक्षत्र के चारों चरणों में भ्रमण काल पंचक काल कहलाता है। इस तरह चन्द्र ग्रह का कुम्भ और मीन राशी में भ्रमण पंचकों को जन्म देता है। यदि आपके परिजन का पंचक काल में निधन हुआ है तो क्या करें, जानिए।
 
 
पंचक में नहीं करते ये पांच कार्य : 1.लकड़ी एकत्र करना या खरीदना, 2. मकान पर छत डलवाना, 3. दाह संस्कार करना, 4. पलंग या चारपाई बनवाना और 5. दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना।
 
पंचक की मान्यता : 
1. गरुड़ पुराण सहित कई धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि यदि पंचक में किसी की मृत्यु हो जाए तो उसके साथ उसी के कुल खानदान में पांच अन्य लोगों की मौत भी हो जाती है।
 
 
2. ऐसी मान्यता है कि यदि धनिष्ठा में जन्म-मरण हो, तो उस गांव-नगर में पांच और जन्म-मरण होता है। शतभिषा में हो तो उसी कुल में, पूर्वा में हो तो उसी मुहल्ले-टोले में, उत्तरा में हो तो उसी घर में और रेवती में हो तो दूसरे गांव-नगर में पांच बच्चों का जन्म एवं पांच लोगों की मृत्यु संभव है।
 
3. मान्यतानुसार किसी नक्षत्र में किसी एक के जन्म से घर आदि में पांच बच्चों का जन्म तथा किसी एक व्यक्ति की मृत्यु होने पर पांच लोगों की मृत्यु होती है। मरने का कोई समय नहीं होता। ऐसे में पांच लोगों का मरना कुछ हद तक संभव है, परंतु उत्तरा भाद्रपदा को गृहपंचक माना गया है।
 
 
4. पंचक में जन्म-मरण और पांच का सूचक है। जन्म खुशी है और गृह आदि में विभक्त इन नक्षत्रों के तथाकथित फल पांच गृहादि में होने वाले हैं, तो स्पष्ट है कि वहां विभिन्न प्रकार की खुशियां आ सकती हैं। पांच मृत्युओं का अभिप्राय देखें तो पांच गृहादि में रोग, कष्ट, दुःख आदि का आगम हो सकता है। 
 
5. कारण व्यथा, दुःख, भय, लज्जा, रोग, शोक, अपमान तथा मरण- मृत्यु के ये आठ भेद हैं। इसका मतलब यह कि जरूरी नहीं कि पांच की मृत्यु ही हो पांच को किसी प्रकार का कोई रोग, शोक या कष्ट हो सकता है। 
 
6. खासकर यदि मृत्यु पंचक में मृत्यु हुई है तो ही इस पर विचार किया जाना चाहिए। शनिवार को मृत्यु पंचक रहता है। 
 
पंचक में मृतक का उपाय :
 
'प्रेतस्य दाहं यमदिग्गमं त्यजेत् शय्या-वितानं गृह-गोपनादि च।'- मुहूर्त-चिंतामणि
 
1. अब यदि किसी व्यक्ति का पंचकमाल में निधन हुआ है तो लकड़ी एकत्र करने के कार्य के साथ ही दाह संस्कार भी करना ही होता है। ऐसे में पंचक का क्या उपाय है।
 
 
2. यदि पंचक काल में शव दाह करना अनिवार्य हो तो शव दाह करते समय पांच अलग पुतले बनाकर उनका भी उसी चिता के साध दाह संस्कार कर देना चाहिए। गरुड़ पुराण के अनुसार पंचक में शव का अंतिम संस्कार करने से पहले किसी योग्य विद्वान पंडित की सलाह अवश्य लेनी चाहिए। यदि विधि अनुसार यह कार्य किया जाए तो संकट टल जाता है।
 
 
3. पंडित के कहे अनुसार शव के साथ आटे, बेसन या कुश (सूखी घास) से बने पांच पुतले अर्थी पर रखकर इन पांचों का भी शव की तरह पूर्ण विधि-विधान से अंतिम संस्कार किया जाता है। ऐसा करने से पंचक दोष समाप्त हो जाता है।
 
4. गरुड़ पुराण अनुसार अगर पंचक में किसी की मृत्यु हो जाए तो उसमें कुछ सावधानियां बरतना चाहिए। सबसे पहले तो दाह-संस्कार संबंधित नक्षत्र के मंत्र से आहुति देकर नक्षत्र के मध्यकाल में किया जा सकता है।नियमपूर्वक दी गई आहुति पुण्यफल प्रदान करती हैं। साथ ही अगर संभव हो दाह संस्कार तीर्थस्थल में किया जाए तो उत्तम गति मिलती है।

5. यदि आप समय पर पंचक का उपाय नहीं कर पाएं हैं तो किसी पंडित से पूछकर नदी के किनारे विधिवत रूप से भी पंचक का निदान करवा सकते हैं।

सम्बंधित जानकारी

Show comments

ज़रूर पढ़ें

Guru gochar 202: बृहस्पति का कर्क राशि में गोचर, विपरीत राजयोग से 4 राशियों को वर्ष 2026 में मिलेगा सबकुछ

December 2025 Horoscope: 15 से 21 दिसंबर का साप्ताहिक राशिफल, जानिए किसे मिलेगी सफलता?

Shani Gochar 2026: शनि की मार्गी चाल से 5 राशियों को मिलेगा वर्ष 2026 में सरप्राइज

Karmas 2025: खरमास में क्या करें और क्या नहीं, 5 अचूक उपाय से बदलेगा जीवन

जनवरी 2026 में 4 राशियों को होगा बड़ा फायदा

सभी देखें

नवीनतम

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (18 दिसंबर, 2025)

18 December Birthday: आपको 18 दिसंबर, 2025 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 18 दिसंबर, 2025: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय

वर्ष 2026 को सबसे अच्छा बनाने के लिए लाल किताब के 12 अचूक उपाय और 5 नियम

Paush maas amavasya 2025: पौष मास की अमावस्या का महत्व और उपाय अचूक उपाय

अगला लेख