Hanuman Chalisa

दीन दयाल जी और एकात्म मानववाद

शिवानन्द द्विवेदी
शिवानंद द्विवेदी
यह वर्ष देश के लिए दीन दयाल जन्म शताब्दी के रूप में मनाने का अवसर है। भारतीय जनता पार्टी इसे गरीब कल्याण वर्ष के रूप में मना रही है। वहीं देश के तमाम विचारशील संगठन इस अवसर पर अनेक व्याख्यानमाला, कार्यक्रम, सेमीनार आदि का आयोजन कर रहे हैं।


इसी क्रम में दीन दयाल शोध संस्थान द्वारा ‘दीन दयाल कथा’ कार्यक्रम का आयोजन देश में चार स्थानों पर करने की योजना बनाई गई है। इसकी शुरुआत मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से होनी है। दीन दयाल उपाध्याय भारतीय जनसंघ के नेता और भारतीय राजनीतिक एवं आर्थिक चिंतन को वैचारिक दिशा देने वाले पुरोधा थे। यह अलग बात है कि उनके बताए सिद्धांतों और नीतियों की चर्चा साम्यवाद और समाजवाद की तुलना में बेहद कम हुई है। वे उस परंपरा के वाहक थे जो नेहरु के भारत नवनिर्माण की बजाए भारत के पुनर्निर्माण की बात करती है।
 
भारत में ज्ञान के प्रसार-प्रचार एवं संचार की प्रणाली के रूप में कथा और उपदेश पद्धति को पुरातन काल से स्वीकार्यता प्राप्त है। भगवद गीता में श्रीकृष्ण ने गीता का ज्ञान उपदेश की पद्धति से दिया तो भगवान बुद्ध ने भी ज्ञान के प्रसार का माध्यम उपदेश को ही बनाया। आज के दौर में जब संचार के विविध माध्यम उपलब्ध हैं और बात को आम लोगों तक पहुंचाने के विविध तरीके भी खोज लिए गए हैं, बावजूद इसके भारत के आम जन के मानसपटल पर ‘उपदेश अथवा कथा’ पद्धति के प्रति जो विश्वास का भाव है, वो अन्य किसी भी पद्धति के प्रति नहीं है। इस लिहाज से अगर देखें तो दीन दयाल शोध संस्थान द्वारा की जा रही यह शुरुआत पूर्णतया भारतीय भावना के अनुरूप है। 16-18 दिसंबर तक भोपाल में चलने वाले इस आयोजन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चैहान सहित तमाम और दिग्गज यजमान की भूमिका में होंगे और पेशे से अधिवक्ता एवं संघ के प्रचारक अलोक कुमार कथावाचक की भूमिका में होंगे। 
 
इस कथा कार्यक्रम के माध्यम से क्या बताया जाएगा, यह तो दो दिवसीय कार्यक्रम में ही पूरी तरह से पता चल जाएगा। लेकिन यह भी गलत नहीं है कि दीन दयाल उपाध्याय के समग्र व्यक्तित्व एवं उनके चिंतन दृष्टि की व्यापकता को दो दिन में समेट पाना आसान नहीं है। उनके विचारों, लेखों, चिंतनशीलता पर वर्षों शोध एवं चर्चा की जा सकती है। एकात्म मानववाद के रूप में पंडित दीन दयाल उपाध्याय जी ने भारत की तत्कालीन राजनीति और समाज को उस दिशा में मुड़ने की सलाह दी है, जो सौ फीसद भारतीय है। एकात्म मानववाद के इस वैचारिक दर्शन का प्रतिपादन पंडित दीन दयाल उपाध्याय ने मुंबई में 22 से 25 अप्रैल 1965 में चार अध्यायों में दिए गए भाषण में किया। इस भाषण में उन्होंने एक मानव के संपूर्ण सृष्टि से संबध पर व्यापक दृष्टिकोण रखने का काम किया था। वे मानव को विभाजित करके देखने के पक्षधर नहीं थे। वे मानवमात्र का हर उस दृष्टि से मूल्यांकन करने की बात करते हैं, जो उसके सम्पूर्ण जीवन काल में छोटी अथवा बड़ी जरूरत के रूप में संबंध रखता है। दुनिया के इतिहास में सिर्फ ‘मानव-मात्र’ के लिए अगर किसी एक विचार दर्शन ने समग्रता में चिंतन प्रस्तुत किया है तो वो एकात्म मानववाद का दर्शन है। 
 
दीन दयाल जी समाजवाद और साम्यवाद को कागजी और अव्यवहारिक सिद्धांत के रूप में देखते थे। उनका स्पष्ट मानना था कि भारतीय परिप्रेक्ष्य में यह विचार न तो भारतीयता के अनुरूप हैं और न ही व्यवहारिक ही हैं। भारत को चलाने के लिए भारतीय दर्शन ही कारगर वैचारिक उपकरण हो सकता है। चाहे राजनीति का प्रश्न हो, चाहे अर्थव्यवस्था का प्रश्न हो अथवा समाज की विविध जरूरतों का प्रश्न हो, उन्होंने मानवमात्र से जुड़े लगभग प्रत्येक प्रश्न की समाधानयुक्त विवेचना अपने वैचारिक लेखों में की है। भारतीय अर्थनीति कैसी हो, इसका स्वरुप क्या हो, इन सारे विषयों को पंडित दीन दयाल उपाध्याय ने ‘भारतीय अर्थनीति विकास की दिशा’ में रखा है। शासन का उद्देश्य अंत्योदय की परिकल्पना के अनुरूप होना चाहिए, इसको लेकर भी उनका रुख स्पष्ट है। 
 
समाजवादी नीतियों से प्रेरित तत्कालीन सरकारों ने व्यापार जैसे काम को भी अपने हाथ में ले लिया, जो कि राज्य के लिए बेहद घातक साबित हो रहा है। पंडित दीन दयाल उपाध्याय इसके खिलाफ थे। उनका स्पष्ट मानना था कि शासन को व्यापार नहीं करना चाहिए और व्यापारी के हाथ में शासन नहीं आना चाहिए। साठ के दशक में जो चिंताएं उन्होंने अपने लेखों के माध्यम से प्रस्तुत की थीं, वो चार दशक के बहुधा समाजवादी नीतियों वाले शासन प्रणाली में समस्या की शक्ल में दिखने लगी है। वे उस दौरान लाइसेंस राज में भ्रष्टाचार की चिंता से शासन को अवगत कराते रहे। आज हमारी व्यवस्था किस कदर भ्रष्टाचार की चपेट में है, यह सभी को पता है। वो विकेंद्रि‍त व्यवस्था के पक्षधर थे। वो तमाम समाजिक क्षेत्रों के राष्ट्रीयकरण के खिलाफ थे, जिनका राष्ट्रीयकरण तत्कालीन कांग्रेस सरकारों द्वारा धड़ल्ले से किया जा रहा था। वे जानते थे कि यह देश मेहनतकश लोगों का है, जो अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए राज्य पर आश्रित कभी नहीं रहे हैं। लेकिन समाजवादी नीतियों से प्रभावित कांग्रेस की सरकारों ने सत्ता की शक्ति का दायरा बढ़ाने की होड़ में समाज की ताकत को राष्ट्रीयकरण के बूते अपने शिकंजे में ले लिया। 
 
शिक्षा जैसी बात, जिसके सरकारीकरण का दीन दयाल जी विरोध किए हैं, उसका भी पूर्णतया सरकारीकरण कर दिया गया। आज सरकारी स्कूलों की हालात क्या है, यह किसी से छिपा नहीं है। शिक्षा देने का काम सरकार के हाथों में जाना बंदर के हाथ में उस्तरा देने जैसा साबित हुआ है। यह काम समाज पर छोड़ा जा सकता था, लेकिन समाजवादी नीतियों के अंधउत्साह ने उनकी एक न सुनी। पंडित दीन दयाल उपाध्याय उन्हीं क्षेत्रों में सरकार को उतरने के लिए बोल रहे थे जिन क्षेत्रों में समाज अथवा निजी क्षेत्र जोखिम नहीं लेते। लेकिन तत्कालीन सरकारों द्वारा इसके प्रतिकूल काम किया गया। आज पचास साल बाद हमारी व्यवस्था समाजवादी नीतियों के चक्रव्यूह में ऐसे उलझ चुकी है कि उसमें से इसे निकालना अथवा निकालने की सोचना भी बेहद कठिन नजर आता है। सरकार आश्रित प्रजा तैयार करने की समाजवादी नीति ने इन सत्तर वर्षों में हमे इतना पंगु बना दिया है कि हम स्वच्छता के लिए भी प्रधानमंत्री पर आश्रित हैं! प्रधानमंत्री मोदी जब स्वच्छता की बात करते हैं तो दरअसल वो इस देश की सात दशक में तैयार समाजवादी नीतियों की व्यवस्था पर एक प्रश्न खड़ा करते हैं। अब क्या हम स्वच्छता के लिए भी सरकार पर निर्भर रहेंगे ? 
 
ऐसे में समाजवाद और साम्यवाद जैसी नीतियां भारत के लिए अव्यवहारिक हैं, यह बात पंडित दीन दयाल जी पचास साल पहले बता गए थे, आज सच साबित हो रही हैं। हम राज्य और सरकार के प्रति दिन-प्रतिदिन इतने आश्रित होते जा रहे हैं कि कल को अपने मुह निवाला डालने के लिए भी हम सरकार से अपेक्षा करेंगे। समाजिक पंगुता के इस खतरे से बचने के लिए हमे दीन दयाल उपाध्याय के चिंतन पर ही लौटना होगा। मानव के कल्याण का वही रास्ता शेष है।
 
लेखक डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन में रिसर्च फेलो है एवं नेशनलिस्ट ऑनलाइन डॉट कॉम में संपादक हैं।
Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

किडनी की सफाई के लिए 3 घरेलू उपाय, डॉक्टर की सलाह से आजमाएं

Summer diet plan: गर्मी से बचने के लिए जानें आयुर्वेदिक पेय और डाइट प्लान

Nautapa and health: नौतपा में ऐसे रखें सेहत का ध्यान, जानें 10 सावधानियां

Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण

cold water: ज्यादा ठंडा पानी पीना सही है या गलत? जानें सच

सभी देखें

नवीनतम

भारतीय नौसेना के लिए जर्मन पनडुब्बियां, जो मुंबई में बनेंगी

भोजशाला: सत्य अतीत, सनातन की न्यायिक जीत

World Telecommunication Day 2026: विश्व दूरसंचार दिवस क्यों मनाया जाता है?

International Family Day: अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस, जानें डिजिटल युग में परिवार के साथ जुड़ाव बनाए रखने के तरीके

किडनी की सफाई के लिए 3 घरेलू उपाय, डॉक्टर की सलाह से आजमाएं

अगला लेख