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पहलगाम हमले से ऑपरेशन सिंदूर तक, पहली बरसी पर जानिए पूरा घटनाक्रम

वेबदुनिया फीचर टीम
गुरुवार, 7 मई 2026 (11:12 IST)
The Full Story of Operation Sindoor: 7 मई 2026 को उस जवाबी कार्रवाई यानी 'ऑपरेशन सिंदूर' के शुरू होने का ठीक एक साल पूरा हो गया है। ऑपरेशन सिंदूर की कहानी भारतीय कूटनीति और साहस का एक ऐसा अध्याय है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। पहलगाम हमले के बाद भारतीय सेना ने जिस आक्रामक रणनीति के साथ आतंकवाद के सफाए का यह अभियान चलाया, उसकी कहानी साहस और आधुनिक तकनीक के बेजोड़ मेल की है। यहाँ उस ऑपरेशन की पूरी टाइमलाइन और कहानी।
 

1. वह काली तारीख: 22 अप्रैल 2025 (बैसरन घाटी हमला)

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की बैसरन घाटी (Mini Switzerland) में हुए दिल दहला देने वाले आतंकवादी घटना में 26 निहत्‍थे पर्यटक शहीद हो गए थे। इन सभी से उनका धर्म पूछकर उन्हें गोली मारी गई। 
 
पहलगाम की शांत और खूबसूरत बैसरन घाटी उस दिन गोलियों की गूँज से दहल उठी थी। आतंकियों ने वहां घूम रहे 26 पर्यटकों के एक समूह पर अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस कायराना हमले में कई निर्दोष नागरिक हताहत हुए थे, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। पर्यटकों को निशाना बनाने का उद्देश्य कश्मीर के पर्यटन और शांति को चोट पहुँचाना था।
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2. 'ऑपरेशन सिंदूर' का आगाज़: 7 मई 2025

इस हमले के बाद भारतीय सुरक्षा बलों ने शांति बनाए रखी और गहन खुफिया जानकारी जुटाई। हमले के ठीक 15 दिन बाद, 7 मई 2025 को भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और CRPF ने मिलकर एक संयुक्त मेगा-ऑपरेशन शुरू किया, जिसे 'ऑपरेशन सिंदूर' नाम दिया गया।
 
नाम का अर्थ: यह नाम उन सुहागनों और परिवारों के सम्मान में रखा गया जिन्होंने इस आतंकी हिंसा में अपनों को खोया था। इसका लक्ष्य उन 'दरिंदों' का सफाया करना था जिन्होंने घाटी की मिट्टी को बेगुनाहों के खून से लाल किया था।
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3. ऑपरेशन की पूरी कहानी: प्रारंभभिक चरण

यह ऑपरेशन दक्षिण कश्मीर के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों और घने जंगलों में चलाया गया:
 
घेराबंदी (The Siege): सेना ने बैसरन घाटी के ऊपरी इलाकों और लिद्दरवट के जंगलों को चारों तरफ से सील कर दिया।
तकनीक का वार: घने जंगलों में छिपे आतंकियों को ढूंढने के लिए हाई-रिज़ॉल्यूशन थर्मल इमेजिंग कैमरों और 'रुद्र' हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल किया गया।
 
सटीक कार्रवाई: 10 मई तक चले इस गहन ऑपरेशन में कुछ आतंकियों को मार गिराया गया जो बैसरन हमले के मुख्य साजिशकर्ता थे। इनमें एक विदेशी कमांडर भी शामिल था जो सीमा पार से घुसपैठ कर आया था।
 

4. ऑपरेशन की शुरुआत और आक्रामक प्रहार (7 मई)

बैसरन घाटी हमले के प्रतिशोध में भारत ने सैन्य कार्रवाई का बिगुल फूंका। 7 मई को भारतीय सेना और वायुसेना ने सीमा पार एक बड़ा अभियान चलाया। इस हमले में पाकिस्तान स्थित 9 से अधिक सक्रिय आतंकवादी अड्डों को निशाना बनाया गया और उन्हें पूरी तरह मलबे में तब्दील कर दिया गया। यह भारत की ओर से आतंकवाद की फैक्ट्री पर किया गया सीधा प्रहार था।
 

5. पाकिस्तान का ड्रोन हमला और भारत की ढाल (8 मई)

अपनी हार से बौखलाए पाकिस्तान ने 8 मई की रात को एक अभूतपूर्व हिमाकत की। उसने भारत के 15 प्रमुख शहरों को निशाना बनाने के लिए 1000 से अधिक ड्रोन्स का झुंड (Swarm) भेजा। हालांकि, भारत की आधुनिक हवाई रक्षा प्रणाली और त्वरित प्रतिक्रिया ने इस विशाल हमले को पूरी तरह नाकाम कर दिया और भारतीय शहरों पर आंच भी नहीं आने दी।
 

6. निर्णायक जवाबी कार्रवाई: पाकिस्तान की कमर टूटी (9 मई)

8 मई की हिमाकत का जवाब देने के लिए 9 मई को भारत ने अपनी सैन्य शक्ति का भीषण प्रदर्शन किया। इस कार्रवाई में पाकिस्तान को भारी सैन्य नुकसान उठाना पड़ा:
 

7. पाकिस्तान की कूटनीतिक छटपटाहट और अमेरिकी हस्तक्षेप की गुहार

 

8. युद्धविराम (Ceasefire) और भारत की अंतिम चेतावनी (10 मई)

चार दिनों के भीषण संघर्ष के बाद, 10 मई को पाकिस्तान के डीजीओ (DGO) ने आधिकारिक रूप से भारत से युद्ध रोकने की गुहार लगाई। पाकिस्तान की लाचारी और समर्पण को देखते हुए भारत ने सीजफायर (युद्धविराम) का ऐलान किया।
 

9. भारत का कड़ा संदेश:

युद्धविराम के साथ ही भारत ने वैश्विक मंच पर यह स्पष्ट कर दिया कि भविष्य में यदि कोई भी छोटा या बड़ा आतंकवादी हमला होता है, तो उसे सीधे 'भारत के खिलाफ युद्ध' माना जाएगा। भारत ने चेतावनी दी कि अगली बार ऐसी किसी भी हरकत के गंभीर परिणाम भुगतने के लिए पाकिस्तान को तैयार रहना होगा।

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