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सरकार की पोस्तादाना नीति ने किसानों की कमर तोड़ी

मुस्तफा हुसैन
मंगलवार, 8 जनवरी 2019 (19:39 IST)
देश की सबसे बड़ी पोस्तादाना मंडी नीमच सहित मंदसौर, जावरा और रतलाम में पोस्तादाना की लेवाली का बुरा हाल है क्योंकि प्रदेश की तत्कालीन सरकार के एक फैसले ने पोस्तादाना किसानों की कमर तोड़कर रख दी, जिसके चलते भारतीय पोस्तादाना टर्की और चीन के पोस्तादाना के सामने टिक नहीं पा रहा।
 
यह स्थिति इसलिए पैदा हुई है क्योंकि केंद्र की भाजपा सरकार ने फैसला लिया कि डोडा चूरा की खरीदी-बिक्री बंद हो और उसे जला दिया जाए। डोडा चूरा की यह खरीदी-बिक्री राज्य सरकार पोस्ता भूसा नियम के अंतर्गत करवाती थी। इसी नियम के उपनियम में व्यापारियों को पोस्तादाना छानने की पात्रता होती थी, लेकिन यह नियम विलोपित हो जाने से पोस्तादाना छनाई का उपनियम भी विलोपित हो गया, जिसके चलते व्यापारियों को यह डर सताने लगा कि यदि उन्होंने भारतीय पोस्तादाना खरीदा और छाना तो उन पर एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई ना हो जाए 
 
इस डर के चलते व्यापारियों ने भारतीय पोस्तादाना खरीदने की अपेक्षा टर्की और चाइना का पोस्तादाना खरीदना और बेचना शुरू कर दिया जिससे मालवा के किसानों की कमर टूट गई। पोस्तादाना छनाई का नियम विलोपित होने से नाराज व्यापारियों और किसानों ने एक माह मंडिया बंद रखीं और मांग रखी की पोस्ता छनाई के लिए नया नियम बनाया जाए, जिस पर नीमच की तत्कालीन प्रभारी मंत्री अर्चना चिटनीस ने आश्वासन दिया।
 
तत्कालीन जिला कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने पुलिस और नारकोटिक्स के अधिकारियों को साथ बिठाकर व्यापारियों को आश्वासन दिया की आप पोस्तादाना छानिए आप पर कोई कार्रवाई नहीं होगी तब तक सरकार नया नियम बना देगी।
 
इस आश्वासन के बाद मंडिया चालू तो हो गईं लेकिन वह नियम नहीं बना और भाजपा की सरकार चली गई। 
 
इस मामले में वर्तमान सांसद, विधायक, व्यापारी संघ अध्यक्ष, किसान संगठन, जिला कलेक्टर, मंडी सचिव तमाम लोगों ने तत्कालीन सीएम शिवराजसिंह चौहान से मिलकर और पत्राचार कर मांग रखी की व्यापारी को पोस्तादाना छनाई का लाइसेंस दिया जाए और नया नियम बनाया जाए, लेकिन तब तक चुनाव आ गए और सरकार बदल गई।
 
इस मामले में कांग्रेस सरकार को चाहिए की वह पोस्तादाना छनाई को लेकर नया नियम बनाए जिसमें पोस्तादाना छनाई हो सके और भारतीय पोस्तादाना का वाजिब दाम किसानों को मिल सके क्योंकि बिना साफ़ किया पोस्तादाना बिकेगा नहीं और छानेंगे तो कोई भी एजेंसी उन पर कार्रवाई कर सकती है। इससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है और मंडी के सेल्सटैक्स का भी नुकसान है। 
 
साथ ही जहां देश में टर्की और चाइना से पोस्ता आयात किया जा रहा है, जिसका दाम भारतीय पोस्तादाना से कम है। ऐसे में बिना साफ़ किया पोस्तादाना टर्की के पोस्तादाने के सामने कैसे बिकेगा 
 
गौरतलब है कि अकेली नीमच मंडी में सालाना करीब 20 हज़ार क्विंटल पोस्तादाना आता है। जिस पर सरकार को करोड़ों रुपए सेल्सटैक्स, मंडी टैक्स और जीएसटी मिलता है।
 
मालवा में करीब 30 हज़ार अफीम पट्टेधारी किसान हैं जो पोस्तादाना का उत्पादन करते हैं। इतने ही अफीम के पट्टेधारी किसान पड़ोसी राज्य राजस्थान के हैं, जो अपना पोस्तादाना नीमचर और मंदसौर की मंडियों में बेचने आया करते हैं।
 
आगामी महीनों में लोकसभा के चुनाव होने हैं। यदि मालवा के पोस्तादाना व्यापारियों को पोस्ता छनाई का लाइसेंस मिलता है तो इसका फायदा लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिल सकता है। 

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