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कब खुलेंगे सिनेमाघर, सरकार की ओर से भी कोई राहत नहीं

Webdunia
सोमवार, 31 अगस्त 2020 (09:34 IST)
देश में धीरे-धीरे कई चीजों को अनलॉक किया जा रहा है, लेकिन सिनेमाघर इस लिस्ट में शामिल नहीं हैं। गाइडलाइन के मुताबिक 30 सितंबर तक सिनेमाघर बंद रहेंगे। इसको लेकर भारतीय फिल्म उद्योग में निराशा की लहर है। 
 
फिल्म व्यवसाय से जुड़े लोगों ने सरकार से अपील की है कि वे सिनेमाघर खोलने के बारे में भी सोचे ताकि इससे जुड़े लोगों की आर्थिक स्थिति सुधर सके। 
 
बाजारों में देखा जा रहा है नियम-कायदों की धज्जियां उड़ रही हैं। इस तरह भीड़ उमड़ रही है मानो कोरोनावायरस का नाम ही किसी ने नहीं सुना हो। शॉपिंग मॉल खुल गए हैं। शादियों और अंतिम संस्कार में भी 100 लोगों को शामिल होने की अनुमति है। 
 
धीरे-धीरे सार्वजनिक कार्यक्रमों भी शुरू होंगे और इनमें भी लोग एकत्रित होंगे। इन्हें गाइडलाइन को फॉलो करना होगा। ऐसे में सिनेमाघर को भी खोलने की अनुमति मिलना चाहिए। 
 
सिनेमाघर गाइडलाइन का पालन करने के लिए तैयार हैं। एक मल्टीप्लेक्स चेन ने तो छोटी फिल्म जारी कर बताया है कि वे किस तरह से सिनेमाघर में आने वाले दर्शकों का खयाल रखेंगे। 
 
सिनेमाघर वाले कैपिसिटी का 50 प्रतिशत से भी सिनेमाघर खोलने के लिए तैयार हैं। वे यह अच्छी तरह जानते हैं कि दर्शकों का विश्वास लौटने में समय लगेगा।‍ सितारों से सजी फिल्में रिलीज होने में वक्त लगेगा, लेकिन कभी न कभी शुरुआत तो करनी ही होगी। 
 
कुछ देशों में फिल्में फिर से सिनेमाघरों में दिखाई जाने लगी है और वहां पर रिस्पांस बेहतरीन मिला है। क्रिस्टोफर नोलान की फिल्म 'टेनेट' को हाल ही कुछ देशों में रिलीज किया गया, जिनमें सउदी अरब भी शामिल है। 
 
इस फिल्म ने पहले वीकेंड में 53 मिलियन डॉलर यानी कि लगभग 387.50 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया है जो कि दिखाता है कि दर्शक अब मानसिक रूप से सिनेमाघर में फिल्म देखने के लिए तैयार हैं। 
 
हाल ही में यूएस में सुपर 30, सिम्बा, सांड की आंख और गोलमाल अगेन जैसी फिल्में फिर से रिलीज की गईं। इन पुरानी फिल्मों को इसलिए रिलीज करना पड़ा क्योंकि सिनेमाघर तो खुल गए हैं, लेकिन नई फिल्में रिलीज करने से फिल्म निर्माता कतरा रहे हैं। वे दर्शकों का रिस्पांस देख कर ही निर्णय लेना चाहेंगे और यह बात सही भी है क्योंकि करोड़ों रुपयों की लागत से तैयार फिल्मों को अचानक रिलीज नहीं किया जा सकता। 
 
भारत में भी यही परिस्थितियां होंगी। सिनेमाघरों को पुरानी फिल्मों से शुरुआत करना होगी। छोटे बजट की नई फिल्मों को दिखाना होगा। यदि पांच स्क्रीन्स है तो 2 स्क्रीन्स खोले जाएंगे। शो की संख्या सीमित होगी। संभव है कि शाम 7 बजे के बाद कोई फिल्म दिखाने की अनुमति न मिले, लेकिन इससे धीरे-धीरे दर्शक सिनेमाघर लौटेंगे तो बड़ी फिल्मों के लिए मार्ग प्रशस्त होगा।
 
कई फिल्म निर्माताओं ने ओटीटी प्लेटफॉर्म के साथ सौदा करते हुए अपनी फिल्में सिनेमाघर से पहले ही इस प्लेटफॉर्म पर प्रदर्शित कर दी है, लेकिन अभी भी अक्षय कुमार की सूर्यवंशी, सलमान खान की राधे, रणवीर सिंह की 83 जैसी बड़ी फिल्में हैं जो आगामी 2 से 3 महीनों में सिनेमाघर की रौनक लौटा सकती है। 
 
जरुरी है सरकार की ओर से फिल्म उद्योग को राहत देने की। 6 महीने से सिनेमाघर वालों ने कुछ भी नहीं कमाया है। सरकार ने कोई राहत पैकेज नहीं दिया है। बिजली का बिल भी कम नहीं किया जा रहा है। जबकि हजारों लोग सिनेमाघर के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं।  

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