suvichar

कविता: थोड़ी शराब पी है...

शम्भू नाथ
बुधवार, 31 जनवरी 2018 (13:04 IST)
थोड़ी शराब पी है,
समझता नहीं है इतना।
 
आशिकी की क्या सजा है,
सपनों में आज उसने।
 
मेरे गालों पे किसकी है,
लगता है मेरे गम में।
 
थोड़ी शराब पी है,
शर्म मुझको आती।
 
मैं बोल नहीं पाती,
मिलती है आंख जब-जब।
 
मुस्कान छोड़ जाती,
मुझको पता है उसने।
 
तस्वीर मेरी ली है,
लगता है मेरे गम में।
 
थोड़ी शराब पी है,
मम्मी बताती बात है।
 
संस्कारों की,
पापा दिखाते रौब है।
 
ठाठ-बाट के,
मैंने भी उसको प्यार की।
 
निशानी जो भेज दी है,
लगता है मेरे गम में।
 
थोड़ी शराब पी है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

Holi Thandai: ऐसे बनाएं होली पर भांग की ठंडाई, त्योहार का आनंद हो जाएगा दोगुना

Holi Essay: होलाष्टक, होलिका दहन और धुलेंड़ी पर हिन्दी में रोचक निबंध

शक्ति के बिना अधूरे हैं शक्तिमान: नारी शक्ति के 8 स्वर्णिम प्रमाण

हिन्दी कविता : होलिका दहन

होली पर लघुकथा: स्मृति के रंग

सभी देखें

नवीनतम

जमाने का सबसे बड़ा रोग!

मिसाल है माननीयों की दूरदर्शिता

सपने में घर के चौखट से बातचीत

Holi n Bhang: होली पर चढ़ा भांग का नशा कैसे उतारें, पढ़ें 10 लाभकारी टिप्स

Dhulandi 2026: धुलेंडी पर क्या करें और क्या नहीं, जानिए खास बातें

अगला लेख