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Ravi Pradosh Vrat 2026: रवि प्रदोष व्रत कब है, क्यों मनाया जाता है? जानें विधि और मुहूर्त

WD Feature Desk
शनिवार, 28 फ़रवरी 2026 (12:14 IST)
Importance of Ravi Pradosh Vrat: रवि प्रदोष व्रत हर महीने के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है, जो रविवार के दिन पड़ती है। यह विशेष दिन भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित होता है। रवि प्रदोष व्रत की तिथि हर महीने बदलती रहती है, लेकिन यह व्रत हमेशा रविवार को त्रयोदशी तिथि पर ही होता है।

रवि प्रदोष व्रत खासतौर पर उन लोगों के लिए लाभकारी माना जाता है, जो जीवन में किसी खास समस्या से जूझ रहे होते हैं या जो अपने जीवन में अधिक समृद्धि और सफलता चाहते हैं। इस बार 1 मार्च 2026, रविवार को फाल्गुन मास, शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रवि प्रदोष व्रत पड़ रहा है।ALSO READ: Holi puja remedies 2026: होलिका दहन के दिन करें मात्र 5 उपाय, संपूर्ण वर्ष रहेगा शुभ
 

क्यों मनाया जाता है?

रवि प्रदोष व्रत का महत्व विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा और अर्चना से जुड़ा हुआ है। इसे मनाने के पीछे निम्नलिखित कारण होते हैं:
 
1. भगवान शिव का आशीर्वाद: इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन की सारी परेशानियां दूर होती हैं और सुख-शांति मिलती है। भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने से व्यक्ति के सभी पाप समाप्त होते हैं और वह धन, यश, समृद्धि, और खुशहाली प्राप्त करता है।
 
2. रविवार का महत्व: रविवार सूर्य देवता का दिन होता है, और सूर्य को जीवनदाता माना जाता है। इस दिन शिव पूजा करने से व्यक्ति की सभी तरह की मानसिक और शारीरिक समस्याएँ दूर होती हैं। यह दिन विशेष रूप से ग्रहों के शुभ प्रभाव के लिए भी माना जाता है।
 
3. पापों से मुक्ति: रवि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की विशेष पूजा से पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में शांति एवं समृद्धि का वास होता है।
 

मार्च 2026 में रवि प्रदोष व्रत की तिथि और मुहूर्त:

तारीख: 1 मार्च 2026, रविवार
त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 28 फरवरी 2026 को रात 08:43 बजे से
त्रयोदशी तिथि समाप्त: 1 मार्च 2026 को शाम 07:09 बजे तक।
 
प्रदोष काल (पूजा का समय): शाम 06:21 बजे से 07:09 बजे तक। 
त्रयोदशी तिथि पर पूजा की कुल अवधि: लगभग 48 मिनट का समय। 
 

व्रत-पूजा की विधि:

 
1. व्रत रखने वाला व्यक्ति सूर्योदय से पूर्व उबटन (स्नान) करके पवित्र होता है।
 
2. फिर दिनभर उपवासी रहते हुए, संतान, सुख-समृद्धि और भगवान शिव के आशीर्वाद के लिए पूजा करते हैं।
 
3. सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल में यानी संजा के समय भगवान शिवजी की पूजा करनी होती है।
 
4. शिवलिंग पर जल, दूध, शहद, बेल पत्र, फल और फूल अर्पित कर विशेष रूप से 'ॐ नमः शिवाय' का जप करना बहु‍त लाभकारी होता हैं।
 
5. प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें।
 
6. पूरे दिन व्रत रखें और सात्विक रहें।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: रवि प्रदोष व्रत रखने के हैं 3 फायदे, जानिए महत्व
 

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