Biodata Maker

नौ ग्रहों के अलावा भी हैं 3 खास ग्रह, जानिए यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो के बारे में

Webdunia
शनिवार, 1 जुलाई 2023 (16:23 IST)
Astrology And Planet: आकाश मंडल में कई ग्रह, उपग्रह और नक्षत्र विचरण कर रहे हैं परंतु भारतीय ज्योतिष ने 28 नक्षत्र और 9 ग्रहों का ही धरती सबसे ज्यादा प्रभाव माना है। नौ ग्रहों में सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र और शनि के अलावा छाया ग्रह राहु और केतु को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाला माना है परंतु आकाशमंडल में यूरेनस, नेपच्यून तथा प्लूटो ग्रह भी मौजूद है। आओ जानते हैं इनके बारे में।
 
महाभारत में यूरेनस को श्वेत, नेपच्यून को श्याम और प्लूटो को तीक्ष्ण या तीव्र के नाम से संबोधित किया गया है। भारत में यूरेनस को अरुण, नेपच्चून को वरुण और प्लूटो को यम कहते हैं। हिन्दू पौराणिक कथाओं में ग्रह के बारे में कहा गया है- 'सम भवते सम ग्रह।' इसका मतलब है जो प्रभावित करता है उसे ग्रह कहा जाता है। ये ग्रह और इनकी स्थिति ही व्यक्तियों को उनके कर्मों या कार्यों का फल देती है। 'बृहत पराशर होरा शास्त्र' (अध्याय 2, पद्य 3-4) के अनुसार भगवान विष्णु के कुछ अवतार धीरे-धीरे ग्रहों के रूप में विकसित हो गए।  
 
यूरेनस : यूरेनस जिसे हिन्दी में अरुण कहा जाता है, हमारे सौरमंडल का 7वां ग्रह है। सूर्य से औसतन 2 अरब 90 करोड़ किलोमीटर दूर रहकर 84 वर्षों में उसकी एक परिक्रमा पूरी करने वाला यह ग्रह शनि जैसा ही न केवल एक बर्फीला दैत्य है, शनि की ही तरह वह भी कई वलयों (छल्लों/ रिंगों) से घिरा हुआ है। यूरेनस ग्रह महीन धूल के 2 छल्लों से घिरा दिखता है। यूरेनस सौरमंडल का एक अनोखा ग्रह है। वह अपनी परिक्रमा कक्षा के तल से लगभग 90 अंश के कोण पर रहकर सूर्य की परिक्रमा करता है। यह ग्रह एक राशि में 7 वर्षोंतक वास करता है। इसे ही हर्षल भी कहते हैं।
नेपच्यून : सौरमंडल का आठवां और अंतिम ग्रह नेपच्यून ग्रह सूर्य की एक परिक्रमा 164.80 वर्ष में पूरी करता है। किंतु खोज की दृष्टि से 23 सितंबर 2011 को इसका एक कैलेंडर वर्ष पूरा हो गया। रोमन और यूनानी आख्यानों में नेपच्यून को समुद्र (जल) का देवता माना गया। भारत में भी इसे जल का देवता 'वरुण' माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार नेपच्यून जलीय राशि मीन का स्वामी है। पाश्चात्य ज्योतिष के अनुसार नेपच्यून एक शांत और बृहस्पति तथा चंद्रमा की तरह मंगलकारी ग्रह है। यह एक सामर्थ्यवान ग्रह है, जो 133/4 वर्ष अधिक दूर है।
 
प्लूटो : प्लूटो को ग्रहों की श्रेणी से अपदस्थ करने के बाद अब यह सौरमंडल का अंतिम ग्रह है। इसका व्यास 49,000 किलोमीटर है, जो पृथ्वी के व्यास से 3.5 गुना अधिक है। यह अपनी धूरी पर 29 डिग्री झुका हुआ 16 घंटे 11 मिनट में एक बार घूम जाता है। अपनी कक्षा में 5.48 किलोमीटर प्रति सेकंड की गति से 164.80 वर्ष में सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करता है। वह एक राशि में लगभग 25 से 33 वर्षों तक रहता है
 
आकार में यह सौरमंडल का चौथा बड़ा गैसीय ग्रह है जिनके कारण यह नीले रंग का दिखाई देता है। इसके आठ उपग्रह और आसपास हल्के वलय पाए जाते हैं। इसका तापमान शून्य से नीचे 197 डिग्री से. है। इस ग्रह पर 200 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हरिकेन आंधियां चलती हैं। इस पर काला बैंगनी और सफेद धब्बा भी देखा गया, जो एक रहस्य बना हुआ है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments

ज़रूर पढ़ें

'आकाशीय रिकॉर्ड' विद्या क्या है, जानिए कैसे करती है ये आपकी समस्याओं का समाधान?

Lohri Festival: लोहड़ी का पर्व कब है?

Year Ender 2025: वर्ष 2025 की 12 प्रमुख धार्मिक घटनाएं

Paus Amavasya 2025 पौष मास की अमावस्या का महत्व और व्रत के 5 फायदे

Guru Mmithun Gochar 2025: गुरु का मिथुन राशि में गोचर, 3 राशियों को रहना होगा संभलकर

सभी देखें

नवीनतम

अलविदा 2025: इस वर्ष 5 बड़े धार्मिक समारोह ने किया देश और दुनिया का ध्यान आकर्षित

Guru gochar 202: बृहस्पति का कर्क राशि में गोचर, विपरीत राजयोग से 4 राशियों को वर्ष 2026 में मिलेगा सबकुछ

Dhanur Sankranti 2025: धनु संक्रांति पर तर्पण: पितृ ऋण से मुक्ति पाने का एक महत्वपूर्ण अवसर

Surup Dwadashi 2025: पौष मास में सुरूप द्वादशी के दिन क्यों रखते हैं व्रत, क्या है इसका महत्व

Saphala Ekadashi 2025 Date: सफला एकादशी व्रत कैसे रखें और कब होगा इसका पारण?

अगला लेख