Hanuman Chalisa

हिन्दी कविता : ऋण

राकेशधर द्विवेदी
वैसे तो दोनों का नाम
'श' से प्रारंभ होता था
एक शोषित वर्ग का प्रतिनिधित्व करता था
और दूसरा शोषक वर्ग का।
 
दोनों ने ही ऋण लिया था
एक ने ऋण लिया कि इसलिए
कि बंजर धरती से उगा सके कुछ ज्यादा अन्न
भर सके कुछ लोगों का पेट 
पूरा कर सके पथराई आंखों से देखे गए सपने।
 
तो दूसरे ने लिया ऋण कि पूर्ण कर सके हवाई महत्वाकांक्षा
उन तमाम हसरतों की जो नवाबी थीं। 
और बन सके तमाम दौलत का स्वामी।
 
ऋण न चुका पाने की स्थिति में 
एक ने प्राण त्याग दिया और दूसरे ने राष्ट्र।
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

Summer diet plan: गर्मी से बचने के लिए जानें आयुर्वेदिक पेय और डाइट प्लान

Nautapa 2026: रोहिणी नक्षत्र में सूर्य गोचर 2026: नौतपा के 9 दिनों में क्या करें और क्या न करें?

Nautapa health tips: नौतपा और स्वास्थ्य: बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष सावधानियां

गर्मी में शरीर को रखें ठंडा, रोज करें ये 3 असरदार प्राणायाम; तुरंत मिलेगा सुकून

शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग 'थाइमस', जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, यह क्यों खास है हमारी सेहत के लिए

सभी देखें

नवीनतम

राजकुमार चंदन का उपन्यास- विश्व शांति की अनुगूंज: समुद्र का न्याय

नौतपा की 'आग' उगलती गर्मी से कैसे बचें? ये 5 सावधानियां और 10 गोल्डन रूल्स बदल देंगे आपका समर गेम!

अमेरिका और ईरान युद्ध दोबारा भड़का तो क्या होगा?

बच्चे की मौत से न टूटे किसी मां-बाप का सपना, यह यूपी सरकार का संकल्प

Savarkar Jayanti 2026: वीर सावरकर जयंती: काला पानी की यातनाएं झेलने वाले वीर क्रांतिकारी की गाथा

अगला लेख