चुनावों से परेशान सोने के तस्कर

बुधवार, 17 अप्रैल 2019 (10:43 IST)
भारतीय चुनाव में अब तक 36.5 करोड़ रुपये की नगदी, शराब, सोना और ड्रग्स पकड़े चुके हैं। हर साल सैकड़ों टन सोना पार कराने वाले चुनाव बीतने का इंतजार कर रहे हैं।
 
 
भारत में सोने की अवैध तस्करी करने वाले अचानक ठंडे पड़ गए हैं। मार्च में मुंबई में रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने 107 किलोग्राम सोना पकड़ा। करीब 30 करोड़ रुपये का सोना जब्त होने की खबर काले बाजार में तेजी से फैली। तस्करों ने कारोबार कुछ समय के लिए ठंडा कर दिया। भारत में चुनावों के दौरान तस्करी आम तौर पर बढ़ जाती है। राजनीतिक पार्टियां और उनके समर्थक वोटरों को लुभाने के लिए पैसे, शराब और तोहफे इस्तेमाल करते हैं।
 
 
लेकिन चुनाव आयोग द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों पर चेकपोस्ट बनाने की वजह से सोना, शराब और कैश आसानी से इधर उधर नहीं हो पा रहे हैं। 14 अप्रैल 2019 तक ही चुनाव आयोग 36।5 करोड़ रुपये का माल जब्त कर चुका है। 2014 में पांच चरणों वाले लोकसभा चुनावों के दौरान कुल 17.2 करोड़ रुपये का माल बरामद किया गया था।
 
 
मुंबई में एक निजी बैंक के गोल्ड ट्रेडिंग के वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, वाहनों की औचक चेकिंग की वजह से तस्करों के लिए काले बाजार तक माल पहुंचाना मुश्किल हो रहा है। अधिकारी कहते हैं, "इससे बैंकों को फायदा हो रहा है। बीते कुछ हफ्तों में हमारा सोने का कारोबार बेहतर हुआ है।"
 
 
भारत सरकार ने अगस्त 2013 में सोने पर आयात शुल्क बढ़ा कर 10 फीसदी कर दिया था। इसके बाद से सोने की तस्करी बढ़ गई। तस्कर विदेशों से ज्यादा सोना लाने लगे और उसे भारतीय बाजार में नगद बेचने लगे। इस दौरान न तस्करों ने कोई टैक्स चुकाया, न ही खरीदने वालों ने। 2017 में सरकार ने सोने की बिक्री पर 3 फीसदी सेल्स टैक्स लगा दिया, उसके बाद तस्करी में और इजाफा हुआ।
 
 
लेकिन फिलहाल चुनावों में तस्कर शांत दिख रहे हैं। भारतीय चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक 50,000 रुपये से ज्यादा कैश लेकर चलने वाले लोगों को वैध दस्तावेज अनिवार्य रूप से दिखाना होगा। पैसे का वैध स्रोत दिखाने में नाकाम रहने पर कैश जब्त किया जा सकता है। शादियों के सीजन में यह नियम ज्वेलरी उद्योग को परेशान कर रहा है। ज्वेलरों के मुताबिक 50,000 रुपये बहुत ही कम हैं, सोने की दो तोले (20 ग्राम) की एक चेन ही 50,000 रुपये से ज्यादा महंगी होती है।
 
 
कोलकाता में सोने के होलसेल हर्षद अजमेरा के मुताबिक काले बाजार में सोना आम तौर पर 13 फीसदी तक सस्ता होता है। लेकिन चुनाव आयोग की सख्ती के कारण अभी ब्लैक मार्केट बंद सा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक 2018 में 95 टन सोना तस्करी के जरिए भारत पहुंचा। भारत की गोल्ड एसोसिएशन इस आंकड़े को दोगुना बताती है।
 
 
ओएसजे/एमजे (रॉयटर्स)
 

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