Vasant Panchami Poem सरस्वती वंदना- शुभ्र वस्त्रे हंसवाहिनी - प्रो. सीबी श्रीवास्तव विदग्ध शुभ्र वस्त्रे हंसवाहिनी वीणावादिनी शारदे, डूबते संसार को अवलंब दे आधार दे! हो रही घर-घर निरंतर आज धन की साधना स्वार्थ के चंदन अगरु से अर्चना-आराधना आत्मवंचित मन सशंकित विश्व बहुत उदास है, चेतना जग...