रेखा भाटिया

कितने परिवर्तनों की बात करें, कितने जुल्म सहे हैं यह गिनें कुछ परिवर्तन आया भी तो, क्या जुल्म होने बंद हो गए !
चलो गांव लौट चलें फिर से बुलाएं बारिशों को, गड़गड़ाते बादलों संग झूमे हल्ला-गुल्ला खूब शोर मचाएं!
एक सदी के बीत जाने पर, इम्तिहान लेती कुदरत महामारी के भेष में मिला हाथों की लकीरें सभी इंसानों की, दुनिया के लिए खड़ी...
मां तन्हा यहां मैं कितनी, उड़कर आने को मन करता, तेरी गोद में सिर रखकर, सुकून पाने को मन करता !
नील गगन की छांव में भोर होते ही सूरज निकलते ही मेघों-सा वेग भर वह चल पड़ते हैं
भीतर मेरे कई मुखौटे, कई पहरे परछाइयां,कई तहों में छिपे सिमटे, बंद आंखों में भीतर गुपचुप!
ना तुम जल्दी ऑफ़िस जाना, ना तुम देर से घर आना, घर से ही काम कर काम चलाना !
फूलों को थामते-थमाते, कब वह दिल में उतर आए, कुछ प्यारा-सा अहसास उन्हें हुआ, अब होने लगा हमें भी वही अहसास!
सब कुछ बदल रहा, इंसान बदल रहे, मुस्कराहटें बदल रही, प्रकृति करवट बदल रही!
अभी फ़ोन रखा गया। दिल में अब भी कई बातें हैं। कई बातें सिर्फ कहने की होती हैं, दिलों पर उनका वजूद कुछ भी नहीं होता। अच्छा,...
मुझे ऐसा लगे हर सुबह का सूरज आप हैं, अथाह समुंदर कोई और नहीं आप ही हैं पापा, पृथ्वी के माथे लगा चंद्र भी आप हैं,
जब रोना है, मैं रो लेती हूं। हंसना है, वह भी कर लेती हूं। खाना-पीना भी ले लेती हूं। अपना जीवन भी जी लेती हूं। खुशियां भी...
यह कैसी बसंत ऋतु दिल पर छाई, जब कोमल विचारों की बयार बहती आई। सपनों की पंखुड़ियों पर दस्तक दी निंदिया ने, नीले आकाश तले...
घास की सख्ती जाती सिमटती आई नमी अब वातावरण में नन्ही ओंस की बूंदें धूप में चांदनी-सी चमके-दमके।
मैंने मंदिर देखा, मस्जिद देखी, चर्च देखा और देखा गुरुद्वारा, मैंने मेरे प्रभु से पूछा, समझा दो क्या है सारा माजरा। तू...
कुछ ही लोगों से सभी का नाता होता है नाता आदर्शों का, प्रेरणा का, सेवाभाव का, देशप्रेम के जज्बे का एक सार्वजनिक नाता, उन...
जिंदगी की रफ़्तार को कुछ आगे बढ़ाओ, खेलो खतरों से नया कुछ कर दिखाओ। जो बीत गया वह था ही बीतने के लिए, उसे भूल सारा गुबार...
क्या कभी मैंने तुमसे कहा कितनी तन्हा हूं मैं माला जपी राम मिला फिर भी तन्हा हूं मैं।
मैं प्रवासी भारतीय जरूर हूं लेकिन 4 जुलाई को हाथ में अमेरिकी झंडा और 15 अगस्त को हाथ में भारतीय तिरंगा जरूर लहराता है।...
कुछ तो खास उल्लास था उस दिन में, त्योहार का दिन, रस्मों को निभाने का दिन। आडंबर पीछे छोड़ हुआ नई रस्म का उद्घोष, बदलकर...
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