Dharma Sangrah

हिन्दी कविता : पत्थरों की इबादत

आत्माराम यादव 'पीव'
हे पत्थरों की इबादत करने वालों...
मैं तुम्हें सजीवन नहीं कहता हूं
तुम होंगे सजीव अपने में
पर मैं अजीब नहीं कहता हूं।
 
सदियों से तुमने
जिन पत्थरों पर विश्वास किया
नित पुष्प चढ़ाए और दीप जलाए
जल से उनका श्रृंगार किया
कदमों में उनके दीपक ने
जल-जलकर खुद का नाश किया।
 
हे पत्थरों की इबादत करने वालों...
ये पत्थर क्या जाने मन की चाहें, 
ये पत्थर क्या पहचानें अंतर की दाहें
प्राणों की सुर तानों को
यह पत्थर क्या आभास करेगा?
 
हे पत्थरों की इबादत करने वालों...
क्यों अर्पित करते हो मन की ममता
क्यों अर्पित करते हो तन की क्षमता
तेरी इन दुर्बलताओं का
यह पत्थर क्या आभास करेगा?
 
हे पत्थरों की इबादत करने वालों... 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

क्या आपका फर्स्ट वेलेंटाइन डे है, तो ऐसे करें Valentine Week को सेलिब्रेट

Kiss Day 2026: प्यार जताने के सही मायने और जरूरी सीमाएं

Hug Day 2026: गले लगाने का सही तरीका और ये बड़ी गलतियां न करें

वेलेंटाइन डे पर प्रेरक प्रेम कविता: प्रेम का संकल्प

Valentine Day Essay: वेलेंटाइन डे पर बेहतरीन निबंध हिन्दी में

सभी देखें

नवीनतम

जब दिलेरी पर भारी पड़ी ममता

विकास से विद्या बनने की दर्दभरी दास्‍तां से वॉशिंगटन पोस्‍ट के शटडाउन की आहट तक, गांधी के आश्रम में सार्थक संवाद

Promise Day 2026: वादे कैसे करें और किन बातों से बचना जरूरी है

गुरु समर्थ रामदास नवमी कब है, क्यों मनाई जाती है?

वेलेंटाइन डे के बदलते मायने: 25 साल की शादी के बाद मन रहा अब 'बेलन टाइट डे'

अगला लेख