Hindi Poems 146
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तुम आते हो तो लगता है
महक जाते हैं खिड़की-द्वार, खिल उठती हैं दीवारें। तुम आते हो तो लगता है, मेरा घर बोलता है।।
अपने हिस्से का आसमाँ
यादें : दस कविताएँ
रक्षाबंधन
उन्माद के गर्त में
कली और मधुप
तुम्हारी यात्रा की सीमा नहीं
प्यास का हकदार रहने दे
रातभर मुझको नींद ही आती नहीं
दिल सोचता है...
ज़मीं पे पैर रखो
हमें वीरान इक खंडहर मिला
मेरी ज़िंदगी में सहारा नहीं है
हँसी सा पैकर देखा है !
सारे एक तरफ
एहसास...
भीड़ में कुछ तनहा हूँ...
उस की तस्वीर जल गई होगी
पं. माखनलाल चतुर्वेदी की कालजयी रचनाएँ
कागज की नाव...
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