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कैवल्य ज्ञान क्या है? जानें इसका सही अर्थ और इसे प्राप्त करने के प्रभावी तरीके

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Mahavir Swami, kevalya gyan kya hai
kevalya gyan kya hai: भगवान महावीर को वैशाख शुक्ल दशमी के दिन बिहार के जंभियग्राम के पास ज्ञान प्राप्त हुआ था। जैन धर्म के अनुसार, कैवल्य ज्ञान प्राप्ति के बाद महावीर स्वामी 'केवली' कहलाए। उन्होंने बताया कि हर आत्मा में परमात्मा बनने की शक्ति है, बस उसे कर्मों के आवरण को हटाना होगा।

कैवल्य ज्ञान का क्या होता है अर्थ?

  • यह शब्द संस्कृत के केवला से लिया गया है, जिसका अर्थ है अकेला या पृथक।
  • यह प्रकृति (प्रारंभिक पदार्थ) से पुरुष (आत्म या आत्मा) का पृथक होना है।
  • यह मन, शरीर और इंद्रियों से अलग होकर अपना अस्तित्व कायम करना है। यह वैराग्य और स्वतंत्रता है।
  • हिन्दू धर्म में कैवल्य ज्ञान को स्थित प्रज्ञ, प्रज्ञा कहते हैं। 
  • यह मोक्ष या समाधि की एक अवस्था होती है। 
  • समाधि समयातित है जिसे मोक्ष कहा जाता है।
  • इस मोक्ष को ही जैन धर्म में कैवल्य ज्ञान और बौद्ध धर्म में संबोधी एवं निर्वाण कहा गया है। 
  • योग में इसे समाधि कहा गया है। इसके कई स्तर होते हैं। इसे मन के पार अमनी दशा कहते हैं।
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कैवल्य ज्ञान कैसे प्राप्त होता है?

  • भगवान महावीर ने 12 साल तक मौन तपस्या तथा गहन ध्‍यान किया। अन्त में उन्हें 'कैवल्य ज्ञान' प्राप्त हुआ। 
  • तपस्या, योगाभ्यास और अनुशासन करके इस अवस्था को प्राप्त किया जा सकता है। 
  • श्वासों पर‍ निरंतर ध्यान देने से साधन कैवल्य के मार्ग पर चलने लगता है।
  • निर्विचार हो जाने से कैवल्य ज्ञान का मार्ग खुल जाता है। इसके लिए निरंतर अभ्यास करते रहना होता है।
 
जो इस अवस्था को प्राप्त कर लेता है उसे केवलिन कहा जाता है। कैवल्य आत्मज्ञान का अंतिम चरण है जिसे मोक्ष या निर्वाण भी कहा जाता है। दुनिया में सब कुछ आसानी से मिल सकता है, लेकिन खुद को पाना आसान नहीं। खुद को पाने का मतलब है कि सभी तरह के बंधनों से मुक्ति। कैवल्य ज्ञान प्राप्त होने के बाद भगवान महावीर ने जनकल्याण के लिए शिक्षा देना शुरू की। अर्धमगधी भाषा में वे प्रवचन करने लगे, क्योंकि उस काल में आम जनता की यही भाषा थी।

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