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मदर्स डे पर 26 साल लंबी कविता : मां नहीं चाहिए

Webdunia
मंशा क्षितिज 
 
 
दर्द के गहरे अंधेरे के बाद, जैसे ही वो आया लगा कि दुनिया रौशन हो गई,
जितनी कभी न थी इतनी कोमल और सुन्दर हो गई
आंखें तो सुन्दर थीं, लेकिन देखना उसका मन को छूता था
हाथ छोटे-छोटे प्यारे थे, लेकिन स्पर्श आत्मा तक पहुंचता था
जब वो मेरे भीतर था, बातें तो तब भी उससे करती थीं,
लेकिन अब तो सिवा उसके जैसे कोई और बात ही ना होती थी
अरे आज वो चला,आज दौड़ा,आज उसे मैंने स्कूल में छोड़ा
हाथ उसका टीचर ने जब पकड़ा,हुई गहरी एक तसल्ली,
और साथ ही बहुत सी घबराहट भी
रोते-रोते क्लास में वो गया, दुपट्टा मेरा जाने क्यों भीग गया
चलो आज स्कूलिंग कम्पलीट...अब कॉलेज जाना है,
पापा बोले,देखो भाई कैसे क्या जमाना है... 
सारी जोड़-तोड़ करके भरी हुई फीस चलो काम आ गई
चेहरे पर परिवार के मुस्कान आ गई
 
सारी मस्तियों और शैतानियों के साध पढ़ने वाला बच्चा था वो
अच्छा नहीं बहुत अच्छा था वो
आज इंजीनियर हो गया...मस्ती और काम का...वो आधा-आधा हो गया 
बुलेट पर इतराता ,काम पर जाता, वो कई सारी निगाहों के लिए 
प्यारा सा एक सवाल हो गया
जिम जाता था वो,मगर चाल में हम सभी की गुरूर आ रहा था 
खिलखिलाते से उसके घर में सुनहरा सा एक रंग आ रहा था
 
आज, पता है क्या हुआ! आज वो एक बहार को हमसे मिलाने ले आया
इतनी सुंदर... इतनी सुंदर इतनी सुंदर!!!
 लगा कि ज़िन्दगी कुछ और चमकीली हो गई
पुरानी सारी कड़वी यादें, सारी तकलीफें मन से बहुत दूर हो गई
हम खुश,सब ख़ुश, सब सुंदर, बहुत सुंदर
पत्नी के हाथों में हाथ देख कर उसका... 
 याद आया वही टीचर के साथ वाला मंजर
फिर से तसल्ली भी थी और घबराहट भी... 
लेकिन इस बार तसल्ली बहुत गहरी थी... 
ये बच्चा जो बहुत अच्छा है,दूर तक जाएगा, बहुत सुंदर दुनिया बनाएगा
जहां हम सब मुस्कुराएंगे,खिलखिलाएंगे.... 
 
लेकिन....अचानक ये क्या हुआ! जाने क्यों हुआ!!!
बच्चा आया सहमा हुआ, मां ये क्या हुआ!!!
कह रही है वो, मां नहीं चाहिए!!! ये सब क्या हुआ!!
कहती है मां नहीं चाहिए, मां ही क्यों पापा भी नहीं, 
और बहन भी आख़िर क्यों?? मैं हूं ना... 
देखो कितनी सुंदर हूं...वादा करतीं हूं ख़ुश रहेंगे दोनों
सिर्फ हम दोनों बहुत ख़ुश रहेंगे उम्र भर,,,
हां, जानता हूं, लेकिन,,!!?? जो मेरे अपने...  
लेकिन-वेकिन कुछ नहीं बेबी,, मैं हूं ना... 
 Why are you botheingr for family ???
बच्चा जो अब भी बच्चा था और सच में बहुत अच्छा था
नहीं समझ पाया ये स्मार्ट, जीनियस बातें, 
उसकी आंखों में आंसू,अचरज और बहुत सारा गुस्सा था
 
अब? अब क्या, प्यारी हो गई हैं और ज्यादा उसकी प्यारी आंखें
क्योंकि अब शामिल हैं उनमें, कड़वे अनुभवों की चुभन
प्यार, रिश्तों और जीवन की तमाम उलझन, 
उनमें तलाश है,उस दुनिया की जो सुंदर हो उसकी आंखों की तरह और मासूम हो उसके मन की तरह... 
मुझे पता है, पक्का पता है उसे मिलेगी वो दुनिया जहां स्पर्श मन तक पहुंचता है और आवाज आत्मा तक जाती है, 
आवाज आत्मा तक जाती है,,
मुझे पता है, पक्का पता है उसे मिलेगी वो दुनिया जहां स्पर्श मन तक पहुंचता है, 
जहां आवाज आत्मा तक जाती है...। 
जहां आवाज आत्मा तक जाती है...। 

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