बाल साहित्य : झांसी की रानी...

Webdunia
- सत्या शुक्ला

झांसी की वीरांगना के प्रति श्रद्धासुमन...


 
रानी थी वह झांसी की, 
पर भारत जननी कहलाई।
 
स्वातंत्र्य वीर आराध्य बनी,
वह भारत माता कहलाई॥
 
मन में अंकुर आजादी का,
शैशव से ही था जमा हुआ।
 
यौवन में वह प्रस्फुटित हुआ, 
भारत भू पर वट वृक्ष बना॥
 
अंग्रेजों की उस हड़प नीति का, 
बुझदिल उत्तर ना दे पाए।
 
तब राज महीषी ने डटकर,
उन लोगों के दिल दहलाए॥
 
वह दुर्गा बनकर कूद पड़ी,
झांसी का दुर्ग छावनी बना।
 
छक्के छूटे अंग्रेजों के,
जन जागृति का तब बिगुल बजा॥
 
संधि सहायक का बंधन,
राजाओं को था जकड़ गया।
 
नाचीज बने बैठे थे वे,
रानी को कुछ संबल न मिला॥
 
कमनीय युवा तब अश्व लिए,
कालपी भूमि पर कूद पड़ी।
 
रानी थी एक वे थे अनेक,
वह वीर प्रसू में समा गई॥
 
दुर्दिन बनकर आए थे वे,
भारत भू को वे कुचल गए।
 
तुमने हमको अवदान दिया,
वह सबक सीखकर चले गए॥
 
है हमें आज गरिमा गौरव,
तुम देशभक्ति में लीन हुई।
 
जो पंथ बनाया था तुमने,
हम उस पर ही आरूढ़ हुए॥
 
हे देवी! हम सभी आज,
आकुल हैं नत मस्तक हैं।
 
व्यक्तित्व तुम्हारा दिग्दर्शक,
पथ पर बढ़ने को आतुर हैं॥

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

अपनों का दिन बनाएं मंगलमय, भेजें सुन्दर आध्यात्मिक सुप्रभात् संदेश

रात को शहद में भिगोकर रख दें यह एक चीज, सुबह खाने से मिलेंगे सेहत को अनगिनत फायदे

इम्युनिटी बढ़ाने के साथ दिन भर तरोताजा रखेंगे ये गोल्डन आइस क्यूब, जानिए कैसे तैयार करें

कॉर्टिसोल हार्मोन को दुरुस्त करने के लिए डाईट में शामिल करें ये 4 चीजें, स्ट्रेस को कहें बाय-बाय

क्या प्रोटीन सप्लीमेंट्स लेने से जल्दी आता है बुढ़ापा, जानिए सच्चाई

सभी देखें

नवीनतम

23 मार्च भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु का शहीदी दिवस

वेंटिलेटर पर रिफिल

विश्व मौसम विज्ञान दिवस कब और क्यों मनाया जाता है? जानें इस वर्ष की थीम

कवि विनोद कुमार शुक्ल, ज्ञानपीठ सम्मान की खबर और उनसे मिलने की एक चाह

हर मौसम में काम आएंगे पानी के संकट से बचने के ये 10 तरीके

अगला लेख