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मध्यप्रदेश में मंकीपॉक्स पर अलर्ट, स्वास्थ्य विभाग ने जिलों को विशेष सतर्कता बरतने के दिए निर्देश

विकास सिंह
सोमवार, 23 मई 2022 (11:47 IST)
भोपाल। देश में कोरोना की रफ्तार कम होने के बाद अब एक नए संकमण मंकीपॉक्स  ने दहशत बढ़ा दी है। दुनिया के कई देशों मंकीपॉक्स के बढ़ते केस के बाद अब मध्यप्रदेश में भी अलर्ट जारी कर दिया गया है। केंद्र के निर्देश पर प्रदेश के सभी जिलों को मंकीपॉक्स को लेकर सतर्कता बरतने के निर्देश जारी किए गए है। स्वास्थ्य विभाग ने सभी जिलों के सीएमएचओ को इसकी निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही विदेश से आने वाले यात्रियों और संदिग्ध लक्षणों वाले मरीजों के सैंपल एनआईवी पुणे भेजने के निर्देश दिए गए है। केंद्र सरकार ने सभी राज्यों को विदेश से लौटे यात्रियों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए हैं।
 
मध्यप्रदेश सरकार के प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि वर्तमान में मध्यप्रदेश में  मंकीपॉक्स का कोई भी केस नहीं है। सभी जिलों पर निगाह रखते हुए सरकार ने मंकीपॉक्स को लेकर जिलों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए है।
 
ऐसा माना जाता है कि दुनिया में मंकीपॉक्स अफ्रीका से फैला है। 2003 से 2018 के बीच अमेरिका, ब्रिटैन, नाइजीरिया, सिंगापुर और इजराइल आदि देशों में इसके कई मामले देखने को मिले थे।  
 
कैसे फैलता है मंकीपॉक्स?-आमतौर पर मंकीपॉक्स संक्रमित जानवरों के खून, शरीर का पसीना या मल-मूत्र आदि तरल पदार्थों के सीधे सम्पर्क में आने से फैलता है। गिलहरियों और चूहों में भी इसका संक्रमण पाया जा चुका है, इन जानवरों का अधपका मांस से उससे बने हुए उत्पादों के सेवन से भी संक्रमण का खतरा रहता है। संक्रमित इंसानों से इंसान में मंकीपॉक्स फैलने के बहुत कम मामले सामने आए है। लेकिन, संक्रमित व्यक्ति को छूने या उसके संपर्क में आने से इसके फैलने का खतरा बना रहता है। 
 
क्या हैं इसके लक्षण?- मंकीपॉक्स से संक्रमित लोगों में आमतौर पर प्राथमिक लक्षणों का असर दिखने में पांच से 21 दिनों के बीच का समय लगता है। इनमें बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, पीठ दर्द, ग्रंथियों में सूजन, कंपकंपी और थकावट शामिल हैं। इन लक्षणों का अनुभव करने के एक से पांच दिन बाद आमतौर पर दाने दिखाई देते हैं। ये दाने शुरुआत में खसरा या चेचक जैसे दिखते है। ये दाने संक्रमण के पहले और दूसरे हफ्ते में हाथ-पैर से लेकर पूरे शरीर पर फैल सकते हैं। अगर संक्रमण गंभीर नहीं होता, तो ये दाने खुद सूखकर गिर जाते हैं। 
 

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