Publish Date: Mon, 16 Feb 2026 (16:26 IST)
Updated Date: Mon, 16 Feb 2026 (16:40 IST)
How to get ration from Grain ATM: सोचिए, जिस तरह आप बैंक के ATM से कैश निकालते हैं, ठीक उसी तरह एक मशीन से गेहूं, चावल और दाल निकलने लगे! यह अब हकीकत है। गुजरात के गांधीनगर में गृहमंत्री अमित शाह ने एक ऐसी हाई-टेक व्यवस्था की शुरुआत की है, जहां डिजिटल करेंसी (CBDC) और 'अन्नपूर्ति' मशीन मिलकर गरीबों की थाली तक सीधा हक पहुंचाएंगे। यह सिर्फ राशन बांटना नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार पर 'डिजिटल स्ट्राइक' है।
गांधीनगर से इस योजना के पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई है। अगले 3-4 साल में इसे पूरे देश में लागू करने का लक्ष्य है। इस मशीन से सिर्फ गेहूं-चावल ही नहीं, बल्कि 1 किलो तुअर दाल, चना, नमक और चीनी भी मिलेगी। आधार आधारित बायोमेट्रिक और डिजिटल रुपए के इस्तेमाल से अनाज की चोरी और बिचौलियों का रोल पूरी तरह खत्म होगा।
CBDC आधारित पीडीएस क्या है?
सरल शब्दों में कहें तो CBDC (Central Bank Digital Currency) आधारित PDS सरकारी राशन वितरण प्रणाली (Public Distribution System) और डिजिटल करेंसी (Digital Rupee) का एक आधुनिक संगम है। यह 'कैश' या 'कागजी पर्ची' के बजाय पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित ट्रांजेक्शन पर आधारित है। यह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी 'डिजिटल रुपया' है।इसकी वैल्यू फिजिकल नोट के बराबर ही होती है, लेकिन यह आपके फोन या कार्ड में डिजिटल वॉलेट के रूप में रहता है।
PDS के साथ यह कैसे काम करता है?
पारंपरिक राशन सिस्टम में अक्सर अनाज की चोरी या रिकॉर्ड में हेरफेर की शिकायतें रहती थीं। इस नए मॉडल में लाभार्थी को उसके मोबाइल पर या आधार से जुड़े खाते में डिजिटल ई-रुपी वाउचर मिलेगा। जब लाभार्थी राशन की दुकान पर जाएगा, तो वह इस डिजिटल करेंसी के जरिए भुगतान करेगा। यह पैसा सीधे सरकार/एजेंसी से राशन दुकानदार के पास डिजिटल रूप में पहुंचेगा। इसमें नकद का कोई लेन-देन नहीं होगा।
'अन्नपूर्ति' ग्रेन ATM की भूमिका
इस सिस्टम को और भी पारदर्शी बनाने के लिए 'अन्नपूर्ति' मशीन (Grain ATM) लगाई गई है। लाभार्थी अपना बायोमेट्रिक अंगूठा लगाएगा। सिस्टम पहचान करेगा कि उसे कितना अनाज मिलना है। मशीन से ऑटोमैटिक तरीके से तय मात्रा में गेहूं, चावल या दाल निकल आएगी। इसका भुगतान पीछे लगे CBDC सिस्टम से स्वतः कट जाएगा।
Edited by: Vrijendra Singh Jhala