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भोपाल की पहचान बड़े तालाब के संरक्षण के लिए एक्शन में प्रशासन, अतिक्रमण पर लाल निशान लगाने का अभियान शुरु

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Administration in action to protect Bhopal's identity Bada Talab
राजधानी भोपाल की पहचान बड़े तालाब को अ्तिक्रमण मुक्त कराने के लिए एक बार फिर बड़े पैमाने पर अभियान शुरु हो गया है। बड़ा तालाब के कैचमेंट एरिया और फुल टैंक लेवल के आसपास अवैध निर्माणों को चिन्हित करने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा अभियान शुरू करते हुए अवैध अतिक्रमण पर लाल निशान लगाना शुरु कर दिया है। 
 
बुधवार से जिला प्रशासन के राजस्व अमला और नगर निगम की संयुक्त टीमों ने तालाब के किनारे से 50 मीटर के नो-कंस्ट्रक्शन जोन में आने वाले अतिक्रमणों पर लाल निशान लगाना शुरु कर दिया है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के मुताबिक अवैध अतिक्रमण को चिन्हिंत करने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया है और एक हफ्ते में इनके चिन्हांकन का काम पूरा हो जाएगा।

इस पूरी कार्रवाई का उद्देश्य उन अवैध निर्माणों को स्पष्ट करना है जो एनजीटी और सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर बनाए गए हैं। जिला प्रशासन ने बड़े तालाब के कैचमेंट इलाके वीआईपी रोड, खानूगांव, और बैरगढ़ में सीमांकन का कार्य शुरु कर अवैध अतिक्रमणों पर लाल निशान लगाना शुरू कर दिया है। इस कार्रवाई  के दौरान तालाब के किनारे से 50 मीटर के दायरे यानि नो-कंस्ट्रक्शन जोन में आने वाले सभी अवैध अतिक्रमणों को हटाया जाएगा।
 
गौरतलब है कि पिछले दिनों भोपाल सांसद आलोक शर्मा की अध्यक्षता में हुई बैठक में बड़े तालाब को अतिक्रमण मुक्त बनाने का मुद्दा जोर-शोर से उठा था। बैठक में भोपाल की ऐतिहासिक जल धरोहर, शहर की लाइफलाइन बड़े तालाब से अतिक्रमण हटाने, प्रदूषण हटाने, भूमाफियाओं से बचा कर तालाब को संरक्षित, सुरक्षित करने को लेकर चर्चा हुई थी। बैठक में सांसद आलोक शर्मा ने बैठक में कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह से पूछा कि अतिक्रमण हटाने के लिए एनजीटी ने अब तक कितने आदेश जारी किए हैं, कितने आदेशों का पालन किया गया है। भविष्य में कोई अतिक्रमण न हो और एनजीटी के आदेश पर अमल करने के लिए कोई टीम गठित की है क्या। इस पर अधिकारी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सके।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि बड़ा तालाब अब 31 किमी का नहीं रहा। अतिक्रमण और अवैध निर्माण के चलते ये महज आठ से नौ किमी ही बचा है।  जिसमें बड़े तालाब के बड़े एरिया को अवैध रुप से फार्म हाउस ने दबा लिए है। इसके साथ पक्के मकान बनने से तालाब की सीमा खत्म हो गई है।।

बैठक में अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए थे कि  बड़े तालाब के अस्तित्व को बचाने के लिए अब बिना किसी दबाव के कार्रवाई की जाए। तालाब के संरक्षण के लिए एक नया मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है और कार्रवाई की निगरानी के लिए एक जिला स्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया गया है। बैठक में भोपाल  सांसद आलोक शर्मा ने इस बात पर नाराजगी जताई कि अतिक्रमण के कारण तालाब का क्षेत्रफल 31 वर्ग किमी से सिमटकर काफी कम रह गया है। इसके बाद अब प्रशासन एक्शन मोड में है और अवैध निर्माण पर लाल निशान लगाने की  कार्रवाई शुरु कर दी है।

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