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फनी बाल कविता : तरबूज

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अगर बनना चाहो मजबूत। 
यारों खूब खाओ तरबूज॥ 


 
गर्मी का दुश्मन है ये, 
पानी का सागर है ये। 
 
लाल-लाल ललाई उसकी, 
प्रेम-प्यार की गागर है ये॥ 
 
देवों में है ये अवधूत।
यारों....

 
खनिजों का भंडार है ये, 
विटामिनों का आगार है ये। 
 
ठंडा करके खाओ तो, 
अपनी माँ का प्यार है ये॥ 
 
मौसम का है ये सपूत।
यारों.... 

 
- परमानंद शर्मा 'अमन' 
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