Hanuman Chalisa

प्रदोष क्या है, जानिए कैसे करें इस दिन पूजा, पढ़ें विधि, मंत्र एवं मुहूर्त

Webdunia
Pradosh Vrat 2021


 
वर्ष 2021 का पहला रवि प्रदोष व्रत 10 जनवरी को मनाया जा रहा है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार, प्रदोष व्रत प्रत्येक मास की त्रयोदशी तिथि को होता है। एक मास में यह व्रत दो बार आता है। हमारे शास्त्रों में प्रदोष व्रत की बड़ी महिमा है। रविवार को आने वाला यह प्रदोष व्रत स्वास्थ्य की दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। इस व्रत में पूजन सूर्यास्त के समय करने का महत्व है। यह व्रत करने वाले की स्वास्थ्य से संबंधित परेशानियां दूर होती हैं अत: स्वास्थ्य में सुधार होकर मनुष्य सुखपूर्वक जीवन-यापन करता है। यहां प्रस्तुत हैं रवि प्रदोष व्रत की पूजन विधि :-
 
आइए जानिए पूजन विधि, मंत्र एवं मुहूर्त-
 
पूजन सामग्री : एक जल से भरा हुआ कलश, एक थाली (आरती के लिए), बेलपत्र, धतूरा, भांग, कपूर, सफेद पुष्प व माला, आंकड़े का फूल, सफेद मिठाई, सफेद चंदन, धूप, दीप, घी, सफेद वस्त्र, आम की लकड़ी, हवन सामग्री।
 
कैसे करें पूजन : रवि प्रदोष व्रत के दिन व्रतधारी को प्रात:काल नित्य कर्मों से निवृत्त होकर स्नानादि कर शिवजी का पूजन करना चाहिए। प्रदोष वालों को इस पूरे दिन निराहार रहना चाहिए तथा दिनभर मन ही मन शिव का प्रिय मंत्र 'ॐ नम: शिवाय' का जाप करना चाहिए। तत्पश्चात सूर्यास्त के पश्चात पुन: स्नान करके भगवान शिव का षोडषोपचार से पूजन करना चाहिए।
 
रवि प्रदोष व्रत की पूजा का समय शाम 4.30 से शाम 7.00 बजे के बीच उत्तम रहता है, अत: इस समय पूजा की जानी चाहिए। नैवेद्य में जौ का सत्तू, घी एवं शकर का भोग लगाएं, तत्पश्चात आठों दिशाओं में 8‍ दीपक रखकर प्रत्येक की स्थापना कर उन्हें 8 बार नमस्कार करें। इसके बाद नंदीश्वर (बछड़े) को जल एवं दूर्वा खिलाकर स्पर्श करें। शिव-पार्वती एवं नंदकेश्वर की प्रार्थना करें।
 
कैसे करें व्रत : इस दिन प्रदोष व्रतार्थी को नमकरहित भोजन करना चाहिए। यद्यपि प्रदोष व्रत प्रत्येक त्रयोदशी को किया जाता है, परंतु विशेष कामना के लिए वार संयोगयुक्त प्रदोष का भी बड़ा महत्व है। अत: जो लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर हमेशा परेशान रहते हैं, किसी न किसी बीमारी से ग्रसित होते रहते हैं, उन्हें रवि प्रदोष व्रत अवश्य करना चाहिए।
 
रवि प्रदोष व्रत के मंत्र- मंत्र- 'ॐ नम: शिवाय' अथवा शिव का विशेष मंत्र - 'शिवाय नम:' का कम से कम 108 बार जप करें।
 
रवि प्रदोष व्रत पूजन का मुहूर्त
 
त्रयोदशी तिथि का आरंभ 10 जनवरी, रविवार को शाम 04.52 मिनट शुरू होगी तथा 11 जनवरी, सोमवार को दोपहर 02.32 मिनट पर त्रयोदशी तिथि समाप्त, तत्पश्चात व्रत का पारणा करें।
 
इस व्रत से मनुष्य की स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां दूर होती हैं तथा मनुष्य निरोगी हो जाता है। यह व्रत करने वाले समस्त पापों से मुक्त भी होते है। ज्योतिष अनुसार व्रत को करने से जीवन की अनेक समस्याएं दूर की जा सकती हैं।
 
- आर.के.

ALSO READ: प्रदोष व्रत कथा एवं प्रदोष व्रत में क्या खाएं और क्या नहीं, जानिए 

ALSO READ: Ravi Pradosh Katha 2021: साल का पहला प्रदोष व्रत 10 जनवरी को, पढ़ें पौराणिक कथा

सम्बंधित जानकारी

Show comments

ज़रूर पढ़ें

मंगल गोचर अलर्ट: 2 साल बाद मेष राशि में एंट्री से बदल सकती है दुनिया की दशा और दिशा

सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में, 3 राशियों के लिए गोल्डन टाइम

क्या आपकी कुंडली में है गंडमूल दोष? तुरंत करें ये 5 असरदार उपाय

बुध का मेष राशि में गोचर: इन 3 राशियों के लिए बढ़ सकती हैं मुश्किलें, रहें सतर्क

बुद्ध पूर्णिमा का पर्व कब मनाया जाएगा, क्या है इसका महत्व?

सभी देखें

नवीनतम

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (02 मई, 2026)

02 May Birthday: आपको 2 मई, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 2 मई 2026: शनिवार का पंचांग और शुभ समय

ग्रहों का नक्षत्र गोचर काल क्या है? जानिए इसकी अवधि और प्रभाव

11 मई 2026 का महागोचर: 4 राशियों की चमकेगी किस्मत, पीछे मुड़कर देखने की नहीं पड़ेगी जरूरत

अगला लेख