बालगीत : ई-मेल से धूप

प्रभुदयाल श्रीवास्तव
हमें बताओ कैसे भागे,
आप रात की जेल से।
सूरज चाचा ये तो बोलो,
आए हो किस रेल से।
 
हमें पता है रात आपकी, 
बीती आपाधापी में।
दबे पड़े थे कहीं बीच में,
अंधियारे की कॉपी में।
 
अश्व आपके कैसे छूटे?
तम की कसी नकेल से।
पूरब की खिड़की का पर्दा,
रोज खोलकर आ जाते।
 
किंतु शाम की रेल पकड़कर,
बिना टिकट वापस जाते।
लगता है थक जाते दिन की, 
धमा-चौकड़ी खेल से।
 
रोज-रोज की भागादौड़ी,
तुम्हें ऊबा देती चाचा।
शायद इसी चिड़चिड़ेपन से,
गरमी में खोते आपा।
 
कड़क धूप हम तक भिजवाते,
गुस्से में ई-मेल से।
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

होली विशेष भांग की ठंडाई कैसे बनाएं, अभी नोट कर लें यह रेसिपी

महिलाओं के लिए टॉनिक से कम नहीं है हनुमान फल, जानिए इसके सेवन के लाभ

चुकंदर वाली छाछ पीने से सेहत को मिलते हैं ये अद्भुत फायदे, जानिए कैसे बनती है ये स्वादिष्ट छाछ

मुलेठी चबाने से शरीर को मिलते हैं ये 3 गजब के फायदे, जानकर रह जाएंगे दंग

वास्‍तु के संग, रंगों की भूमिका हमारे जीवन में

सभी देखें

नवीनतम

क्या है होली और भगोरिया उत्सव से ताड़ी का कनेक्शन? क्या सच में ताड़ी पीने से होता है नशा?

पुण्यतिथि विशेष: सावित्रीबाई फुले कौन थीं, जानें उनका योगदान

Womens Day: पुरुषों की आत्‍महत्‍याओं के बीच महिलाएं हर वक्‍त अपनी आजादी की बात नहीं कर सकतीं

होली पर कविता : मक्खी मच्छर की होली

यूक्रेन, यूरोप एवं ट्रंप

अगला लेख