कविता : हिन्दी का जो मान हुआ

डॉ मधु त्रिवेदी
हिन्दी का जो मान हुआ है 
हर मुख से जब गान हुआ है
 
विश्व गुरू यह कहलाती है
बालक भाषा भान हुआ है
 
हिन्दी में गूंजी किलकारी 
घर नन्हा मेहमान हुआ है
 
संस्कृत जननी है कहलाती 
जन बोली का प्रान हुआ है
 
अम्मा पप्पा बोले बच्चा
नादां पर सबके कान हुआ
 
जीवन दायिनी रही हिन्दी
इसमें मां उर पान हुआ है
 
हिन्दुस्तान की माटी पलता
खेल कूद शैतान हुआ है
 
अजान अबोध औ चंचल 
बालरूप भगवान हुआ है
 
हिन्दुस्तान की माटी पलता
खेल कूद शैतान हुआ है
 
जीवन बीता हिन्दी मे ही 
संविधान न सम्मान हुआ है
 
हिन्दी हूं माथे बिन्दी हूं 
देश तभी कप्तान हुआ है

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

अपनों का दिन बनाएं मंगलमय, भेजें सुन्दर आध्यात्मिक सुप्रभात् संदेश

रात को शहद में भिगोकर रख दें यह एक चीज, सुबह खाने से मिलेंगे सेहत को अनगिनत फायदे

इम्युनिटी बढ़ाने के साथ दिन भर तरोताजा रखेंगे ये गोल्डन आइस क्यूब, जानिए कैसे तैयार करें

कॉर्टिसोल हार्मोन को दुरुस्त करने के लिए डाईट में शामिल करें ये 4 चीजें, स्ट्रेस को कहें बाय-बाय

क्या प्रोटीन सप्लीमेंट्स लेने से जल्दी आता है बुढ़ापा, जानिए सच्चाई

सभी देखें

नवीनतम

ईद उल-फ़ित्र पर क्या-क्या बनाएं, जानें ईद उल फितर के पकवानों की सूची

ईद के इस चांद की तरह दमकता रहे आपका हर दिन, रब से बस यही दुआ मांगते हैं ईद के दिन... खास अंदाज में कहें ईद मुबारक

तिब्बत को लेकर पंडित नेहरू की गलतियां और 1962 में चीन का भारत पर हमला

बैठते या खड़े होते समय चटकती हैं पैरों की हड्डियां? जानिए इसके 5 बड़े कारण

सुबह उठते ही लगती है तेज भूख? जानिए इसके 5 चौंकाने वाले कारण और राहत के उपाय

अगला लेख