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क्या ECG नॉर्मल आने के बाद हार्ट अटैक आ सकता है? जानें एक्सपर्ट की राय

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Electrocardiogram Test : बढ़ती उम्र के साथ हमारे दिल पर प्रभाव पड़ने लगता है। आज के समय में हार्ट अटैक के केस काफी बढ़ गए हैं और भारत में हार्ट के मरीज की संख्या भी बढ़ती जा रही है। ऐसे में ज़रूरी है कि बढ़ती उम्र के साथ अपने दिल का नियमित टेस्ट करवाएं। दिल की सेहत को सही तरह से जानने के लिए डॉक्टर की जांच और कुछ टेस्ट ज़रूरी होते हैं (heart attack detection test)।

जब भी आप हार्ट का चेकअप करवाते हैं तो उसमें ECG (Electrocardiogram) ज़रूर शामिल होता है। लेकिन कई लोगों का सवाल होता है कि क्या ECG नॉर्मल होने के बाद भी हार्ट अटैक आ सकता है? या ECG के ज़रिए हार्ट अटैक का पता लगाया जा सकता है? चलिए जानते हैं सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ भारत रावत इस बारे में क्या कहते हैं...
 
सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट डॉ भारत रावत ने हमें बताया कि 'ECG (Electrocardiogram) हार्ट अटैक के वक़्त खराब आएगा। इसका मतलब है कि जब आर्टरी पूरी तरह से बंद हो गई है। हार्ट अटैक के वक़्त 80-90 प्रतिशत केसेस में ECG खराब आती है। साधारण केस में ऐसा नहीं होता है कि किसी को हार्ट अटैक आए और ECG नॉर्मल हो। हालांकि हार्ट अटैक के 1-2 घंटे पहले ECG नॉर्मल हो सकता है। ECG का काम हार्ट अटैक के बाद या हार्ट अटैक के दौरान होने वाली समस्या बताता है न कि हार्ट अटैक से पहले।'
हार्ट अटैक से पहले कैसे करें दिल की जांच?
डॉ भारत रावत ने बताया कि 'हार्ट अटैक से पहले अगर दिल की जांच करवानी है तो आप दोड़ते हुए ECG करवाओ। आप ट्रेड मिल पर दोड़ते हुए ECG करवाएं जिसे TMT (Treadmill Test) भी कहा जाता है। अगर दोड़ते हुए ECG नॉर्मल आता है तो इसका मतलब यह है कि व्यक्ति को कोई क्रिटिकल ब्लॉकेज नहीं है। साथ ही वह अब रेगुलर एक्सरसाइज करने में सक्षम है।'
 
TMT की जांच इसलिए भी ज़रूरी
TMT करवाने की सलाह सिर्फ दिल के मरीजों को नहीं दी जाती है। बल्कि अगर कोई व्यक्ति 30-35 साल की उम्र के बाद पहली बार जिम जा रहा हो या वह ट्रैकिंग पर जाना चाहता है तो उसे TMT करवाने की सलाह दी जाती है। इस टेस्ट की मदद से व्यक्ति अपनी हार्ट हेल्थ को बेहतर तरीके से समझ सकता है। साथ ही हैवी एक्सरसाइज या ट्रैकिंग करने से पहले अपनी सेहत को ठीक से समझ सकता है। 
 
आपको बता दें कि ECG हार्ट अटैक, कोई हृदय रोग, हार्ट बीट में समस्या या असाधारण हार्ट बीट, दिल के साइज़ को चेक करने के लिए की जाती है। दिल की गतिबिधि के ज़रिए डॉक्टर को सही उपचार निर्धारित करने में मदद मिलती है। साथ ही हृदय के अन्य टेस्ट के लिए ECG की रिपोर्ट ज़रूरी होती है। 
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