Hanuman Chalisa

कविता : हम फिर से आएंगे तेरे शहर को बसाने

राकेशधर द्विवेदी
हम फिर से आएंगे तेरे शहर को बसाने
पर आज तुम न देखो, हमारे पैरों पर पड़े छाले
क्यों आंखें भर आईं हमारी, क्या-क्या हम पर है बीता
यह न पूछो कि क्या है कहानी और क्या है फसाने 
तेरा शहर क्यों है छोड़ा, क्यों हो गए हैं हम रुख़सत
चर्चा करोगे इसकी तो रोने लगेंगे सारे 
तेरे आशियां को सजाने हम फूल बन कर आए 
कभी हमने यह न देखा कितने डाल पर लगे हैं कांटे
तेरा शहर मुस्करा सके इसलिए हम हैं रोए
बन सके तुम्हारा सुंदर आशियां दुःख दर्द हमने काटे
रात को हमने स्वप्न देखा भर पेट खाने का
पर सुबह जब हम जागे तो मुंह से छिन चुके थे निवाले
इस राज को छुपाएं, हम चले जा रहे हैं
हम मुश्किलों से दो-दो हाथ किए जा रहे हैं।

ALSO READ: हिंदी कविता : दरवाजे पर आ जा चिरैया

(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

Hiccups Relief Tips: बार-बार हिचकी क्यों आती है? जानें कारण और आसान उपचार

इलाज आपकी थाली में, ध्यान नहीं दिया तो साइलेंट किलर साबित हो सकता है एनीमिया

घर संभालने वाली महिलाओं को 30 हजार; पर 'हाउस हसबैंड्स' का क्या?

भरपूर लाभ के लिए रोज करें मंडूकासन; जानिए इसे करने का सही तरीका

हिंदी साहित्य में पहेली के रूप में लिखी जाने वाली एक लयात्मक कविता: कह मुकरियां

सभी देखें

नवीनतम

Sant Kabir: अनपढ़ थे कबीर, फिर कैसे डिगा दी बड़े-बड़े पंडितों की गद्दी? सिकंदर लोदी भी टेक चुका था घुटने!

Diabetes Control Tips: बिना दवा के भी कंट्रोल हो सकती है शुगर! आजमाएं ये 10 जादुई और बेहद आसान घरेलू उपाय

World Drug Free Day 2026: विश्व नशा मुक्ति दिवस क्यों मनाना है जरूरी, जानें खास तथ्य

त्रेता से लेकर कलयुग तक कहानी चरण पादुका की

नशे की लत से उबरने के लिए कौनसी थेरेपी और कदम होते हैं सबसे असरदार

अगला लेख