कविता : हम भी मिट्टी, तुम भी मिट्टी

Webdunia
-विजय शर्मा

 
हम भी मिट्टी, तुम भी मिट्टी, 
मिलगा हर कोई मिट्टी में।
 
फिर भी लगे हुए हैं सब,
चंद सिक्कों की गिनती में।
 
कोई ढूंढ रहा नाम यहां पर,
कोई खोज रहा माल।
 
मगर मिलेंगे सभी एक दिन,
इस प्यारी-सी मिट्टी में।
 
कोई इस मिट्टी के ऊपर जाएगा,
कोई इस मिट्टी के नीचे।
 
जाना सबको ही पड़ेगा,
इक मुट्ठीभर मिट्टी में।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

अपनों का दिन बनाएं मंगलमय, भेजें सुन्दर आध्यात्मिक सुप्रभात् संदेश

रात को शहद में भिगोकर रख दें यह एक चीज, सुबह खाने से मिलेंगे सेहत को अनगिनत फायदे

इम्युनिटी बढ़ाने के साथ दिन भर तरोताजा रखेंगे ये गोल्डन आइस क्यूब, जानिए कैसे तैयार करें

कॉर्टिसोल हार्मोन को दुरुस्त करने के लिए डाईट में शामिल करें ये 4 चीजें, स्ट्रेस को कहें बाय-बाय

क्या प्रोटीन सप्लीमेंट्स लेने से जल्दी आता है बुढ़ापा, जानिए सच्चाई

सभी देखें

नवीनतम

24 मार्च: विश्व टीबी दिवस 2025 की क्या है थीम, जानिए कितनी खतरनाक है ये बीमारी?

कैंसर के इलाज में क्रांति है CAR टी-सेल थेरेपी, जानिए कैसे करती है काम

गुड़ी पड़वा के खास मौके पर अपने दोस्तों और प्रियजनों को भेजें ये सौभाग्य और समृद्धि की कामना वाले संदेश

शीतला सप्तमी-अष्टमी पर बासी खाने का भोग क्यों लगाया जाता है? क्या है इस दिन का आपकी सेहत से कनेक्शन

गुड़ी पड़वा के और भी हैं नाम, जानिए अन्य राज्यों में किन नामों से जाना जाता है यह त्योहार?

अगला लेख