rashifal-2026

दिवाली, दीपावली, दीपोत्सव या दीप पर्व क्या है सही नाम इस महा त्योहार का, जानिए यहाँ

WD Feature Desk
Deepawali 2024: दिवाली या दीपावली का त्योहार प्राचीनकाल से ही मनाया जाता रहा है। वक्त के साथ इस त्योहार को मनाने के तरीके भी बदले हैं। हिन्दू कलैंडर के अनुसार दिवाली का पर्व प्रतिवर्ष कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाता है। 
 
दिवाली को प्राचीन काल में क्या कहा जाता था और कब से हुई थी इसकी शुरुआत, क्या है इसका इतिहास। आओ जानते हैं।
 
दीपावली का प्राचीन नाम क्या है?
 
दीपावली शब्द 'दीप' (दीपक) और 'आवली' (पंक्ति) से मिलकर बना है। जिसका अर्थ है 'दीपों की पंक्ति'। दीपा की माला। ने वाला पर्व है। वैदिक प्रार्थना है-  'तमसो मा ज्योतिर्गमय:' अर्थात अंधकार से प्रकाश में ले जाने वाला पर्व है- 'दीपावली'। प्राचीनकाल में इसे दीपोत्सव अर्थात दीपों का उत्सव कहा जाता था।

कहते हैं कि कार्तिक अमावस्या की रात अन्य अमावस्या की रातों से सबसे घनी होती है, इसीलिए इस दिन दीपक जलाकर अंधकार को दूर करने की परंपरा चली आ रही है।
 
दीपावली की शुरुआत कब से हुई और क्या है इसका इतिहास?
 
1. कहते हैं कि प्रारंभ में दीवाली के पर्व यक्ष और गंधर्व जाति का उत्सव था। मान्यता है कि दीपावली की रात्रि को यक्ष अपने राजा कुबेर के साथ हास-विलास में बिताते व अपनी यक्षिणियों के साथ आमोद-प्रमोद करते थे। बाद में यह त्योहार सभी जातियों का प्रमुख त्योहार बन गया।
 
2. सभ्याता के विकासक्रम के चलते बाद में धन के देवता कुबेर की बजाय धन की देवी लक्ष्मी की इस अवसर पर पूजा होने लगी, क्योंकि कुबेर जी की मान्यता सिर्फ यक्ष जातियों में थी पर लक्ष्मीजी की देव तथा मानव जातियों में मान्यता थी। दीपावली के साथ लक्ष्मी पूजन के जुड़ने का कारण लक्ष्मी और विष्णुजी का इसी दिन विवाह सम्पन्न होना भी माना गया है।
 
3. कहते हैं कि लक्ष्मी, कुबेर के साथ बाद में गणेशजी की पूजा का प्रचलन भौव-सम्प्रदाय के लोगों ने किया। ऋद्धि-सिद्धि के दाता के रूप में उन्होंने गणेशजी को प्रतिष्ठित किया। 
 
4. कहते हैं कि इस दिन एक ओर जहां समुद्रमंथन के पश्चात लक्ष्मी व धन्वंतरि प्रकट हुए थे, वहीं इसी दिन माता काली भी प्रकट हुई थी इसलिए इस दिन काली और लक्ष्मी दोनों की ही पूजा होती है और इसी कारण दीपोत्सव मनाया जाता है।
 
5. कहते हैं कि दीपावली का पर्व सबसे पहले राजा महाबली के काल से प्रारंभ हुआ था। विष्णु ने तीन पग में तीनों लोकों को नाप लिया। राजा बली की दानशीलता से प्रभावित होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राज्य दे दिया, साथ ही यह भी आश्वासन दिया कि उनकी याद में भू लोकवासी प्रत्येक वर्ष दीपावली मनाएंगे। तभी से दीपोत्सव का पर्व प्रारंभ हुआ।
 
6. यह भी कहा जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु ने राजा बली को पाताल लोक का स्वामी बनाया था और इन्द्र ने स्वर्ग को सुरक्षित जानकर प्रसन्नतापूर्वक दीपावली मनाई थी।
 
7. कहते हैं कि भगवान श्रीराम अपना 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद पुन: लौट आए थे। कहते हैं कि वे सीधे अयोध्या न जाते हुए पहले नंदीग्राम गए थे और वहां कुछ दिन रुकने के बाद दीपावली के दिन उन्होंने अयोध्या में प्रवेश किया था। इस दौरान उनके लिए खासतौर पर नगर को दीपों से सजाया गया था। तभी से दिवाली के दिन दीपोत्सव मनाने का प्रचलन हुआ।
 
8. ऐसा कहा जाता है कि दीपावली के एक दिन पहले श्रीकृष्ण ने अत्याचारी नरकासुर का वध किया था जिसे नरक चतुर्दशी कहा जाता है। इसी खुशी में अगले दिन अमावस्या को गोकुलवासियों ने दीप जलाकर खुशियां मनाई थीं। दूसरी घटना श्रीकृष्ण द्वारा सत्यभामा के लिए पारिजात वृक्ष लाने से जुड़ी है। श्री कृष्ण ने इंद्र पूजा का विरोध करके गोवर्धन पूजा के रूप में अन्नकूट की परंपरा प्रारंभ की थी।
 
9. राक्षसों का वध करने के लिए मां देवी ने महाकाली का रूप धारण किया। राक्षसों का वध करने के बाद भी जब महाकाली का क्रोध कम नहीं हुआ तब भगवान शिव स्वयं उनके चरणों में लेट गए। भगवान शिव के शरीर स्पर्श मात्र से ही देवी महाकाली का क्रोध समाप्त हो गया। इसी की याद में उनके शांत रूप लक्ष्मी की पूजा की शुरुआत हुई। इसी रात इनके रौद्ररूप काली की पूजा का भी विधान है।
 
10. नवीनतम शोधानुसार सिंधु घाटी की सभ्यता लगभग 8000 वर्ष पुरानी है। अर्थात ईसा से 6 हजार वर्ष पूर्व सिंधु घाटी के लोग रहते थे। मतलब रामायण काल के भी पूर्व। सिंधु घाटी सभ्यता की खुदाई में पकी हुई मिट्टी के दीपक प्राप्त हुए हैं और 3500 ईसा वर्ष पूर्व की मोहनजोदड़ो सभ्यता की खुदाई में प्राप्त भवनों में दीपकों को रखने हेतु ताख बनाए गए थे।
 
मुख्य द्वार को प्रकाशित करने हेतु आलों की श्रृंखला थी मोहनजोदड़ो सभ्यता के प्राप्त अवशेषों में मिट्टी की एक मूर्ति के अनुसार उस समय भी दीपावली मनाई जाती थी। उस मूर्ति में मातृ-देवी के दोनों ओर दीप जलते दिखाई देते हैं। इससे यह सिद्ध स्वत: ही हो जाता है कि यह सभ्यता हिन्दू सभ्यता थी जो दीपावली का पर्व मनाती थी।

ALSO READ: दिवाली से पहले जान लीजिए 7 दिन की 7 तरह की रंगोली और उनसे होने वाला लाभ

ALSO READ: दिवाली पर सूर्यग्रहण का साया : जानिए कब और कैसे मनाएं दीपों का पर्व

Deepotsav 2024

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

कुंभ राशि में सूर्य-राहु की युति: 13 फरवरी से 'ग्रहण योग', इन 4 राशियों के लिए सावधानी का समय

Mahashivratri upay: महाशिवरात्रि पर इस बार बन रहे हैं दुर्लभ योग, रात को इस समय जलाएं दीपक

वरुण का दुर्लभ गोचर: 168 साल बाद मीन राशि में, 6 राशियों पर पड़ेगा गहरा असर

चार धाम यात्रा 2026 रजिस्ट्रेशन जरूरी, यहां देखें स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया

Venus Transit in Aquarius: 12 राशियों का भविष्य बदलेगा, जानिए राशिफल

सभी देखें

धर्म संसार

16 February Birthday: आपको 16 फरवरी, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 16 फरवरी 2026: सोमवार का पंचांग और शुभ समय

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (15 फरवरी, 2026)

15 February Birthday: आपको 15 फरवरी, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 15 फरवरी 2026: रविवार का पंचांग और शुभ समय

अगला लेख