अंजू निगम

स्वतंत्र लेखिका
क्या सत्ता में महिलाओं की सहभागिता की वही स्थिति हैं जो बीस साल पहले हुआ करती थी? इस प्रश्न पर अक्सर आंकड़ों के आकलन होने...
कृति ने खाने का डिब्बा खोला ही था कि मोबॉइल घनघना उठा। स्क्रीन में जो नाम चमका उसे देख कृति का मन कसैला हो उठा। मन किया...
बात उन दिनों की हैं जब मेरे पतिदेव की पोस्टिंग देहरादून में थी। अक्सर होता कि करवा चौथ वाले दिन आसमान बादलों से ढंका...
पति की पोस्टिंग देहरादून हो गई थी दूसरी बार। देहरादून की वादियां तो सम्मोहित कर ही रही थीं। रह-रहकर गंगा की लहरें भी...
बिटिया, दामादजी कार लाए हैं क्या? पापा की आंखों में मुझे देख आशा के जो दीये जल उठते थे, उसे देख मुझे खौफ होता था।
सुनयना और देवांश बचपन के साथी थे। हर बात के साथी। खेलना-खाना, रूठना-मनाना, मान-मनुहार सबका साथ। बचपन का खिलंदड़ापन कब...
पुराने जमाने मे मिजो जनजातियां भोजन के लिए मक्का, ज्वार-बाजरा, फल-फूल, साग-सब्जियों एवं विभिन्न पशु-पक्षियों के मांस...
दीपा क्लास के दरवाजे पर इस तरह खडी हो गई कि अवनि क्लास के अंदर नहीं आ पाए, जानबूझकर दीपा ऐसे काम करती जिससे अवनि को हैरान...
आज वैभव का पत्र आया था। भाई के पत्र का कितने दिनों का इंतजार आज खत्म हुआ। पर आज जब पत्र उसके हाथ में है, अंजली उसे खोलते...
बात उन दिनों की है जब मेरे पापा, ऑडिनेंस फैक्ट्री, कानपुर में कार्यरत थे। फैक्ट्री के ही कैंपस में हमें बड़ा-सा घर मिल...
सब कहते हैं - तुम बदल गई हो, मैं तो वही हूं दबी, सहमी, सकुचाई सी
गोपी अपने मां-बापू और चार बहनों के साथ गांव के एक छोटे से झोपड़े में रहता था। झोपड़ी की छत धान के सूखे पुए से बनी थी, जो...
मेरे ख्याल से साहस का कोई काम केवल शारीरिक क्षमता से ही ताल्लुक नहीं रखता, बल्कि मानसिक शक्ति से किसी को उज्जवल भविष्य...
क्या कभी आपके साथ ऐसा हुआ कि झमझम बरसते मौसम में आप 20-25 किलोमीटर तय कर अपने घर आए हो और पता चले कि घर की चाबी तो वहीं रह गई...
हम लोग लखनऊ से देहरादून वापस जा रहे थे। परिस्थिति कुछ ऐसी बनी कि मेरे और पतिदेव के कोच अलग-अलग हो गए। पति का कोच आगे और...
छोटा सा तो दिल है मेरा, उस पर भी तुम आ बसे, ओवर लोडिंग हो गई जनाब, या तुम बसो या हम
माघ महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी से ऋतुओं के राजा वसंत का आंरभ हो जाता है अत: इसे ऋतुराज वसंत के आगमन का प्रथम दिन माना...
आज परीक्षा का पहला दिन था। नीला ने पूरी तैयारी कर ली थी। वो होनहार छात्रा थी, उसमें व अव्या में होड़ लगी रहती कक्षा में...
वो कहते हैं न कि किस्मत से ज्यादा और वक्त से पहले कुछ नहीं मिलता। जब जिस बात का होना बदा हैं वो तभी होती हैं फिर आप चाहे...