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इस एक कारण की वजह से करोड़ों लोग हो सकते हैं बहरेपन के शिकार, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे यह गलती

WD Feature Desk
बुधवार, 26 फ़रवरी 2025 (18:01 IST)
Hearing loss causes: उम्र बढ़ाने के साथ व्यक्ति में सुनाई देने की क्षमता कम होने लगती है। लेकिन चिंता की बात यह है कि अब ये समस्या अब कम उम्र के लोगों यहां तक कि बच्चों को भी अपना शिकार बनाती जा रही है। इस समस्या से जूझ रहे लोगों में 14 साल से कम उम्र के बच्चे भी शामिल हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, भारत की 6.3% आबादी या लगभग 63 मिलियन (6.3 करोड़) लोगों को सुनने साल 2011 की भारतीय जनगणना के अनुसार 19% आबादी को सुनने की दिक्कत थी। यह समस्या लाइफस्टाइल से सीधा संबंध रखती है लिए आज के आलेख में हम आपको बताते हैं कि किस कारण से बढ़ रहा है बहरापन।

दुनियाभर में बढ़ रहा है बहरेपन का खतरा
डब्ल्यूएचओ ने एक रिपोर्ट में खुलासा करते हुए पूरी दुनिया को आगाह करते हुए बताया है कि 12 से 35 वर्ष की आयु वाले एक बिलियन (100 करोड़) से अधिक लोगों में सुनने की क्षमता कम होना या बहरेपन का जोखिम हो सकता है। इसके लिए मुख्यरूप से लंबे समय तक ईयरबड्स से तेज आवाज में संगीत सुनने और शोरगुल वाली जगहों पर रहना एक बड़ा कारण माना जा रहा है।

ईयरबड्स या हेडफोन्स का इस्तेमाल करने वाले लगभग 65 प्रतिशत लोग लगातार 85 (डेसिबल) से ज्यादा तेज आवाज में इसे प्रयोग में लाते हैं। तेज आवाज में ईयरबड्स या हेडफोन्स का इस्तेमाल सुनने संबंधी समस्या के पीछे एक बड़ी वजह है।

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क्या कहता है अध्ययन
50,000 से अधिक लोगों पर किए गए अध्ययनों के आधार पर ये सामने आया कि वीडियो गेम्स के दौरान होने वाली आवाज तय सीमा से कहीं अधिक होती है। सामान्य लोगों के लिए 25-30 डेसीबल ध्वनि को पर्याप्त माना जाता है, जबकि  80-90 डेसीबल ध्वनि श्रवण शक्ति को स्थायी हानि पहुंचाने वाली हो सकती है। विश्लेषण के दौरान पाया गया कि वीडियो गेमिंग के समय अधिकतर लोगों का ध्वनि स्तर 85 और 90 डेसीबल के आसपास रहा, जो कानों की सहनशक्ति से कहीं अधिक है। अध्ययनों से पता चलता है कि यह न केवल मानसिक तनाव और चिंता बढ़ाता है, बल्कि यह कार्यक्षमता को भी प्रभावित करता है। ऐसे लोगों को एकाग्रता, नींद की परेशानी होती है जो उनकी उत्पादकता पर भी गंभीर असर डालती है।

वीडियो गेम और हेड फोन्स की तेज आवाज है खतरनाक
विशेषज्ञों ने कहा, वीडियो गेमिंग और हेड फोन्स की तेज आवाज सुनने की क्षमता में कमी के साथ टिनिटस का भी खतरा बढ़ाती जा रही है।  टिनिटस एक ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति को सिर या कानों के अंदर लगातार किसी किसी प्रकार की ध्वनि सुनाई देती है। यह ध्वनि बजने गूंजने, भनभनाने, फुफकारने या दहाड़ने जैसी हो सकती है।
सुनने की क्षमता में कमी को सिर्फ कानों का समस्याओं तक ही सीमित नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे लोगों में मस्तिष्क से संबंधित बीमारियों जैसे डिमेंशिया का जोखिम दो गुना अधिक हो सकता है। जिन लोगों को बिल्कुल नहीं सुनाई देता था या जो लोग बहरेपन के शिकार थे उनमें डिमेंशिया के खतरे को पांच गुना अधिक पाया गया।

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