Dharma Sangrah

वर्षा पर कविता : मेघों पर कविता

Webdunia
- पुरुषोत्तम व्यास

चलो-चलो कवि
लिखों मेघों पर कविता
 
बरसेंगे आंगन-आंगन
हरा-भरा ह्दय होगा
हरा-भरा धरा का पटल होगा..
 
झूमेगा-झरना
पर्वत-मालाओं से
सरिता संग इतराएगा...
 
समीर बहेगी मनभावन 
नौका भी डगमग डोलेगी
पखों की फड़-फड़ाहट
उपवन-उपवन बूदें-गूंजेंगी..
 
चलो-चलो कवि
लिखों मेघों पर कविता। 

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