Biodata Maker

नीतीश नो फैक्टर और कन्हैया से मेरी कोई तुलना नहीं: तेजस्वी

Webdunia
शुक्रवार, 12 अप्रैल 2019 (11:54 IST)
- नीरज सहाय (पटना से)
 
बिहार में राजद, कांग्रेस, रालोसपा, हम और वीआईपी का महागठबंधन लोकसभा के 40 सीटों पर भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए को सीधी टक्कर दे रहा है। दोनों तरफ़ के उम्मीदवारों की भी घोषणा हो चुकी है। लेकिन गठबंधन राजनीति के दबाव और व्यक्तित्वों के टकराव की वजह से कई क्षेत्र में मुक़ाबला सीधा नहीं है।
 
 
सीपीआई-सीपीएम जैसे बड़े वाम दलों का महागठबंधन से बाहर रह जाना विपक्ष के लिए कुछ सीटों पर भारी पड़ सकता है। बेगूसराय में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह, राजद के तनवीर हसन और सीपीआई के कन्हैया कुमार की उम्मीदवारी से न केवल संघर्ष त्रिकोणीय हुआ है बल्कि यह देश की हॉट सीट्स में शुमार हो गया है।
 
 
ताज़ा परिदृश्य में राजद के नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने बीबीसी से लंबी बातचीत की और अपने गठबंधन की जीत के लिए पूरी तरह आश्वस्त दिखे। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कोई फैक्टर मानने से इंकार किया। तेजस्वी को कन्हैया कुमार से अपनी तुलना भी पसंद नहीं है। प्रस्तुत है बातचीत के मुख्य अंश-
 
चर्चा है कि बेगूसराय से कन्हैया के जीतने से राजद नेतृत्व विशेषकर तेजस्वी की चमक राष्ट्रीय फलक पर मंद पड़ जाएगी। आपको क्या लगता है?
 
अभी कन्हैया कौन से पद पर हैं। वो जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष रहे हैं और तबसे वो इतने वोकल हो गए हैं। मतलब सांसद नहीं बनेंगे तो वो समाप्त हो जाएंगे क्या। ये बात समझने की ज़रूरत है। कुछ चर्चा हो इसलिए ऐसी बात विरोधी फैलाते हैं। आज तक बाल ठाकरे चुनाव लड़े थे क्या, मुख्यमंत्री रहे थे क्या, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति में उनका गहरा प्रभाव था। ऐसे कई नेता हुए हैं जो परदे के पीछे रहे और उनका ग़ज़ब का फॉलोविंग भी रहा है। पद मिल जाने से कोई नेता नहीं हो जाता। मुझे नहीं पता कि मेरी उनसे तुलना क्यों कर रहे हैं। किस बात की तुलना जबकि उनसे मेरी कोई समानता नहीं है। हमारे और उनके काम करने में बहुत अंतर है।
 
बेगूसराय से सीपीआई से कन्हैया कुमार उम्मीदवार हैं। बीते दिनों ऐसा लग रहा था कि राजद उन्हें समर्थन कर सकता है, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। क्यों?
 
कन्हैया के नाम की घोषणा महागठबंधन में सब कुछ तय हो जाने के बाद हुई थी। बेगूसराय सीट राजद की परंपरागत सीट रही है। यह सीट समाजवादियों का गढ़ रहा है। पिछले लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद तनवीर साहब को क़रीब पौने चार लाख वोट मिले थे। बहुत कम अंतर से वो चुनाव हारे थे। इसके अलावा बेगूसराय लोकसभा क्षेत्र के प्रमंडल स्तर के कार्यकर्ताओं का दबाव था कि तनवीर हसन साहब को ही पार्टी उम्मीदवार बनाए। वो पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। उनमें कोई कमी हमें नज़र नहीं आती।
 
कन्हैया के नामांकन और जनसभा में जो भीड़ जुटी थी उससे तो यही लगता है कि कन्हैया भी कमज़ोर स्थिति में नहीं हैं?
 
हमारा मक़सद भाजपा को हराना है और हमलोग हराएंगे। हम सक्षम हैं। तनवीर हसन साहब वहां से चुनाव जीतने जा रहे हैं। हम सभा कर के आये थे। लोग एक पाँव पर खड़े हैं पार्टी को जिताने और लालू जी को न्याय दिलाने के लिए। जब सामाजिक न्याय, संविधान और भाईचारे पर ख़तरा होगा तो उस स्थिति में वहां की जनता जानती है कि सामाजिक न्याय की असली लड़ाई राजद ही लड़ती है।
चुनाव में महागठबंधन की लड़ाई नीतीश कुमार से है या नरेंद्र मोदी से?
 
आज नीतीश जी कोई फ़ैक्टर नहीं हैं। वे जहाँ हैं वहां की नाव भी डुबो देंगे। हमलोगों को इस बार भाजपा को जवाब देना है। एक भी वादा पूरा नहीं किया गया। इनको जनता अच्छी तरह से जवाब देगी।
 
अगर विपक्ष चुनाव में जीतता है तो पीएम कौन होग?
 
हमलोग तो कहीं रेस में हैं नहीं और न ही पलटू चाचा हैं। एक बात स्पष्ट है कि यह चुनाव किसी एक व्यक्ति को प्रधानमंत्री बनाने का चुनाव नहीं है। देश को बचाने का चुनाव है। राहुल गांधी हमें बतौर पीएम स्वीकार्य हैं।
 
अदालत से ज़मानत की अर्ज़ीनामंज़ूर होने की वजह से 1977 के बाद पहली बार लालू प्रसाद की अनुपस्थिति में चुनाव हो रहा है। पार्टी और परिवार उनकी अनुपस्थिति कितना मिस कर रहा है?
 
यह सच है कि पिताजी हम लोगों से दूर हैं, लेकिन मैंने कई बार कहा है कि लालू प्रसाद सिर्फ़ एक नाम नहीं बल्कि विचारधारा हैं। उस विचार को मानने वाले लाखों- करोड़ों लोग हैं। लालू जी को वैसे सारे लोग जो सामाजिक न्याय और धर्म-निरपेक्षता में आस्था रखते हैं वो सब उन्हें चुनाव में मिस कर रहे हैं। यह बहुत महत्वपूर्ण चुनाव था। वो लोग जानते थे कि अगर लालू जी बाहर रहे तो उनका एजेंडा कामयाब नहीं हो पाएगा। संविधान और आरक्षण में छेड़छाड़ नहीं कर पाएंगे और न ही किसी दंगाई में हिम्मत होगा कि दंगा-फसाद करवा सके।
 
अदालत के फ़ैसले पर मैं कोई टिपण्णी नहीं कर सकता क्योंकि यह न्यायालय का विषय है, लेकिन मैं यह ज़रुर कहूँगा कि सबसे बड़ी अदालत जनता की होती है। लोगों ने मन बना रखा है लालू जी के साथ न्याय करने का। आने वाले दिनों में जो चुनाव का परिणाम आएगा उसमें आपको यह दिख जाएगा।
 
जिस तरह का व्यवहार उनके साथ किया जा रहा है उसको लेकर लोगों में नाराज़गी है। पिछले दिनों मुझे ही उनसे हॉस्पिटल में मिलने नहीं दिया गया। भाजपा सरकार का रवैया अमानवीय है। उन्हें उस ब्लॉक में रखा गया है जहाँ इलाज और जांच की व्यवस्था भी नहीं है। आप मुझसे उन्हें नहीं मिलने दो, लेकिन समुचित इलाज तो करो।
 
क्या परिवार में विरासत की लड़ाई छिड़ गई है?
 
यह कोई मुद्दा है नहीं है और यह किसी आम आदमी की ज़िंदगी की बेहतरी से भी जुड़ा नहीं है। घर की बात है, घर में ही रहनी चाहिए। चुनाव में नेता से लेकर कार्यकर्ताओं तक की भूमिका तय रहती है। मीसा भारती चुनाव लड़ रहीं हैं और तेजप्रताप चुनाव प्रचार करने के लिए स्वतंत्र हैं।
 
महागठबंधन में सीट बंटवारा कितना तार्किक है?
 
ये सवाल हमलोगों के ख़ेमे से क्यों। आज यह बात हम नहीं कह सकते हैं। यह सवाल एनडीए के नेताओं से पूछना चाहिए। जब वहां सीट शेयरिंग की बात हो रही थी तो बिना रामविलास पासवान और उपेंद्र कुशवाहा को विश्वास में लिए हुए नीतीश जी और अमित शाह ने ख़ुद ही बराबर- बराबर सीटों का बंटवारा कर लिया। उसके बाद कौन कहाँ से लड़ेगा इसकी घोषणा अगले दो- तीन दिनों में करने की ख़बर आई। इस बात को दो- ढाई महीने हो गए होंगे। उसी बीच में चिराग़ पासवान को नीतीश जी ने ज़रिया बनवाया और ट्वीट के माध्यम से प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री से जनता द्वारा नोटबंदी के फायदे आदि सवाल करवाये। मतभेद वहां था हमारे यहाँ नहीं। अब चिराग़ पासवान बताएं कि नोटबंदी के क्या- क्या फायदे हुए हैं।
 
राजद कभी भी बिहार में 25 से कम सीटों पर चुनाव नहीं लड़ी थी। इस बार 19 सीटों पर मैदान में हैं जबकि आरएलएसपी, हम और वीआईपी को पांच और तीन- तीन सीट दी गई। जबकि उनके पास तो कैंडिडेट भी नहीं थे?
 
हमारे यहाँ सीटों का बंटवारा पूरी तरह तार्किक है। तार्किक तो वहां नहीं लग रहा है जहाँ 22 सिटिंग सीट से 17 पर आ गए हैं। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू अकेले चुनाव लड़ी थी और तब उसकी लगभग 30 सीटों पर ज़मानत ज़ब्त हो गई। विधानसभावार इसकी गणना करें तो कह सकते हैं कि लगभग 135 विधानसभा सीटों पर जेडीयू की ज़मानत ज़ब्त हुई थी।
 
ऐसी परिस्थिति में जेडीयू को 17 लोकसभा सीट देना और अपनी पांच सिटिंग सीट छोड़ देने की बात है तो ग़ैर- तार्किक रूप से सीट बंटवारा एनडीए में हुआ है। रही बात राजद की तो राज्य में हम कभी भी इतने बड़े अलायन्स में नहीं रहे हैं। यहाँ 40 लोकसभा की सीट ही है। कम सीट पर लड़ने की एक वजह यह भी रही है। हमने अपने सभी घटक दलों को सम्मान दिया है।
 
माले को छोड़ बाक़ी वामपंथी दलों को आप लोगों ने पूरी तरह दरकिनार कर दिया है?
 
वामपंथी विचारधारा की तीन मुख्य पार्टियाँ राज्य में हैं। माले को आरा की सीट पर हमलोगों ने समर्थन दिया है। इतनी विपक्षी पार्टियाँ हैं। कितनों को हम साथ रखते और हम कितने सीटों पर चुनाव लड़ते।
 
कहा जा रहा है कि आरा सीट माले को देने के पीछे मक़सद मीसा भारती को पाटलिपुत्र लोकसभा सीट पर फायदा पहुँचाना है?
 
इसका बेहतर जवाब माले के लोग ही दे सकते हैं। हमनें कभी माले के लोगों को पाटलिपुत्र सीट छोड़ने को कहा ही नहीं। आरा सीट पर हमनें उन्हें समर्थन देने का फैसला किया है और पाटलिपुत्र सीट पर कैंडिडेट नहीं देने का फैसला उनका था। कोई थोपा हुआ फैसला नहीं था। हमलोग तो चाहते थे कि वो सभी सीटों पर हमलोगों का समर्थन करें।
 
आपने अभी कहा कि इतने सारे लोगों को गठबंधन में जगह नहीं दी जा सकती, लेकिन कोलकाता की रैली में जो विपक्षी एकता दिखी वह कई जगहों पर बिखरती नज़र आ रही है?
 
वहां बिहार की 40 लोकसभा सीट की बात नहीं हो रही थी। कोलकाता की रैली राष्ट्रीय स्तर की रैली थी। कुल 543 लोकसभा सीटों की बात थी।
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

कौन हैं तेजस्वी घोसालकर, मुंबई की संभावित मेयर जिन्होंने 2024 में पति अभिषेक की हत्या की त्रासदी झेली

Karnataka : क्या लक्कुंडी गांव में मिलेगा सोने का भंडार? 400 साल पुराने खजाने के रहस्य ने उड़ाए होश, खुदाई के लिए पहुंचा JCB और ट्रैक्टरों का काफिला

Lashkar E Taiba के कमांडर का कबूलनामा, हम वहां बैठ भी नहीं सकते, Pakistan को दर्द दे रहे Operation Sindoor से मिले घाव

bmc election results : महाराष्ट्र के BMC चुनाव में राज ठाकरे की हार, क्या उद्धव आगे देंगे भाई का साथ

महाराष्ट्र की सियासत में ठाकरे ब्रांड का सूर्यास्त!, निकाय चुनाव में 40 साल बाद ढहा BMC का किला, उद्धव-राज ठाकरे की जोड़ी बेअसर

सभी देखें

मोबाइल मेनिया

iPhone पर मिल रही बंपर छूट, कम कीमत के साथ भारी डिस्काउंट

Redmi Note 15 5G : सस्ता 5जी स्मार्टफोन, धांसू फीचर्स, कीमत में डिस्काउंट के साथ मिल रही है छूट

Year End Sale : Motorola G05 पर बड़ी छूट, 7,299 में दमदार फीचर्स वाला स्मार्टफोन

iPhone 18 Pro में दिखेंगे बड़े बदलाव, नया डिजाइन, दमदार A20 Pro चिप, कैमरा और बैटरी में अपग्रेड

जनवरी 2026 में स्मार्टफोन लॉन्च की भरमार, भारतीय बाजार में आएंगे कई दमदार 5G फोन

अगला लेख