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हर मनोकामना के लिए भगवान श्रीकृष्ण के 7 असरकारी दिव्य मंत्र

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भगवान श्रीकृष्ण श्री विष्णु के आठवें अवतार हैं। सोलह कलाओं से परिपूर्ण दिव्यतम अवतार है मुरलीधर कान्हा। भारतीय जनमानस को हर रंग में रंगे उत्सवप्रिय श्रीकृष्ण हर अवतार से ज्यादा प्रिय लगते हैं। कृष्ण यानी जो आकर्षित करें, आकृष्ट करें। सही मायनों में श्रीकृष्ण  जनमानस को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। प्रस्तुत हैं हर मनोकामना के लिए भगवान श्रीकृष्ण के 7 असरकारी अचूक मंत्र.... 
   
 
 

यह स्वयं भगवान श्रीकृष्ण द्वारा बताया गया मूलमंत्र है। इसके प्रयोग से रुका हुआ धन प्राप्त होता है। इसके अलावा इस मूलमंत्र का जाप करने से घर-परिवार में सुख की वर्षा होती है।
 
 

यह श्रीकृष्ण का सप्तदशाक्षर महामंत्र है। अन्य मंत्र शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार 108 बार जाप करने से ही सिद्ध हो जाते हैं लेकिन इस महामंत्र का पांच लाख जाप करने से ही सिद्ध होता है। इससे अटके काम पूरे होते हैं।

 
 

ये केवल दो शब्द दिखाई देते हैं लेकिन धार्मिक संदर्भ से देखें तो इन शब्दों को बनाने के लिए प्रयोग में आए सात अक्षर बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि उच्चारण के समय एक भी अक्षर सही से नहीं पढ़ा जाए, तो इस मंत्र का असर खत्म हो जाता है।
 
 

इस आठ अक्षरों वाले श्रीकृष्ण मंत्र का जो भी साधक जाप करता है उसकी सभी इच्छाएं व अभिलाषाएं पूर्ण होती हैं। आर्थिक, आत्मिक और भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है।
 
 

इस मंत्र का प्रयोग साधक आर्थिक स्थिति में सुधार की कामना से करते हैं। यह संपूर्ण सिद्धि देना वाला मंत्र है। यह मंत्र आर्थिक स्थिति में सुधार ही नहीं करता बल्कि उसे आश्चर्यजनक रूप से दृढ़ भी बनाता है।
 
 

यह ऐसा मंत्र है जो विवाह से जुड़ा है। जो जातक प्रेम विवाह करना चाहते हैं लेकिन किन्हीं कारणों से हो नहीं रहा तो वे प्रात: काल में स्नान के बाद ध्यानपूर्वक इस मंत्र का 108 बार जाप करें।
 
 

यह मंत्र उच्चारण में थोड़ा कठिन जरूर है लेकिन इसका प्रभाव अचूक है। यह मंत्र वाणी का वरदान देता है।


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