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भारत के 'ब्रह्मबिंदु' करोंदी में वास्‍तु विशेषज्ञों का शोध, क्‍यों अहम है ब्रह्मबिंदु की उर्जा, PMO को सौंपेंगे रिपोर्ट

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Vastu
सनातन धर्म की प्राचीन ऋषियों वाली दृष्टि और आधुनिक विज्ञान के संगम से भारत के 'हृदय स्थल' में एक नया इतिहास रचा गया है। मध्यप्रदेश के कटनी जिले में स्थित करोंदी गांव, जिसे भारत सरकार ने देश का भौगोलिक मध्य बिंदु (Center Point) घोषित किया है।

वास्तु विशेषज्ञ और लेखक डॉ. अवनीश जैन ने देश के अन्‍य वास्‍तु विशेषज्ञों के साथ एक शोध संपन्न किया। भारतीय वास्तु महासंघ और 'फाइव स्टार वास्तु ग्रुप' के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस यात्रा का उद्देश्य भारत की आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक परिस्थितियों को वास्तु सिद्धांतों के माध्यम से विश्व पटल पर 'सिरमौर' बनाना है।

कर्क रेखा पर स्थित केंद्र बिंदु का महत्व : विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की गोद में और कर्क रेखा पर स्थित करोंदी केवल एक भौगोलिक स्थान नहीं, बल्कि वास्तु की दृष्टि से पूरे राष्ट्र का 'ब्रह्मस्थान' है। डॉ. अवनीश जैन ने बताया कि वैदिक वास्तु के प्राचीन ग्रंथों के अनुसार, किसी भी भूखंड या राष्ट्र का केंद्र बिंदु अत्यंत संवेदनशील होता है। यहीं से प्राण-ऊर्जा का संचार सर्वत्र होता है। यदि केंद्र बिंदु की ऊर्जा को संतुलित और संवर्धित कर दिया जाए, तो उसका सकारात्मक प्रभाव पूरे देश की प्रगति पर पड़ता है। इसी वैज्ञानिक सत्य को प्रमाणित करने के लिए डॉ. जैन और देश के 16 प्रख्यात वास्तुविदों ने इस स्थल को चुना।

ऊर्जा का वैज्ञानिक विश्लेषण : इस तीन दिवसीय अभियान में परंपरा और तकनीक का अनूठा मेल देखने को मिला। विशेष शोध के साथ विशेषज्ञों के दल ने स्थल की ऊर्जा संरचना और भू-चुंबकीय प्रभाव का सूक्ष्म परीक्षण किया। परीक्षण के लिए जिओपैथिक स्ट्रेस फाइंडर, ओरा स्कैनर, क्वांटम एनर्जी स्कैनर, डाउजिंग, इलेक्ट्रो स्मॉग फाउंडर, एल-रॉड्स और शंकु स्थापना जैसे उन्नत उपकरणों का उपयोग किया गया।

वास्तु अनुष्ठान से ऊर्जा में 10 गुना वृद्धि : शोध यात्रा के दौरान राष्ट्रगान के पश्चात ध्वजारोहण और शंकुस्थापन किया गया। गया के प्रख्यात विद्वान पंडित उपेंद्र कुमार द्वारा पूर्ण विधि-विधान से वास्तु पदमंडल की स्थापना की गई और 45 देवताओं का आह्वान किया गया। इस आध्यात्मिक प्रक्रिया के परिणाम चौंकाने वाले रहे। टीम ने उपकरणों के माध्यम से दर्ज किया कि अनुष्ठान के पश्चात उस स्थल के ऊर्जा क्षेत्र (Energy Field) में 10 गुना वृद्धि हुई। यह इस बात का प्रमाण है कि प्राचीन भारतीय पद्धतियां आज भी वैज्ञानिक रूप से उतनी ही प्रभावी हैं। इस अवसर पर डॉ. जैन का विशेष सम्मान भी किया गया।

PMO को सौंपी जाएगी शोध रिपोर्ट: तीन दिनों के गहन चिंतन और डेटा विश्लेषण के बाद विशेषज्ञों ने पाया कि करोंदी की प्राकृतिक ऊर्जा संरचना मूल रूप से बहुत शक्तिशाली और संतुलित है। हालांकि, कुछ सूक्ष्म वास्तु सुधारों और ऊर्जा प्रबंधन के माध्यम से इसे और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। विशेषज्ञों द्वारा तैयार की गई इस विस्तृत रिपोर्ट में स्थल के संरक्षण, वहां की ऊर्जा वृद्धि के उपाय और दीर्घकालिक विकास के सुझाव शामिल हैं। यह रिपोर्ट शीघ्र ही संबंधित सरकारी विभागों और प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को प्रेषित की जाएगी। इस पहल का उद्देश्य केवल एक गांव का विकास नहीं, बल्कि इस केंद्र बिंदु को ऊर्जावान बनाकर राष्ट्र की समृद्धि का मार्ग आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक रुप से प्रशस्त करना है।

इस ऐतिहासिक आयोजन में स्थानीय सरपंच अनीता कोरी और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे। विद्वानों का मत है कि भारत की प्राचीन वास्तु परंपरा केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भूमि, दिशा और ब्रह्मांडीय ऊर्जा के संतुलन का विज्ञान है। करोंदी में संपन्न यह शोध भारतीय वास्तु परंपरा को वैश्विक स्तर पर एक नई वैज्ञानिक पहचान दिलाएगा और भविष्य में अन्य महत्वपूर्ण भू-स्थलों के अध्ययन के लिए एक मानक (Benchmark) स्थापित करेगा।

इस दौरान पुस्तक 'वास्तु चालीसा' का भव्य विमोचन भी किया गया। यह पुस्तक मात्र 40 सूत्रों में संपूर्ण वास्तु शास्त्र के सार को आम जनमानस के लिए सरल भाषा में प्रस्तुत करती है। विशेषज्ञ दल में डॉ. अवनीश जैन के साथ ईं. आचार्य अखिलेश जैन, रमणलाल पटेल, पं उपेंद्र कुमार, अनिल झांब, अविनाश मग्गिरवार, डॉ शालिनी गुगनानी, शिवरामदास और डॉ. रवि सिंघवी सहित देश के विभिन्न प्रांतों से आए 16 विद्वान सम्मिलित रहे।
Edited By: Naveen R Rangiyal

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