कांधे पर टंगा बस्ता चॉकलेट की बचपनी चाहत। और फिर बांबियों-झाड़ियों में से निकलते वे सांप, भेड़िये और लकड़बग्घे मासूम गले पर खूनी पंजे देह की कुत्सित भूख में बजबजाते, लिजलिजाते कीड़े कर देते हैं उसके जिस्म को तार-तार। एक अहसास चीखकर आर्तनाद में बदलता है और वह...