Hanuman Chalisa

रेमडेसिवीर बन सकता है कोविड-19 के खिलाफ हथियार, अभी और ट्रॉयल की जरूरत

Webdunia
मंगलवार, 21 अप्रैल 2020 (07:39 IST)
ह्यूस्टन। अनुसंधानकर्ताओं का दावा है कि क्लिनिकल ट्रॉयल के दौरान कोविड-19 के मरीजों पर रेमडेसिवीर का काफी अच्छा असर हो रहा है और उसके परिणाम अच्छे हैं, लेकिन इस दवा के प्रभाव को जांचने के लिए अधिक ट्रॉयल करने की जरूरत है।
ALSO READ: न्यूयॉर्क के अस्पताल में कोरोना पीड़ितों के उपचार में जुटी मिल्खा सिंह की बेटी मोना
अमेरिका के टेक्सास स्थित ह्यूस्टन मेथडिस्ट अस्पताल के अनुसंधानकर्ताओं के अनुसार ट्रॉयल में बीमारी के शुरुआती दौर में मरीज का इलाज किया जाता है या फिर कुछ मामलों में जिन्हें इलाज के दौरान वेंटिलेटर लगाने की जरूरत पड़ी हो।
 
अस्पताल में संक्रामक बीमारियों की फार्मासिस्ट कैथरीन के. पेरेज ने कहा कि शुरुआती परिणाम आशानजक हैं और अभी वही महत्वपूर्ण है। कोविड-19 के मरीजों के संबंध में अभी तक हमने जितना सीखा है, उससे हमें इतना ही पता चला है कि उनकी हालत को तेजी से बिगड़ने से रोकना है।
 
पेरेज ने कहा कि समय पर कार्रवाई सबकुछ है। मैं पक्का-पक्का नहीं कह सकती हूं कि (इलाज के बिना) उन्हें वेटिलेटर पर डालना ही पड़ता, लेकिन यह आशाजनक है। इस साल की शुरुआत में 'नेचर' पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार करीब 1 दशक पहले इबोला के इलाज के लिए विकसित रेमडेसिवीर कई सारे वायरस के इलाज में इस्तेमाल किया जा सकता है।
 
चीन में हुए अनुसंधान के अनुसार रेमडेसिवीर सफलतापूर्वक कोरोना वायरस, सार्स कोविड-2 को मनुष्य की कोशिकाओं में वृद्धि करने से रोक सकता है।
 
'न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन' में प्रकाशित एक अन्य रिसर्च के अनुसार अमेरिकन सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेंशन की सलाह पर कोरोना वायरस से संक्रमित एक व्यक्ति को रेमडेसिवीर दिया गया और उसकी हालत में 24 घंटे के भीतर सुधार होने लगा।
 
अस्पताल ने एक बयान में कहा कि कोविड-19 के साथ सबसे चुनौतीपूर्ण बात यह है कि वह मानव शरीर में प्रवेश करने के बाद जिस तरीके से अपनी संख्या में वृद्धि करता है, उसमें कहा गया है कि इसी तरह कोविड-19 को अगर शुरुआती चरण में नहीं रोका गया तो वह व्यक्ति में श्वसन संबंधी परेशानी खड़ी कर सकता है और उसे वेंटिलेटर पर जाने को मजबूर कर सकता है।
 
रेमडेसिवीर ने मानव कोशिश के भीतर कोरोना वायरस की वृद्धि को रोकने की क्षमता प्रदर्शित की है और अब मरीजों पर उसका क्लिनिकल ट्रॉयल चल रहा है। (भाषा)

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

बंगाल में अवैध घुसपैठ पर मोदी सरकार सख्‍त, हाईलेवल कमेटी ऑन डेमोग्राफिक चेंज का गठन, अवैध बांग्लादेशियों में हड़कंप

चीन में बैठे सर्जन ने हैदराबाद में किया ऑपरेशन, क्या 5G और रोबोटिक्स बदल देंगे दुनिया की सर्जरी का भविष्य?

जैसलमेर में 500 गायों के शव मिलने से हड़कंप: सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद एक्शन

बलात्कारी बाबा, बार-बार पैरोल, क्या भारत में कानून सिर्फ आम लोगों के लिए है?

कचरे के साथ उड़ा दिए 8.70 करोड़! बैंक ने जब CCTV खंगाला, तो उड़ गए सबके होश

सभी देखें

नवीनतम

सिंहस्थ 2028 को लेकर CM डॉ. यादव का बड़ा ऐलान, श्रद्धालुओं को मिलेगा मां शिप्रा के जल से स्नान का पुण्य लाभ

इंदौर में पानी को लेकर फूटा गुस्सा, कांग्रेस का राजबाड़ा पर बड़ा प्रदर्शन, महापौर के इस्तीफे की मांग

Maharashtra : धुले में एंबुलेंस से गौ-तस्करी का प्रयास नाकाम, 10 गायें बचाई गईं

Karnataka Congress में फिर बढ़ी सियासी खींचतान, सिद्धारमैया-डीके शिवकुमार विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा

China को टक्कर देने की तैयारी, भारत-अमेरिका के कौनसे समझौते से उड़ी ड्रेगन की नींद, दबदबा होगा खत्म

अगला लेख