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भाजपा की पश्चिम बंगाल में जीत के बाद बांग्लादेश से बढ़ेगा तनाव, क्या होगा भविष्य?

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bjp bengal and bangladesh
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की प्रचंड जीत की सभी ज्योतिषियों ने भविष्यवाणी की थी। साथ ही यह भी कहा था कि जीत के बारे आने वाले समय में भाजपा की सरकार को कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। खासकर घुसपैठ के मुद्दे और बांग्लादेश से संबंधों को लेकर तनाव रहेगा। भारत को चीन और बांग्लादेश की ओर से चुनौतियां मिलेगी।
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बांग्लादेश और पश्‍चिम बंगाल में सक्रिय होंगी भारत विरोधी शक्तियां:

मेदिनी ज्योतिष के अनुसार जब भी शनि मीन और मेष राशि में रहता है इस संपूर्ण क्षेत्र में अराजकता, हिंसा और आंदोलन देखा गया है। संपूर्ण क्षेत्र की बात करें तो इसमें पश्‍चिम बंगाल और बांग्लादेश दोनों क्षेत्र आते हैं। हमने पिछले 2 साल यह देखा ही है कि पश्‍चिम बंगाल और बांग्लादेश में क्या हुआ। पहले बांग्लादेश में हिंसा के बाद सत्ता परिवर्तन हुआ और अब भारत के पश्‍चिम बंगाल में परिवर्तन हुआ है।
 
बांग्लादेश की सरकार भले ही भारत के साथ मित्रवत व्यवहार करें लेकिन वहां के कट्टरपंथी और जनता का जुड़ाव अब पाकिस्तान से हो चला है। चीन से भी बांग्लादेश के संबंध मजबूत होते जा रहे हैं। ऐसे में जब शनि मेष राशि में जाएगा तब बांग्लादेश की ओर से भारत के सामने चुनौतियां खड़ी होने लगेगी। 

घुसपैठियों के 'पुश-इन' पर बांग्लदेश करेगा विरोध:

चीन और बांग्लादेश की जुगलबंदी से बंगाल को अस्थिर करने की अंतरराष्ट्रीय साजिश तो भाजपा की जीत के साथ ही प्रारंभ हो चली है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने 5 मई 2026 को बयान दिया कि यदि पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद सीमा पर "पुश-इन" (भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा लोगों को सीमा के उस पार धकेलने की प्रक्रिया) की घटनाएं होती हैं, तो बांग्लादेश इस पर कड़ी कार्रवाई करेगा। उन्होंने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।
 
बांग्लादेश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने 6 मई 2026 को कहा कि उन्होंने बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) को सीमा पर "हाई अलर्ट" पर रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत की ओर से संदिग्ध नागरिकों को अवैध रूप से बांग्लादेश की सीमा में धकेलने जैसी कोई घटना नहीं होगी। बांग्लादेश सरकार ने भारतीय नेताओं (विशेषकर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा) के उन बयानों पर औपचारिक विरोध दर्ज कराया है, जिनमें कथित तौर पर अवैध प्रवासियों को वापस भेजने की बात कही गई थी। ढाका ने इन बयानों को "प्रतिकूल" (Counterproductive) बताया और कहा कि इससे द्विपक्षीय संबंधों पर बुरा असर पड़ सकता है।

भारत का जवाब (MEA का रुख):

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने 7 मई 2026 को प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अवैध बांग्लादेशी नागरिकों की वापसी (Repatriation) दोनों देशों के बीच एक "कोर इश्यू" (मुख्य मुद्दा) है। भारत ने बांग्लादेश से लगभग 2,860 मामलों में राष्ट्रीयता सत्यापन (Nationality Verification) की प्रक्रिया को तेज करने का आग्रह किया है, जो लंबे समय से लंबित हैं। भारत का रुख स्पष्ट है कि अवैध नागरिकों की वापसी स्थापित कानूनों और द्विपक्षीय तंत्र के माध्यम से ही होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता है तो भारत इस पर कड़ा रुख अपनाएगा। 
 
भारतीय जनता पार्टी यह पहले ही स्पष्‍ट कर चुकी है कि पश्‍चिम बंगाल राज्य से घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें बाहर निकालने की प्रक्रिया तेज होगी। इसमें किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही नहीं बरती जाएगी। 
 

बांग्लादेश का भविष्य: विखंडन और विलय

बांग्लादेश की उल्टी गिनती प्रारंभ: ज्योतिषीय गणना (Mundane Astrology) के अनुसार, बांग्लादेश के पाप का घड़ा भर चुका है। वहां का हिंदू नरसंहार उसकी बर्बादी की पटकथा है। यदि बांग्लादेश घुसपैठियों को नहीं लेता है तो जब शनि 2027 में मेष राशि में प्रवेश करेगा तब बांग्लादेश की उल्टी गिनती प्रारंभ हो जाएगी।  
 
साजिश का कालखंड (2026-2027): बांग्लादेश द्वारा बंगाल, असम और मणिपुर को अस्थिर करने के लिए बड़ी आतंकी साजिश रची जा सकती है। पूर्वोत्तर क्षेत्र के उग्रवादियों पर होगी बड़ी कार्रवाई। घुसपैठ मुक्त पश्‍चिम बंगाल और सुरक्षित सीमाएं इस कालखंड की सबसे बड़ी उपलब्धि होंगी।
 
वज्र प्रहार: वहां की वर्तमान या आने वाली सरकार यदि भारत से संबंध को बनाए रखने की पहल नहीं करती है और स्थानीय आतंकवादियों पर लगाम नहीं लगाती है तो भारत की सुरक्षा को खतरा होते ही भारतीय सेना का 'वज्र प्रहार' जैसा कड़ा एक्शन होगा। यदि ऐसा होता है तो 2028 तक बांग्लादेश के दो टुकड़े होने के प्रबल योग हैं। इसका हिंदू बहुल और एक बड़ा हिस्सा भारत में विलीन होकर हो सकता है। 
  
पश्‍चिम बंगाल की सीमाएं: 2026 से 2028 का समय भारत के लिए अपनी सीमाओं के विस्तार और शत्रुओं के दमन का काल है। ग्रहों की चाल स्पष्ट कर रही है कि जो शक्तियां भारत को मिटाने का स्वप्न देख रही हैं, वे स्वयं इतिहास के पन्नों में विलीन हो जाएंगी।
 

क्या कारण है कि पश्‍चिम बंगाल होगा घुसपैठ मुक्त और बांग्लादेश के बुरे दिन होंगे प्रारंभ?

मंगल का मेष में गोचर: 11 मई 2026, सोमवार को दोपहर 12:50 बजे मंगल ग्रह अपने मित्र बृहस्पति की मीन राशि से निकलकर अपनी स्वामित्व वाली मेष राशि में प्रवेश करेंगे। यहां पर मंगल सूर्य और बुध से युति बनाएंगे। मेष राशि मंगल की स्वराशि है, इसलिए यहाँ मंगल का गोचर अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है। इस राशि में 'रूचक महापुरुष राजयोग' का निर्माण भी होगा। यह शक्तिशाली योग भारत और पीम मोदी पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा।
 
भारत की कुंडली: भारत की कुंडली वृषभ लग्न की है, जिसके अनुसार मंगल का यह गोचर बारहवें (व्यय) भाव में होगा। वर्तमान में भारत की कुंडली में मंगल की महादशा चल रही है जो 2032 तक रहेगी। इस दौरान भारत अपनी रक्षा प्रणाली और सैन्य शक्ति में बड़ा निवेश कर सकता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ेगी। नई रक्षा तकनीक या मिसाइल परीक्षण की खबरें आ सकती हैं। सरकार कड़े और साहसी निर्णय ले सकती है। आंतरिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को लेकर प्रशासन अधिक सक्रिय और सख्त नजर आएगा।
 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कुंडली: पीएम नरेंद्र मोदी की जन्म कुंडली वृश्चिक लग्न की है और उनकी राशि भी वृश्चिक है। वृश्चिक लग्न कुंडली के लग्न में मंगल और चंद्र बैठे हैं। वर्तमान में पीएम मोदी की कुंडली में मंगल की महादशा चल रही है जो 29 नवम्बर 2021 से प्रारंभ होकर 29 नवम्बर 2028 तक रहेगी। इसी के साथ ही लग्नेश मंगल केंद्र में स्वराशिस्थ होकर 'रूचक' नामक पंच महापुरुष राजयोग बना रहा है। मंगल छठे एवं प्रथम भाव का स्वामी होकर लग्न में स्थित हैं, इसलिए मोदी के शत्रु मोदी से कभी जीत नहीं पाएं। जिन लोगों ने भी उनसे सीधा सीधा पंगा लिया उनका भविष्य खतरे में आ गया है। मोदी जी के कुंडली में शत्रुहंता योग है। यानी जो भी व्यक्ति, संगठन या देश उसने टकराएगा वह स्वयं भी खत्म हो जाएगा।
 
-ज्योतिषीय विश्लेषण एवं भविष्यवाणियों पर आधारित

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