कृष्णमुरारी त्रिपाठी अटल

भारत राष्ट्र की एकता-अखण्डता-संस्कृति को खण्डित करने के लिए तरह-तरह के षड्यंत्रों के जाल बिछाए जा रहे हैं
यह जान लीजिए कि एक व्यक्ति की लापरवाही भी हजारों लोगों के जीवन पर संकट ला सकती है।
उन सभी की पीठ एवं कमर तोड़ने से कतराएंगे नहीं जो भारत की ओर कुदृष्टि डालने का दुस्साहस कर रहे हैं।
मेरा देश अखण्ड रहे एकता आपसी भाईचारे व सद्भाव की भावना से इस राष्ट्र को पुनः विश्वगुरु बनाने के लिए हम एक स्वर में कृतसंकल्पित...
अगर उनकी षड्यंत्रों के साये में मृत्यु न होती तो सम्भवतः राष्ट्रीय मुद्दों की दशा एवं दिशा बहुत पहले कुछ और होती लेकिन...
गलवान घाटी के संघर्ष में हमारे बीसों वीर जवान चीनी सेना से झड़प में आहुति बन गए लेकिन उन्होंने अपने अदम्य साहस के साथ...
बीमारी किसी की जात-पात या आर्थिक स्थिति देखकर नहीं आती और जब गंभीर बीमारी हो और खून की कमी से व्यक्ति जीवन और मृत्यु...
ऐसा निर्णय लेना व्यक्ति की हताशा, निराशा, मजबूरी की चरम सीमा के ऊपर की दयनीय परिस्थिति होती है।
चीजे सदैव हमारे अनुकूल रहें इस बात की हमेशा गारंटी नहीं दी जा सकती है। जीवन तो वैसे भी वक्त के थपेड़ों और अनेकानेक झंझावातों...
पर्यावरण संरक्षण महज ड्राफ्टिंग, गोष्ठियों और पैकेजों के रुप में आर्थिक गबन का पर्याय बनते जा रहा है।
फिल्मी हीरो और हीरोइन हो तो उनके छींकने तक और सांस लेने की खबरें आ जाएंगी और सरकार के मंत्री से लेकर सारे नुमाइंदे जल्दी...
जिसने अपने पौरुष, साहस, धैर्य एवं अपने धर्म की रक्षा एवं संरक्षण हेतु कभी भी किसी से समझौता नहीं किया
मैं भी वर्षों से लोकतंत्र को किताबों के अक्षरों और भाषणों के अलावा और कहीं भी देख और सुन नहीं पाया
यह सब संभव हो सका तो पश्चिमी जगत के भारतीय संस्कृति की ओर जीवन की सरसता की आशापूर्ण निगाहों से ऐसे कई उदाहरण हमारे यहां...
अब उस उद्देश्य की सरकारें अपने-अपने हथकंडों से शवयात्रा निकालने पर अमादा हो चुकी हैं।
कोरोना की त्रासदी ने जिस तरह से जनजीवन को प्रभावित किया है, उसके बाद जीवन को पटरी पर बनाए रखने के मुद्दे ज्वलंत हो चुके...
लेखक होने की बहुत बड़ी कीमत चुकानी होती है, घर में अपनी कलम के लिए सबकुछ चुपचाप सुनना और सहना पड़ता है।
महाराष्ट्र के पालघर में संतों की हत्या ही नहीं हुई बल्कि सनातन की रीढ़ पर चोट की गई है
मदद हो पाए या न हो पाए, समस्याओं का हल हो या नहीं हो याकि उसी में कोई नया मुद्दा ढूंढ़े मिले लेकिन छपास रोगियों को छपने...
निजामुद्दीन की मरकज से देश के विभिन्न शहरों में फैलकर जमातियों ने देश को कोरोना का हब बना दिया।
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