भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री और सीनियर कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह RSS और भाजपा के संगठन के साथ पीएम मोदी की तारीफ पर अब अपनी ही पार्टी में घिर गए है। पूर्व राज्यसभा सांसद और कांग्रेस नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी की बेटी निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह पर सवाल उठाते हुए उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है। सोशल मीडिया पर लिखी पोस्ट में निधि चतुर्वेदी ने दिग्विजय सिंह को दोगला बताते हुए सामंतवाद और ठाकुरवाद का पोषक बताया।
निधि चतुर्वेदी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में सवाल उठाते हुए लिखा कि वैचारिक दोगलापन या 'घर वापसी' की छटपटाहट? कांग्रेस की जड़ों में मट्ठा डालने वाले दिग्विजय सिंह पर कब होगी कार्रवाई? इसके साथ ही उन्होंने आगे लिखा कि दिग्विजय सिंह के हालिया बयान ने राहुल गांधी से लेकर उन तमाम ज़मीनी कार्यकर्ताओं के मुँह पर तमाचा मार दिया है, जो आरएसएस और बीजेपी की विचारधारा के खिलाफ सड़क पर लड़ रहे हैं। एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता होने के नाते उनकी यह ज़िम्मेदारी बनती थी कि वे पार्टी के वैचारिक संघर्ष को धार देते, न कि विपक्षी खेमे का गुणगान कर अपने ही कार्यकर्ताओं का मनोबल तोड़ते। सुर्खियों में बने रहने की उनकी इस 'ऊल-जुलूल' बयानबाज़ी ने आज हर सच्चे कांग्रेसी के आत्म-सम्मान को गहरी ठेस पहुँचाई है। मध्य प्रदेश की राजनीति में ठाकुरवाद, सामंतवाद और गुटबाज़ी को खाद-पानी देकर दिग्विजय सिंह ने हमेशा कांग्रेस को मज़बूत करने के बजाय उसे भीतर से खोखला किया है।
विपक्ष से ज्यादा दिग्विजय ने कांग्रेस को पहुंचाया नुकसान- कांग्रेस नेता निधि चतुर्वेदी ने लिखा कि मध्य प्रदेश की राजनीति में यदि कोई एक चेहरा पिछले बीस वर्षों से लगातार हस्तक्षेप करता रहा है, तो वह दिग्विजय सिंह हैं। संगठनात्मक फैसले हों, नेतृत्व चयन हो या राजनीतिक दिशा तय करने की बात-हर जगह उनकी भूमिका निर्णायक रही है। इसका परिणाम यह हुआ कि कई समर्पित और ज़मीनी नेता या तो हाशिए पर चले गए या राजनीति से ही बाहर हो गए। कांग्रेस को जितना नुकसान विपक्ष ने नहीं पहुँचाया, उतना दिग्विजय सिंह की अंदरूनी खींचतान और व्यक्ति-केंद्रित राजनीति ने किया।
संयोय या दिग्विजय के पारिवारिक डीएनए का प्रभाव?- निधि चतुर्वेदी ने आगे लिखा कि बहुत कम लोगों को यह पता होगा कि दिग्विजय सिंह का नाता उस 'हिंदूवादी' राजनीति से कितना पुराना है, जिसका वे विरोध करने का ढोंग करते हैं। The Saffron Tide सहित मध्य प्रदेश की राजनीति पर लिखी गई कई पुस्तकों और शोधपत्रों में उल्लेख मिलता है कि राघोगढ़ राजघराने की जड़ें हिंदू महासभा से जुड़ी रही हैं। दिग्विजय सिंह के इस दोगले चेहरे को बेनकाब करते हुए एक बार आरएसएस के वरिष्ठ नेता राम माधव ने एक बेहद गंभीर खुलासा किया था। राम माधव ने साक्ष्यों के साथ दावा किया था कि"दिग्विजय सिंह के पिता न केवल सावरकर की हिंदू महासभा का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक थे, बल्कि स्वयं दिग्विजय सिंह ने नगरपालिका के अध्यक्ष का पद हिंदू महासभा के नामांकित सदस्य के रूप में संभाला था।"
हाईकमान दिग्विजय सिंह को पार्टी से करें निष्कासित- कांग्रेस नेता निधि चतुर्वेदी ने लिखा कि अब समय आ गया है कि कांग्रेस हाईकमान अपनी 'मौन' संस्कृति को त्यागे। दिग्विजय सिंह का यह व्यवहार घोर अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है। पार्टी की साख और कार्यकर्ताओं के गिरे हुए मनोबल को बचाने के लिए यह अनिवार्य है कि कांग्रेस नेतृत्व तुरंत दिग्विजय सिंह को पार्टी से निष्कासित करे और उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करे। कांग्रेस को अब 'सामंती' सलाहकारों की नहीं, बल्कि उन योद्धाओं की ज़रूरत है जिनके मन में विचारधारा को लेकर कोई संशय न हो।