Hanuman Chalisa

कविता : मोबाइल की विरासत

Webdunia
-सिमरन बालानी
 
कल जैसे ही हाथ में मोबाइल उठाया,
मेरा बेटा दौड़ा-दौड़ा आया।
 
'मां मोबाइल दे दो जरूरी काम है', बोला,
मेरा गुदगुदाता व चहकता मन अचानक डोला।
 
यूं तो कहने को सारी विरासत उसकी,
पर फिर यह मोबाइल की सियासत किसकी?
 
यह कैसा मायावी यंत्र है,
जिसने बड़े-छोटे को कर दिया परतंत्र है।
 
इसे हाथ में लेकर हम क्या मिसालें बनाएंगे,
'मैंने-तूने मोबाइल कितनी देर त्यागा',
क्या यह कहानी आने वाली पीढ़ी को सुनाएंगे।
 
वास्तविक छोड़ काल्पनिक में ढूंढते मौसम की बहार है,
फिर समझते हैं कि उंगलियों पर हमारे अब संसार है।
 
फूलों का महकना, चिड़ियों का चहकना,
मौसम का बहकना आज भी बरकरार है।
आज महसूस किया कि दिशाहीन हमने ही किया बच्चों को,
उनकी नहीं प्रकृति से कोई तकरार है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

क्या थम जाएगा ईरान युद्ध या यह केवल तूफान से पहले की शांति है?

घर पर बनाएं कीवी आइसक्रीम, जानिए इस सुपरफ्रूट के 6 हेल्दी फायदे

आम का रस और कैरी पना, दोनों साथ में पीने से क्या होता है?

क्या गर्मियों में आइसक्रीम खाना बढ़ा सकता है अस्थमा का खतरा?

LPG गैस के बिना शाकाहारी व्यंजन: 10 स्वादिष्ट और सेहतमंद चाट रेसिपी

सभी देखें

नवीनतम

नक्सल मुक्त भारत की सफलता के बाद अब नई चुनौती

Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती पर अपने प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामनाएं और स्टेटस, देखते ही खुश हो जाएगा मन

पुण्यतिथि विशेष: गुरु हरि किशन कौन थे, जानें 'बाल गुरु' का सिख धर्म में योगदान

April Fools Day 2026: आज के दिन झूठ बोलना पाप नहीं, कला है (अप्रैल फूल डे)

ईरान पर भारत का रुख सही

अगला लेख