मेनोपॉज में नींद क्यों होती है प्रभावित? जानें इसे सुधारने के उपाय

मेनोपॉज के दौरान नींद की समस्या: कारण और समाधान के आसान तरीके

WD Feature Desk
गुरुवार, 26 सितम्बर 2024 (17:49 IST)
Why does menopause cause insomnia: मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) एक महत्वपूर्ण चरण है जो महिलाओं के जीवन में लगभग 45 से 55 वर्ष की आयु के बीच आता है। इस समय के दौरान, महिलाओं के शरीर में कई शारीरिक और मानसिक बदलाव होते हैं। इनमें से एक मुख्य समस्या है नींद न आना या अनिद्रा। यह समस्या इतनी आम है कि लगभग 60% महिलाएं मेनोपॉज के दौरान या इसके बाद नींद की परेशानी का सामना करती हैं। लेकिन इसके पीछे के कारण क्या हैं? आइए समझें।

हार्मोनल बदलाव
मेनोपॉज के दौरान महिलाओं के शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं, जो नींद के पैटर्न पर गहरा प्रभाव डालते हैं। इस समय, एस्ट्रोजेन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन के स्तर में गिरावट आती है। एस्ट्रोजेन नींद के लिए महत्वपूर्ण होता है क्योंकि यह नींद की गुणवत्ता में सुधार करता है। वहीं, प्रोजेस्टेरोन एक प्राकृतिक निद्राजनक है, जो गहरी नींद लाने में मदद करता है। इन दोनों हार्मोन की कमी से नींद न आने की समस्या बढ़ जाती है।

हॉट फ्लैश और नाइट स्वेट्स
मेनोपॉज का एक और प्रमुख लक्षण है हॉट फ्लैश (गर्माहट का अनुभव) और नाइट स्वेट्स (रात को पसीना आना)। ये लक्षण शरीर के तापमान नियंत्रण में गड़बड़ी के कारण होते हैं, जो थर्मोरेगुलेशन (शरीर का तापमान संतुलित करने की प्रक्रिया) को प्रभावित करते हैं। हॉट फ्लैश या नाइट स्वेट्स के दौरान शरीर के तापमान में अचानक वृद्धि होती है, जिससे नींद टूट जाती है या सोने में परेशानी होती है। यह समस्या रात के समय अधिक गंभीर हो सकती है, जिससे अनिद्रा की स्थिति बनती है।

मानसिक और भावनात्मक तनाव
मेनोपॉज के दौरान मानसिक और भावनात्मक तनाव भी नींद की समस्याओं का एक बड़ा कारण है। इस समय महिलाएं तनाव, चिंता, और अवसाद जैसी मानसिक समस्याओं से भी जूझ सकती हैं। इन भावनात्मक उतार-चढ़ावों का सीधा असर उनके नींद चक्र पर पड़ता है। तनावग्रस्त दिमाग को आराम देना मुश्किल होता है, जिससे नींद टूटने या फिर देर रात तक नींद न आने की समस्या हो सकती है।

मूड स्विंग्स और चिंता
मूड स्विंग्स और चिंता भी मेनोपॉज के दौरान महिलाओं की मानसिक स्थिति को प्रभावित करते हैं। जब मूड में लगातार बदलाव होते हैं, तो इससे शरीर और मस्तिष्क को आराम नहीं मिल पाता। यह नींद में खलल डालने का एक और कारण हो सकता है। चिंता और अवसाद की स्थिति में महिलाओं को जल्दी नींद नहीं आती, और जब आती है तो वह गहरी और संतोषजनक नहीं होती।

अन्य शारीरिक समस्याएं
मेनोपॉज के दौरान होने वाली अन्य शारीरिक समस्याएं भी नींद को प्रभावित कर सकती हैं। इनमें वजन बढ़ना, जोड़ों में दर्द, बार-बार पेशाब आने की समस्या, और दिल की धड़कनों में तेज़ी शामिल हैं। इन शारीरिक समस्याओं के कारण नींद बार-बार टूट जाती है, और पर्याप्त नींद नहीं मिल पाती।

समाधान के उपाय
मेनोपॉज के दौरान नींद की समस्याओं से निपटने के लिए कई तरीके हैं:
 
 
मेनोपॉज के दौरान नींद न आने की समस्या आम है, लेकिन इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। हार्मोनल बदलाव, हॉट फ्लैश, मानसिक तनाव और अन्य शारीरिक समस्याएं इसके प्रमुख कारण हैं। उचित देखभाल, संतुलित जीवनशैली और समय पर उपचार से इस समस्या को दूर किया जा सकता है, जिससे जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाया जा सके।

नींद की समस्याओं से निपटने के उपाय
स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं
मेनोपॉज के दौरान जीवनशैली में कुछ बदलाव आपकी नींद में सुधार कर सकते हैं:

रात का रूटीन बनाएं: सोने और जागने का नियमित समय तय करें। इससे आपके शरीर की आंतरिक घड़ी (बायोलॉजिकल क्लॉक) नियमित होती है।

आरामदायक माहौल बनाएं: आपका सोने का कमरा ठंडा, अंधेरा और शांत होना चाहिए। आरामदायक बिस्तर और कुशन का उपयोग करें।

कैफीन और अल्कोहल से बचें: कैफीन और अल्कोहल नींद को बाधित कर सकते हैं। सोने से कम से कम 4-6 घंटे पहले इन्हें न लें।

योग और ध्यान का अभ्यास करें
योग और ध्यान मानसिक शांति और शारीरिक संतुलन बनाए रखने में मददगार होते हैं। ये न केवल तनाव को कम करते हैं बल्कि शरीर को रिलैक्स करते हैं, जिससे नींद अच्छी आती है।

श्वास अभ्यास (दीप ब्रीदिंग): यह तकनीक तनाव और चिंता को कम करती है, जिससे नींद बेहतर होती है।
प्राणायाम: योग के इस हिस्से में सांसों के नियंत्रित अभ्यास द्वारा शरीर में ऑक्सीजन का संतुलन बनाया जाता है।

हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT)
यदि हार्मोन की कमी से नींद की समस्या हो रही है, तो डॉक्टर की सलाह पर हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी (HRT) पर विचार किया जा सकता है। HRT से शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का स्तर सामान्य हो सकता है, जो नींद में सुधार लाने में सहायक हो सकता है। हालांकि, इसका उपयोग करने से पहले इसके लाभ और साइड इफेक्ट्स पर ध्यान देना जरूरी है।

सप्लीमेंट्स का सेवन
कुछ प्राकृतिक सप्लीमेंट्स और विटामिन नींद में सुधार कर सकते हैं: 
मेलाटोनिन: यह शरीर की नींद-जागने की प्राकृतिक प्रक्रिया को नियंत्रित करने वाला हार्मोन है।
मैग्नीशियम: यह शरीर को रिलैक्स करने में मदद करता है और नींद को गहरा बनाता है।
विटामिन B6 और B12: ये विटामिन मस्तिष्क के कामकाज को बेहतर करते हैं और मूड को स्थिर रखने में मदद करते हैं।

फिटनेस और व्यायाम
नियमित व्यायाम से शरीर में एंडोर्फिन्स बढ़ते हैं, जो मूड को बेहतर बनाते हैं और तनाव को कम करते हैं। हालांकि, ध्यान रखें कि सोने के करीब व्यायाम करने से बचें क्योंकि इससे आपकी ताजगी बढ़ सकती है, जिससे सोने में दिक्कत हो सकती है।

तनाव कम करने की तकनीकें
मेनोपॉज के दौरान तनाव और चिंता को मैनेज करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि तनाव नींद को और प्रभावित कर सकता है। इसके लिए निम्नलिखित तकनीकें कारगर हो सकती हैं:
 

मेनोपॉज के दौरान नींद में आने वाली दिक्कतें जीवनशैली, मानसिक शांति और सही पोषण से प्रबंधित की जा सकती हैं। यदि ये उपाय कारगर न हों, तो डॉक्टर से परामर्श करना ज़रूरी है, क्योंकि यह अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। सही जानकारी और देखभाल से आप मेनोपॉज के इस दौर को आरामदायक बना सकती हैं।
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