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आरक्षण कोई माई का लाल नहीं छीन सकता, पू्र्व CM उमा भारती का बड़ा बयान, भोपाल में लोधी समाज का शक्ति प्रदर्शन

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Uma Bharti big statement on reservation
मध्यप्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने आऱक्षण को लेकर बड़ा बयान दिया है। राजधानी भोपाल में बुंदेला क्रांति के महानायक शहीद राजा हिरदेशाह लोधी के बलिदान दिवस पर शौर्य यात्रा के तहत आयोजित कार्यक्रम में भाजपा की फायर ब्रांड नेता ने कहा कि जब तक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस और गरीब परिवार के बच्चे एक स्कूल में नहीं जाने लगेंगे, तब तक कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता।
 
इसके  साथ ही उमा भारती ने अपने संबोधन में आगे यह भी कहा कि देश की आज़ादी 1947 में बेशक हुई, लेकिन भारत का मन, बुद्धि, विचार आज़ाद हुआ 2014 में, जब नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बने। उमा ने कहा कि एक ने उप्र में राम जन्मभूमि के लिए गद्दी छोड़ दी। दूसरे ने तिरंगे के लिए मप्र में गद्दी छोड़ दी। यह नई आजादी नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में परवान चढ़ी। हम पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को लेकर रहेंगे। एक दिन आयेगा, जब पाकिस्तान घुटने पर बैठ कर माफी मांगेगा। पहलगाम हमले का जवाब देकर हमने यह साबित किया है।
 
मंगलवार को राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान पर आयोजित पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, पंचायत मंत्री प्रह्लाद पटेल, पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, बालाघाट विधायक अनुभा मुंजारे, पिछोर विधायक प्रीतम लोधी, बंडा विधायक विरेंद्र सिंह लमबरदार, बड़ा मलहरा विधायक राम सिया भारती, बरगी विधायक नीरज सिंह ठाकुर, लोधी लोढ़ा महासभा के प्रदेश अध्यक्ष जालम सिंह पटेल और राजा हिरदेशाह के वंशज कौशलेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में लोधी-लोधा समाज के लोग मौजूद रहे।
 
स्कूलों में पढाई जाएगी  राजा हिरदेशाह की जीवन यात्रा-मध्यप्रदेश अब राजा हिरदेशाह लोधी के बारे में न केवल पढ़ेगा, बल्कि उनकी जीवन यात्रा भी देखेगा। दरअसल, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव राजा हिरदेशाह लोधी को पाठ्यक्रम में शामिल कराएंगे और उनके नाम से तीर्थ स्थल का भी निर्माण कराएंगे। सीएम डॉ. यादव ने राजा हिरदेशाह लोधी की 168वीं पुण्यतिथि (शौर्य दिवस) के अवसर पर उन्हें नमन किया। उन्होंने 28 अप्रैल को राजधानी भोपाल के जंबूरी मैदान में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि आज का यह दिन पवित्र दिन है। कई योनियों के बाद मनुष्य जन्म मुश्किल से मिलता है। नर्मदा टाइगर के नाम से पहचान रखने वाले राजा हिरदेशाह ने अंग्रेज शासन के खिलाफ 1842 में संघर्ष का संकल्प लिया। वे अपने भाइयों के साथ 1858 तक संघर्ष करते रहे।
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सीएम डॉ. यादव ने कहा कि राजा हिरदेशाह का जीवन हम सभी के लिए प्रेरणादायी और आदर्श है। समाज के महापुरुषों के संघर्ष को भी याद करने की आवश्यकता है। जो संघर्षों से लड़ना जानता है, समाज उसका अभिनंदन करता है। राजा हिरदेशाह ने बुंलेदखंड के बुंदेला और आदिवासी समाज को एकजुट कर अंग्रेजों के समाने आंदोलन शुरू किया था। राज्य सरकार उनके संघर्ष पर शोध कराएगी। उनके जीवन के महत्वपूर्ण घटनाक्रम को लिपिबद्ध कर शिक्षा विभाग में पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा। राज्य सरकार ने प्रदेश की विरासत और महान हस्तियों का सम्मान करते हुए सबसे पहले रानी अवंतीबाई के नाम पर सागर में राजकीय विश्वविद्यालय की स्थापना की। रानी अवंतीबाई का योगदान 1857 की क्रांति में सबसे बड़ा है। 
 
संस्कृति को सहेज रही राज्य सरकार-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार सनातन संस्कृति के सभी तीज-त्योहार धूमधाम से मना रही है। राज्य सरकार ने किसान भाई-बहनों के कल्याण के लिए कृषक कल्याण वर्ष मनाने की पहल की है। नर्मदा किनारे हीरापुर में राजा हिरदेशाह के नाम से एक तीर्थ स्थल का निर्माण किया जाएगा। इतिहास के गौरवशाली पृष्ठ फिर से खुलने चाहिए। महान सम्राट विक्रमादित्य पर भी शोध संस्थान बनाया गया है। प्रदेश सरकार सांस्कृतिक पुनरोत्थान के लिए संकल्पित है। इसीलिए प्रत्येक नगरीय निकाय में सर्व सुविधायुक्त भव्य गीता भवन बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी जनपदों में एक-एक वृंदावन ग्राम भी तैयार किए जा रहे हैं। 
 
अमूल्य है राजा हिरदेशाह का योगदान-पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने कहा कि राजा हिरदेशाह ने वर्ष 1842 से वर्ष 1858 तक लगातार ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष जारी रखा। लोधी समाज सामर्थ्यवान है। इस समाज के सदस्यों ने देश की रक्षा के लिए दुश्मनों से लोहा लिया। समाज के युवाओं को साहसी, शक्तिमान, शिक्षित और संस्कारवान बनने की आवश्यकता है। हमारा संकल्प समाज के साथ है। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने कहा कि राजा हिरदेशाह लोधी ने 1857 की क्रांति से पहले आजादी के लिए 1842 में क्रांति का बिगुल फूंका था। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। लोधी-लोधा समाज के प्रदेशाध्यक्ष एवं विधायक जालम सिंह पटेल ने कहा कि लोधी समाज के गौरव राजा हिरदेशाह ने देश की आजादी के लिए अपना बलिदान दिया। उन्होंने ब्रिटिश शासन के कानूनों का विरोध करते हुए 1842 की क्रांति का नेतृत्व किया। इस संघर्ष में उनके करीब 12 भाई बलिदान हुए। 
 
 

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