हरिद्वार का वह दक्ष मंदिर जहां हुआ था यज्ञ और माता सती ने दिया था बलिदान

अनिरुद्ध जोशी
उत्तररांचल प्रदेश में हरिद्वार अर्थात हरि का द्वार है। हरि याने भगवान विष्णु। हरिद्वार नगरी को भगवान श्रीहरि (बद्रीनाथ) का द्वार माना जाता है, जो गंगा के तट पर स्थित है। इसे गंगा द्वार और पुराणों में इसे मायापुरी क्षेत्र कहा जाता है। यह भारतवर्ष के सात पवित्र स्थानों में से एक है। हरिद्वार में हर की पौड़ी को ब्रह्मकुंड कहा जाता है। इसी विश्वप्रसिद्ध घाट पर कुंभ का मेला लगता है। आओ जानते हैं हरिद्वार के दक्ष मंदिर के बारे में संक्षिप्त जानकारी।
 
 
दक्ष मंदिर : 
1. हरिद्वार के दक्षिण में 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दक्ष महादेव मंदिर को उत्तराखण्ड का प्राचीन धार्मिक स्थल माना जाता है।
 
2. शिवजी को समर्पित इस मंदिर में प्रत्येक वर्ष सावन के महीने में बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने हेतु आते हैं। मंदिर के मध्य में शिवलिंग स्थापित है।
 
3. यह मंदिर माता सती के पिता राजा दक्ष की याद में बनवाया गया है।
 
4. किवदंतियों के अनुसार यहीं पर राजा दक्ष ने वह यज्ञ किया था जिसमें कूदकर माता सती ने आत्मदाह कर लिया था। इससे शिव के अनुयायी वीरभद्र ने दक्ष का सिर काट दिया था। बाद में शिव ने उन्हें पुनर्जीवित कर दिया।
 
5. इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1810 ईस्वी में पहले रानी धनकौर ने करवाया था और 1962 में इसका पुनर्निर्माण किया गया।
 
6. इस मंदिर में एक छोटा गड्ढा है। माना जाता है कि यह वही स्थान है जहां माता यज्ञ की अग्नि में कूद गई थी। 
 
7. यह मंदिर कनखल क्षेत्र में स्थित है। कहते हैं कि ब्रह्मपुत्र राजा दक्ष कनखल नरेश थे और उनकी इच्छा के विपरीत शिव ने इसी स्थल पर सती से विवाह रचाया था।
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

पर्स में रखें ये 5 चीजें, कभी नहीं होगी धन की कमी बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा

चैत्र नवरात्रि पर IRCTC का वैष्‍णोदेवी स्पेशल टूर पैकेज, जानिए कम खर्च में कैसे जा सकते हैं माता रानी के दरबार में

चैत्र नवरात्रि 2025 की अष्टमी तिथि कब रहेगी, क्या रहेगा पूजा का शुभ मुहूर्त?

बुध ग्रह मीन राशि में अस्त, 3 राशियां रहेंगी मस्त

बुध हुए मीन राशि पर अस्त, जानें 5 राशियों पर क्या होगा असर

सभी देखें

धर्म संसार

हिंदू नववर्ष गुड़ी पड़वा की 5 रोचक बातें जो इसे बनाती है सबसे अलग

Lal Kitab Astrology Tips: टेंशन दूर करना हो तो रात को तकिए के पास एक चीज रखकर सोएं

सूर्य ग्रहण वाले दिन शनि ग्रह जाने वाले हैं मीन राशि में, 6 राशियों के जीवन में होगा कुछ बड़ा बदलाव

Weekly Muhurat: मार्च 2025 के नए सप्ताह के शुभ मुहूर्त, जानें व्रत-त्योहार एवं ग्रह गोचर

एकनाथ छठ क्यों मनाई जाती है, जानिए संत के बारे में 5 खास बातें

अगला लेख