Dharma Sangrah

डाटा सुरक्षा की चुनौती से जूझता भारत

Webdunia
शुक्रवार, 12 जनवरी 2018 (12:23 IST)
आधार से जुड़ी सूचनाओं के लीक होने की ख़बरों के बीच भारत में डाटा सुरक्षा को लेकर नई बहस खड़ी हो गई है। आधार की संवैधानिकता पर सवाल और निजता के अधिकार के हनन की आशंकाओं के बीच, डिजीटल पारदर्शिता की मांग भी उठने लगी है।
 
यूनीक आईडेंटिफिकेशन अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया, यूआईडीएआई का दावा है कि आधार डाटा में सेंधमारी संभव नहीं है और ये उच्चतम स्तर की सुरक्षा प्रणाली से लैस है। उसका ये भी कहना है कि आधार नंबर हासिल हो जाने का अर्थ ये नहीं है कि नागरिक की व्यक्तिगत सूचना भी लीक हो जाएगी, बल्कि इस सूचना का अहम बिंदु बायोमेट्रिक्स से जुड़ा है और उस तक पहुंचना, किसी व्यक्ति या एजेंसी या कंपनी के लिए आसान नहीं।

प्राधिकरण के दावे के समांतर ये भी सच है कि डाटा में सेंध के मामले सामने आए हैं और हाल में ट्रिब्यून अखबार की एक रिपोर्ट ने उन आशंकाओं को एक तरह से बल ही दिया है जो डाटा सुरक्षा और नागरिक अधिकार के हनन से जुड़ी हैं। 
 
आधार को एक एक कर तमाम सार्वजनिक सेवाओं से जोड़ा जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट में लंबित फैसले के समांतर मोबाइल फ़ोन और बैंकिंग सेवाओं को आधार से जोड़ने के लिए डेडलाइन निर्धारित कर दी गई है। आज नया बैंक खाता बिना आधार के नहीं खोला जा सकता है। रेल, हवाई और बस सेवाओं में भी आधार की अनिवार्यता की बात की जा रही है।
 
आलोचकों का कहना है कि फाइलों और हस्ताक्षरों की भूलभुलैया में फंसे नागरिकों को शासन और उसकी अफसरशाही, क्या आधार कार्ड के जरिए एक नयी भूलभुलैया में धकेलना चाहती है या ये उन्हें नियंत्रित करने और उनकी निगरानी करते रहने की सत्ता संस्कृति है जिसका संबंध अपने राजनीतिक फायदों के अलावा बहुराष्ट्रीय वाणिज्य और मुनाफे से भी है।
 
इसमें संदेह नहीं कि भारत में डाटा सुरक्षा कानून एक मजबूत विधायी ढांचे की अनुपस्थिति में कई समस्याओं से ग्रस्त है। अब जबकि पूरी दुनिया डिजीटल हो चुकी है, ऐसे में डिजीटल सूचनाओं की संप्रभुता को लेकर भी आशंकाएं हैं। साइबर और डिजीटल अपराध आज भूमंडलीय स्तर पर सक्रिय हैं और कोई ऐसी सुरक्षा दीवार या भौगोलिक सीमा नहीं है जो किसी देश को ऐसे अपराधों से बचाए रख सके।
 
आधार भी इसी डिजीटल दुनिया का एक हिस्सा है। ध्यान रहे कि पूरी दुनिया में प्रोसेस हो रहे आउटसोर्स डाटा का सबसे बड़ा होस्ट भारत है, ऐसे में साइबर अपराधों से बचाव अपरिहार्य है। ऐसी आशंकाओं का जवाब किसी राजनीतिक या कानूनी पलटवार या कार्रवाई से नहीं दिया जाना चाहिए बल्कि इन्हें सुलझाने के प्रामाणिक, विश्वसनीय और संवैधानिक उपाय करने चाहिए। सबसे बड़ी बात है अपने नागरिकों में भरोसा पैदा करना।

अनिवार्यता के जोर पर नागरिकों को एक लाइन में हांकने से पहले सोचना चाहिए कि भारत एक संप्रभु लोकतांत्रिक देश है ना कि कोई सर्वसत्तावादी हुकूमत। अनिवार्यता एक निरंकुशता में न तब्दील हो जाए, ये सुनिश्चित करने का काम न सिर्फ कार्यपालिका और विधायिका का है बल्कि न्यायपालिका को भी इस बारे में सचेत रहना होगा।
 
भारत में आज 46 करोड़ से ज़्यादा इंटरनेट यूजर्स हैं। और वे किसी न किसी रूप में डिजीटल सेवाओं से जुड़े हैं। इंटरनेट पर उनका डाटा किसी न किसी रूप में मौजूद हैं। ये सुनिश्चित करने वाला कोई नहीं है कि वो डाटा किस हद तक सुरक्षित है। निश्चित कानून के अभाव ने स्थिति को और पेचीदा बना दिया है। फेसबुक, गूगल और वॉट्सएप जैसी सेवाएं अपने उपभोक्ताओं को ये भरोसा दिलाती हैं और सेवा लेने की स्वीकृति भी कुछ निर्देशों पर सहमति के बाद देती हैं, फिर भी स्पैम सूचनाओं के मलबे का पहाड़, डिजीटल दुनिया में फैल चुका है।
 
कोई भी सूचना तब तक किसी यूजर की अपनी व्यक्तिगत सूचना है जब तक कि वो अपनी इच्छा से उसे अन्य लोगों के साथ शेयर नहीं करता है चाहे वे निजी कंपनियां हो या सरकार का थर्ड पार्टी। एक पहलू ये भी है कि किसी यूजर पर कोई सूचना न तो थोपी जा सकती है न ही उसे कुछ सेवा प्रदान करने की शर्तों के तहत रजामंदी में बांधा जा सकता है। क्या यही रजामंदी यूजर के लिए एक वलनरेबल स्थिति नहीं बनाती? मोबाइल इंटरनेट के विस्तार के बीच एक ठोस कानून की उतनी ही अनिवार्यता है जितना कि आधार की अनिवार्यता को लेकर सरकार की दलीलें।
 
नागरिकों के मौलिक अधिकारों की हिफाजत करना सरकार का संवैधानिक दायित्व है। अधिकारों को कानूनी पेचीदगियों में उलझाकर हम अविश्वास का ही माहौल सघन करेंगे। किसी नागरिक की आधार सूचना हो या कोई अन्य किस्म की डिजीटल सूचना- उन पर सेंध लगाने की जुर्रत अंततः नागरिक गरिमा ही नहीं, राष्ट्रीय संप्रभुता को भी ठेस पहुंचाएगी। भूमंडलीय डिजीटलीकरण और मुनाफे और निवेश का खुला बाजार, दुनिया को बेशक एक ‘ग्लोबल गांव' कहकर इतराता हो लेकिन निरंतर उपभोग की लपलपाहट से बाहर भी एक जीवंत भूगोल है- जहां नागरिक रहते हैं और वे डिजीटलीकृत नहीं हुए हैं।
 
रिपोर्ट शिवप्रसाद जोशी

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

कौन हैं तेजस्वी घोसालकर, मुंबई की संभावित मेयर जिन्होंने 2024 में पति अभिषेक की हत्या की त्रासदी झेली

Karnataka : क्या लक्कुंडी गांव में मिलेगा सोने का भंडार? 400 साल पुराने खजाने के रहस्य ने उड़ाए होश, खुदाई के लिए पहुंचा JCB और ट्रैक्टरों का काफिला

Lashkar E Taiba के कमांडर का कबूलनामा, हम वहां बैठ भी नहीं सकते, Pakistan को दर्द दे रहे Operation Sindoor से मिले घाव

bmc election results : महाराष्ट्र के BMC चुनाव में राज ठाकरे की हार, क्या उद्धव आगे देंगे भाई का साथ

महाराष्ट्र की सियासत में ठाकरे ब्रांड का सूर्यास्त!, निकाय चुनाव में 40 साल बाद ढहा BMC का किला, उद्धव-राज ठाकरे की जोड़ी बेअसर

सभी देखें

मोबाइल मेनिया

iPhone पर मिल रही बंपर छूट, कम कीमत के साथ भारी डिस्काउंट

Redmi Note 15 5G : सस्ता 5जी स्मार्टफोन, धांसू फीचर्स, कीमत में डिस्काउंट के साथ मिल रही है छूट

Year End Sale : Motorola G05 पर बड़ी छूट, 7,299 में दमदार फीचर्स वाला स्मार्टफोन

iPhone 18 Pro में दिखेंगे बड़े बदलाव, नया डिजाइन, दमदार A20 Pro चिप, कैमरा और बैटरी में अपग्रेड

जनवरी 2026 में स्मार्टफोन लॉन्च की भरमार, भारतीय बाजार में आएंगे कई दमदार 5G फोन

अगला लेख