Dharma Sangrah

हिन्दी कविता : जिंदगी पेन है

Webdunia
- अभिषेक कुमार अम्बर

जिंदगी पेन है
उसके रिफिल हो तुम
पेन की पाई जाती हैं किस्में बहुत
कोई मोंटेक्स है कोई पॉयलेट है
पेन महंगे हैं जो उनकी इक ख़ासियत
मन करें जब आप रिफिल बदल सकते हो
लेकिन मैं पेन हूं 3 रुपए वाला 
जिसमें ऐसी कोई ख़ासियत तो नहीं
इक कमी है मगर 
ये टूट जाएगा पर रिफिल बदलता नहीं।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

गर्मियों में आइस एप्पल खाने के फायदे, जानें क्यों कहलाता है सुपरफ्रूट

आम का रस और कैरी पना, दोनों साथ में पीने से क्या होता है?

गर्मी के दिनों में फैशन में हैं यह कपड़े, आप भी ट्राय करना ना भूलें

क्या गर्मियों में आइसक्रीम खाना बढ़ा सकता है अस्थमा का खतरा?

कैंसर शरीर में कैसे फैलता है? जर्मन रिसर्च टीम ने किया नया खुलासा

सभी देखें

नवीनतम

सृष्टि का आनंद बनाम आनंद की सृष्टि!

23 मार्च शहीदी दिवस: इंकलाब के तीन सूरज: जब फांसी के फंदे भी चूम लिए गए

भारतीय न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. वरुण जर्मन पुरस्कार से सम्मानित

चहक रहा है चूल्हा

परिंदे नहीं जानते कि उनकी मौत किसी सरकारी फाइल में दर्ज नहीं होगी

अगला लेख