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चंद्रग्रहण और उपछाया चंद्रग्रहण का अंतर

अनिरुद्ध जोशी
इस वर्ष 2020 में दूसरा चंद्र ग्रहण 5 जून शुक्रवार को लगने जा रहा है। यह चंद्र ग्रहण कई मायनों में बेहद खास है। यह चंद्र ग्रहण 5 जून की रात तकरीबन 11 बजकर 16 मिनट से शुरू होगा और फिर 6 जून की रात को 2 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। ग्रहण काल के दौरान चंद्रमा वृश्चिक राशि में होंगे। खास बात यह है कि 5 जून को ज्येष्ठ मास की पूर्णिमा पर उपछाया चंद्र ग्रहण होगा।
 
 
कैसे होता है चंद्र ग्रहण : जब सूर्य और चंद्रमा के बीच पृथ्वी आ जाती है तब सूर्य की रोशनी चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाती है। इसे ही चंद्रग्रहण कहते हैं। इस दौरान धरती की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। लेकिन इस बार धरती की वास्तविक छाया न पड़कर उसकी उपछाया पड़ेगी।
 
क्या है उपछाया ग्रहण : उपछाया ग्रहण अर्थात वास्तविक चंद्र ग्रहण नहीं होगा। मतलब यह ग्रहण ऐसी स्थिति में बनता है जब चंद्रमा पर पृथ्वी की छाया न पड़कर उसकी उपछाया मात्र पड़ती है। उपछाया अर्थात वास्तविक छाया नहीं बल्कि एक धुंधली सी छाया नजर आती है। मतलब यह कि ग्रहण काल में चंद्रमा कहीं से कटा हुआ होने की बजाय अपने पूरे आकार में नजर आएगा।
 
हालांकि प्रत्येक चंद्र ग्रहण के प्रारंभ होने से पहले चंद्रमा धरती की उपछाया में ही प्रवेश करता है, जिसे चंद्र मालिन्य या अंग्रेजी में Penumbra कहा जाता है। उसके बाद ही चंद्रमा धरती की वास्तविक छाया (Umbra) में प्रवेश करता है, तभी उसे चंद्रग्रहण कहते हैं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं होगा। मतलब यह कि चंद्रमा उपछाया में प्रवेश करके ही बाहर निकल जाएगा और उस पर धरती की वास्तविक छाया नहीं पड़ेगी। इस अवस्था में चंद्रमा का बिंब काला होने की बजाए धुंधलासा नजर आएगा।
 
 
दरअसल, कोई भी चंद्रग्रहण जब भी आरंभ होता है तो ग्रहण से पहले चंद्रमा पृथ्वी की परछाई में प्रवेश करता है जिससे उसकी छवि कुछ मंद पड़ जाती है तथा चंद्रमा का प्रभाव मलीन पड़ जाता है। जिसे उपछाया कहते हैं। इस दिन चंद्रमा पृथ्वी की वास्तविक कक्षा व छाया में प्रवेश नहीं करेंगे अतः इसे ग्रहण नहीं माना जाएगा। ऐसे में सूतक काल का समय भी नहीं माना जाएगा।

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