Biodata Maker

कोरोना मरीजों पर यूनानी दवाएं भी कारगर, सफदरजंग अस्पताल में चल रहा है टेस्ट

Webdunia
रविवार, 28 फ़रवरी 2021 (15:44 IST)
नई दिल्ली। सदियों से इस्तेमाल होती आ रही यूनानी दवाएं कोरोना वायरस के इलाज में भी कारगर साबित हो रही हैं। नई दिल्ली के सफरदजंग अस्पताल में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों पर इन दवाओं का परीक्षण किया जा रहा है और डॉक्टरों के मुताबिक, अब तक के परिणामों में संक्रमण के लक्षण कम समय में खत्म करने में इन दवाओं के नतीजे 'संतोषजनक’ रहे हैं।

ALSO READ: भारत में 30 दिनों में कोरोनावायरस के सबसे ज्यादा नए मामले, लगातार चौथे दिन मिले 16000 से ज्यादा संक्रमित
इस परीक्षण के दौरान कोरोना वायरस से संक्रमित हुए इस अस्पताल के कुछ डॉक्टरों व नर्सों ने भी यूनानी दवाइयां ली हैं। यह परीक्षण केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान परिषद (सीसीआरयूएम), सफदरजंग अस्पताल के साथ मिलकर कर रही है।

सफदरजंग अस्पताल में सामुदायिक आयुर्विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. जुगल किशोर ने कहा कि परीक्षण में जिन यूनानी दवाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है वे सदियों से उपयोग होती आ रही हैं।' उन्होंने कहा कि यूनानी, सिद्ध और आयुर्वेद में ऐसी दवाएं हैं जो वायरस के कारण होने वाले लक्षणों को ही पनपने नहीं देतीं।

प्रोफेसर किशोर ने बताया कि ये दवाएं आपके इम्यून सिस्टम (रोग प्रतिरोधक क्षमता) को ऐसा बना देती हैं कि शरीर में वायरस बढ़ ही नहीं पाता है और अगर वायरस का थोड़ा बहुत असर हुआ भी तो वह मामूली रहेगा और जल्दी खत्म हो जाएगा।

उन्होंने कहा कि आमतौर पर लोगों के मन में यह आशंका रहती है कि यूनानी या आयुर्वेदिक दवाएं उचित परीक्षण के जरिए आई हैं या नहीं और इस तरह के परीक्षणों के जरिए लोगों में इन दवाओं को लेकर भरोसा बनेगा।

अस्पताल में चल रहे परीक्षण के बारे में डॉक्टर किशोर ने बताया कि संक्रमित लोगों को दो समूहों में विभाजित किया गया है। उन्होंने कहा कि एक समूह को सिर्फ एलोपैथिक दवाएं दी जा रही हैं जबकि दूसरे समूह को एलोपैथिक के साथ-साथ यूनानी दवाएं भी दी जा रही हैं। अब तक करीब 30 मरीजों पर परीक्षण किया गया है और नतीजे संतोषजनक रहे हैं।

डॉक्टर किशोर ने कहा कि सिर्फ एलोपैथिक दवाएं लेने वाले मरीजों की तुलना में यूनानी और एलोपैथिक दवाएं लेने वाले मरीजों में संक्रमण के लक्षण तीन से पांच दिन में खत्म हो गए और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

उन्होंने कहा कि यह परीक्षण तीन महीने चलना है जो दिसंबर में शुरू हुआ था, लेकिन कोरोना वायरस के मामलों में कमी आने की वजह से धीरे-धीरे मरीज कम हो गए और अब मरीज बिल्कुल ही नहीं हैं।

डॉक्टर किशोर ने कहा कि परीक्षण के लिए करीब 50 मरीज लेने थे। पिछले 10-15 दिन से एक भी मरीज नहीं आया है, इसलिए मरीजों की संख्या पूरी नहीं हो पाई है।

डॉ. किशोर ने बताया कि परीक्षण में हल्के और मध्यम स्तर के लक्षण वाले ऐसे मरीजों को शामिल किया गया है, जिनमें पहले से कोई बीमारी नहीं थी। गंभीर रूप से संक्रमित मरीजों पर यह परीक्षण नहीं किया गया है, क्योंकि इस तरह के मरीजों का अलग इलाज होता है।

उन्होंने यह नहीं बताया कि यूनानी चिकित्सा पद्धति की कौन सी दवाएं इस परीक्षण में शामिल की गई हैं। उनका कहना था कि इन दवाओं में इस्तेमाल सामग्री पेटेंट से संबंधित हैं।

वहीं सूत्रों ने ‘बताया कि कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों को दिन में दो बार जोशांदा का काढ़ा और खमीरा मारवारिद दिया जा रहा है। जोशांदा संक्रमण के लक्षण को कम करने में मदद करता है जबकि खमीरा मारवारिद वायरस के हमले के बाद रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है। (भाषा)

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

Budget 2026 : 9 बजट, 9 राज्यों की साड़ियां, निर्मला सीतारमण की साड़ी का 2026 में किस राज्य से था कनेक्शन

Stock Market Crash : बजट धमाका या बाजार को झटका, निवेशकों के 10 लाख करोड़ स्वाहा, क्या STT बना विलेन, क्यों मचा शेयर बाजार में कोहराम

Budget 2026 Defence: रक्षा बजट में 1 लाख करोड़ का इजाफा, सेना की बढ़ेगी ताकत

Union Budget 2026-27 : Nirmala Sitharaman का बजट धमाका! 10 बड़े ऐलान जिन्होंने सबको चौंका दिया

Old vs New Tax Regime: बजट 2026 के बाद कौन सी टैक्स व्यवस्था है आपके लिए बेस्ट?

सभी देखें

नवीनतम

भारत के खिलाफ मैच के बहिष्कार पर पाकिस्तान में बवाल, ICC की चेतावनी, क्या होगी सख्‍त कार्रवाई?

LIVE: बजट सत्र का चौथा दिन, संसद में राष्‍ट्रपति अभिभाषण पर चर्चा

बजट से खादी और वस्त्र क्षेत्र को मिलेगी नई रफ्तार, यूपी में लाखों लोगों के लिए सृजित होंगे नए अवसर

एप्सटीन फाइल्स में पीएम मोदी के नाम पर विवाद

SIR के खिलाफ Supreme Court पहुंचीं ममता बनर्जी, CEC ज्ञानेश के खिलाफ दायर की याचिका

अगला लेख