कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल

किन्तु हम भारतीयों का नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा तिथि को ही आता है इसे हम उल्लास एवं आनंदित होकर अपनी संस्कृति की...
उनके दर्शन में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद और भारतीय दर्शन की विशुद्ध परम्परा और भारतीय जन की अनुभूति परिलक्षित होती है।
बड़े-बड़े सियासी पण्डित बनें या ज्योतिषी बनकर राजनीति का हाथ देखें किन्तु राजनीति कब कौन सी करवट ले किसी को भी पता नहीं...
ऐसा लगता है कि प्रशासनिक ढांचे के अधिकारियों को बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था से कोई मतलब ही नहीं रह गया है।
आईबी के अंकित शर्मा की संगठित तरीके से हत्या कर दी जाती है और नाले पर लाश को फेंक दिया जाता है।
भाजपा जिस तरह से साल 2018 से विधानसभा चुनावों में हार का सामना करते हुए राज्यों से सिमटती चली जा रही है, वह भाजपा के लिए...
शिक्षा क्षेत्र के सरकारी बजट की ओर जब ध्यान देते हैं तो केन्द्र के द्वारा देश की जीडीपी का 2.7 फीसदी ही शिक्षा क्षेत्र...
उसी संविधान की प्रतियां हाथों में उठाकर और तिरंगे ध्वज को लहराते हुए संविधान बचाने की दुहाई देती भीड़ जो स्वयं ही संविधान...
अखण्डता शब्द का औचित्य बनता है ,किन्तु ‘पंथनिरपेक्ष’ और ‘समाजवादी’ शब्द क्यों और किस विवशता में जोड़े गए?