Hanuman Chalisa

कविता : इंसान की तरह जीता हूँ

Webdunia
-डॉ. रूपेश जैन "राहत"
 
हालात के मारे हार जाता हूँ, कई बार 
फिर भी खड़ा हो जाता हूँ, हर बार, बार बार 
इंसान हूँ, इंसान की तरह जीता हूँ
टूटा हुआ पत्थर नहीं, जो फिर ना जुड़ पाऊँगा।
 
 
तेज धूप के बाद, ढलती हुई साँझ 
आती जाती देख रहा बरसों से 
इसी लिए चुन लेता हूँ हर बार नये
नहीं होता निराश टूटे सपनो से।
क्या हुआ जो पत-झड़ में 
तिनके सारे बिखर गये
चुन चुनके तिनके हर बार 
नीड नया बनाऊँगा।
 
इंसान हूँ, इंसान की तरह जीता हूँ
टूटा हुआ पत्थर नहीं, जो फिर ना जुड़ पाऊँगा।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

क्या थम जाएगा ईरान युद्ध या यह केवल तूफान से पहले की शांति है?

घर पर बनाएं कीवी आइसक्रीम, जानिए इस सुपरफ्रूट के 6 हेल्दी फायदे

आम का रस और कैरी पना, दोनों साथ में पीने से क्या होता है?

क्या गर्मियों में आइसक्रीम खाना बढ़ा सकता है अस्थमा का खतरा?

LPG गैस के बिना शाकाहारी व्यंजन: 10 स्वादिष्ट और सेहतमंद चाट रेसिपी

सभी देखें

नवीनतम

नक्सल मुक्त भारत की सफलता के बाद अब नई चुनौती

Hanuman Jayanti 2026: हनुमान जयंती पर अपने प्रियजनों को भेजें ये खास शुभकामनाएं और स्टेटस, देखते ही खुश हो जाएगा मन

पुण्यतिथि विशेष: गुरु हरि किशन कौन थे, जानें 'बाल गुरु' का सिख धर्म में योगदान

April Fools Day 2026: आज के दिन झूठ बोलना पाप नहीं, कला है (अप्रैल फूल डे)

ईरान पर भारत का रुख सही

अगला लेख