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Bhai dooj: चित्रगुप्त पूजा आज, पढ़ें भाई दूज से जुड़ी यम और यमि की पौराणिक कथा

WD Feature Desk
bhai dooj 
 

Bhai dooj 2024 date : गोवर्धन पूजा के अगले दिन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यम द्वितीया और भाई दूज का त्योहार मनाया जाता है। इस वर्ष 03 नवंबर 2024, दिन रविवार को भाई दूज मनाई जाएगी। आइए जानते हैं यहां इस दिन क्या करें- 
 
1. इस दिन यमराज और यमुना की पूजा की जाती है। इस दिन यम के निमित्त दीपदान करने से व्यक्ति अकाल मृत्यु से बच जाता है।
 
2. भाई दूज के दिन बहनें अपने भाई को अपने घर बुलाकर उसे तिलक लगाकर उसकी आरती उतारकर उसे भोजन खिलाती है।
 
3. भाई दूज पर भाई को भोजन के बाद भाई को पान खिलाने का ज्यादा महत्व माना जाता है। मान्यता है कि पान भेंट करने से बहनों का सौभाग्य अखण्ड रहता है।
 
4. कहते हैं कि इस दिन जो भाई-बहन इस रस्म को निभाकर यमुनाजी में स्नान करते हैं, उनको यमराजजी यमलोक की यातना नहीं देते हैं। इस दिन मृत्यु के देवता यमराज और उनकी बहन यमुना का पूजन किया जाता है।  
 
5. इस दिन भगवान चित्रगुप्त की पूजा का भी प्रचलन है। कहते हैं कि इसी दिन से चित्रगुप्त लिखते हैं लोगों के जीवन का बहीखाता। 
 
6. वणिक वर्ग के लिए यह नवीन वर्ष का प्रारंभिक दिन कहलाता है। इस दिन नवीन बहियों पर 'श्री' लिखकर कार्य प्रारंभ किया जाता है।
 
7. चित्रगुप्त की पूजा के साथ-साथ लेखनी, दवात तथा पुस्तकों की भी पूजा भी की जाती है।
 
8. भाईदूज पर यम और यमुना की कथा सुनने का प्रचलन है।

Bhai dooj katha
 
भाई दूज की कथा: bhai dooj ki katha
 
भाई दूज की पौराणिक कथा के अनुसार इस दिन यमुना अपने भाई भगवान यमराज को अपने घर आमंत्रित करके उन्हें तिलक लगाकर अपने हाथ से स्वादिष्ट भोजन कराती है। जिससे यमराज बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने अपनी बहन यमुना से वरदान मांगने को कहा। ALSO READ: Bhai Dooj 2024: भाई दूज कब है, जानिए तिलक लगाने का शुभ मुहूर्त
 
इस पर यमुना ने अपने भाई यम से कहा कि आज के दिन जो बहनें अपने भाई को निमंत्रित कर अपने घर बुलाकर उन्हें भोजन कराएंगी और उनके माथे पर तिलक लगाएंगी तो उन्हें यम का भय ना हो। 
 
यमरान ने ऐसा सुनकर कहा, तथास्तु। तभी से कार्तिक मास की शुक्ल द्वितीया को बहनों द्वारा अपने भाई को भोजन कराकर तिलक लगाया जाता है। 
 
कहा जाता है कि नरकासुर का वध करने के बाद भगवान श्री कृष्ण अपनी बहन सुभद्रा से मिलने इसी दिन उनके घर पहुंचे थे। सुभद्रा ने उनका स्वागत करके अपने हाथों से उन्हें भोजन कराकर तिलक लगाया था।

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