Hanuman Chalisa

कविता: ओशो का अवतरण, अंतरात्मा का पर्व

सुशील कुमार शर्मा
गुरुवार, 11 दिसंबर 2025 (13:10 IST)
ग्यारह दिसंबर आता है
और हवा में कोई मौन
फिर से बोलने लगता है,
जैसे पृथ्वी के भीतर
कोई पुराना घंटा
ध्यान के लिए बज उठा हो।
 
यह केवल एक जन्मदिन नहीं,
यह उस चेतना का उत्सव है
जो परंपरा के जंगल में
अकेली खड़ी
एक निर्भय मशाल थी।
 
रजनीश और ओशो 
दो नहीं, एक ही श्वास के
दो अलग-अलग नाम,
जब चंद्रोदय जैसा मौन
मनुष्य के भीतर उतर आया।
 
उन्होंने भीड़ से अलग
चलने का साहस सिखाया,
और समझाया कि
अनुयायी होना
सबसे बड़ा अंधकार है।
 
उन्होंने कहा
धर्म किसी ग्रंथ में नहीं,
धर्म तुम्हारी धड़कन में है,
जब तुम बिना भय
अपने होने को स्वीकार करते हो।
 
उनका व्यक्तित्व
किसी आश्रम की दीवारों में नहीं,
एक खुला आकाश था
जिसमें प्रश्नों के बादल
और उत्तरों की बिजली
एक साथ कौंधते थे।
 
वे साधु नहीं थे,
वे विद्रोह की प्रार्थना थे,
एक ऐसा संत
जो आंखों में आग
और हृदय में करुणा
एक साथ लिए चलता था।
 
उनकी वाणी में
न शोर था
न प्रचार,
वह तो
आंतरिक सूखे मैदान में
बरसात की पहली बूंद थी।
 
उन्होंने आदमी को
ईश्वर से पहले
खुद से मिलने को कहा,
और आत्मज्ञान को
मंदिर नहीं,
मौन की गुफा बताया।
 
उनका कृतित्व
पुस्तकों का ढेर नहीं,
जीवित अनुभूतियों का जंगल है,
जहाँ हर पत्ता
एक प्रश्न है
और हर जड़
एक मौन उत्तर।
 
ध्यान, प्रेम, स्वतंत्रता
उनके शब्द नहीं 
उनकी सांसों के
तीन स्थायी सुर थे।
 
आज जब संसार
डिजिटल शोर का
बाज़ार बन गया है,
ओशो की चुप्पी
और भी प्रासंगिक हो उठती है।
 
आज जब आदमी
भीड़ में खोकर
खुद को भूल बैठा है,
उनका स्वर
भीतर से
पुकारता है
जागो।
 
वर्तमान में
वे इसलिए जरूरी हैं,
क्योंकि आदमी
अब भी मशीन
बनता जा रहा है
और मानव होना
सबसे कठिन साधना बन गई है।
 
और भविष्य
भविष्य में
ओशो और भी अधिक
समय से बड़े होकर उभरेंगे,
क्योंकि जब-जब
सभ्यता थकती है,
तभी किसी मौन का
जन्म होता है।
 
आने वाली पीढ़ियां
उनकी तस्वीर नहीं,
उनकी दृष्टि पढ़ेंगी,
उनका नाम नहीं,
उनका अनुभव खोजेंगी।
 
ग्यारह दिसंबर, 
कैलेंडर की तारीख नहीं,
अंतरात्मा का पर्व है
जहां भीतर
एक मौन जन्म लेता है,
और आदमी
फिर से आदमी बनता है।
 
आज उनके जन्मदिन पर
कोई दीप नहीं जलता,
कोई पुष्प नहीं चढ़ता,
बस भीतर
एक प्रश्न
शांत होकर बैठ जाता है
 
मैं कौन हूं?
 
और यही प्रश्न
ओशो की सबसे
जीवित उपस्थिति है।
 
(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है।)ALSO READ: ओशो: रजनीश से बुद्धत्व तक, एक असाधारण सद्गुरु की शाश्वत प्रासंगिकता

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

किडनी की सफाई के लिए 3 घरेलू उपाय, डॉक्टर की सलाह से आजमाएं

Summer diet plan: गर्मी से बचने के लिए जानें आयुर्वेदिक पेय और डाइट प्लान

Nautapa and health: नौतपा में ऐसे रखें सेहत का ध्यान, जानें 10 सावधानियां

Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण

cold water: ज्यादा ठंडा पानी पीना सही है या गलत? जानें सच

सभी देखें

नवीनतम

summer cooling tips: नौतपा में आग उगलेगी धरती, जानें Nautapa में घर पर राहत पाने के 7 घरेलू तरीके

गंगा दशहरा जल के प्रति कृतज्ञता का पर्व

Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण

Nautapa 2026: 25 मई से नौतपा: भीषण गर्मी के दिन, जानें महत्व, पर्यावरण और सेहत पर प्रभाव

बाल कविता: टप्पा टप्पा टुन टुन

अगला लेख